तो क्या हुआ जो ये जहाँ नाराज़ हो गया,
मैं
ख़ुद से राज़ी हुआ तो 'अल्फ़ाज़' हो गया !
एक राज़ कहते-कहते
मैं रुक जाता था अक्सर,
लेकिन
ग़ज़ल में ज़ाहिर हर राज़ हो
गया !
तू
बन गया था मेरे अंजाम का सबब,
जब
तू गया तो मेरा आग़ाज़ हो गया !
पंखों
की बंदिशें और पैरों की बेड़ियाँ,
सब
तोड़ मेरा हौसला परवाज़ हो गया !
बदल
हम दोनों गए बस फ़र्क़ है इतना,
तू ख़ुदगर्ज़ हो गया, मैं बेनियाज़ हो गया !
मेरी
वजह से तुझसे दुनिया को हैं गिले,
ग़म-ए-हयात मेरा कारसाज़ हो गया !
एक
पल में छोड़ जाती है रूह जिस्म को,
ऐ बुलबुले, क्यूँ ख़ुद पे तुझे नाज़ हो गया !
इज़्ज़त, दुआ, सुकून, और मेयार, सब मिला,
क़िस्मत
से मुझे हासिल नाम-ए-फ़राज़ हो गया !
||| फ़राज़ |||
नाराज़= Displeased, Offended
राज़ी= Satisfied, Agreed, Pleased
राज़= Secret
ज़ाहिर=
Open, Evident
अंजाम=
Fate, End, Result
सबब= Cause, Reason, Ground
आग़ाज़= Beginning,
Commencement.
बंदिशें=
Restrictions
बेड़ियाँ=
Chains, Shackles.
हौसला=
Courage, Morale,
परवाज़=
Flight
फ़र्क़= Difference.
ख़ुदगर्ज़=
Selfish,
Self-Interested.
बेनियाज़=
Carefree, Without Want,
Independent.
गिले= Complaints,
Lamentations.
ग़म-ए-हयात= Sorrows Of Life
कारसाज़=
Benefactor, Guardian,
Doer.
रूह= Soul, Spirit
जिस्म=
Bode, Substance.
बुलबुले=
Bubble
नाज़= Pride
मेयार=
Standard
हासिल=
Gain
नाम-ए-फ़राज़= Name Of Faraaz (In Respect Of The Great Urdu
Poet Ahmed Faraz Sir)