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शुक्रवार, 19 जुलाई 2019

आमाल

जब काम बुरा मैं करता हूँ,
तब आईने से डरता हूँ !

कल से अच्छा बन जाऊँगा,
कह कर के रोज़ मुकरता हूँ !

वो जो मेरा गुज़रा कल है,
मैं उससे रोज़ गुज़रता हूँ !

इल्ज़ाम किसीको क्यूँ मैं दूँ,
मैं करता हूँमैं भरता हूँ !

जीने की ख़ातिर इश्क़ किया,
अब इश्क़ की ख़ातिर मरता हूँ !

डर है अपने आमालों का,
वरना कब मौत से डरता हूँ !

मैं अपने सच से वाक़िफ़ हूँ,
'अल्फ़ाज़मैं ख़ुद से डरता हूँ !

||| अल्फ़ाज़ |||

इल्ज़ाम = Allegation, Blame, आरोप
ख़ातिर = For The Sake Of.
आमाल = Deeds, Conducts, कर्म, व्यवहार
वाक़िफ़ = Acquainted With, Aware Of, Informed, जानकार

बुधवार, 10 जुलाई 2019

वादा

आग से आग को जब जलाया गया,
इश्क़ कह करके उसको बुलाया गया !

जबसे शोला हवा का दिवाना हुआ,
और भड़का वो जितना बुझाया गया !

याद रखना हमें हम बिछड़ जो गए,
इक ये वादा हमेशा निभाया गया !

मेरी क़दमों की आहट नहीं याद तो,
चौंक कर के क्यूँ सर को उठाया गया !

याद आई मुलाकात एक शाम की,
फूल जुड़े में जब भी लगाया गया !

कुछ को इबरत मिलीकुछ को राहत मिली,
शेर 'अल्फ़ाज़का जब सुनाया गया !

||| अल्फ़ाज़ |||

शोला = Blaze, Flame,
जूड़ा = Hair Bun
इबरत = Lesson, Warning, Example, सीख
राहत = Rest, Comfort, Ease, आराम, चैन
शेर = Couplet

बुधवार, 26 जून 2019

क़रार


जो कहा नहींजो सुना नहीं,
जो किसी ग़ज़ल में बयाँ नहीं !

वो जो हममें तुममें क़रार था,
हालात के आगे टिका नहीं !

पिंजरा तो उसने खोल दिया,
उड़ सकता था मैं उड़ा नहीं !

शायद उसको जाना ही था,
आवाज़ दी पर वो रुका नहीं !

शीशा गल के जुड़ सकता है,
दिल टूटा तो फ़िर जुड़ा नहीं !

ता'वीज़ दो उसको इश्क़ हुआ,
आसेब की कोई दवा नहीं !

तूफ़ान से तो बच सकता था,
मैं दरख़्त था झुक सका नहीं !

फ़िर लौट मेरी चिट्ठी आई,
वो घर अब उसका पता नहीं !

'अल्फ़ाज़कई हमराह मिले,
पर इश्क़ दोबारा मिला नहीं !

||| अल्फ़ाज़ |||

बयाँ = Statement, Assertion, वर्णनकहना
क़रार = Agreement, Bond, अनुबंधसमझौता
ता'वीज़ = Amulet, Talisman, जंतर
आसेब = Evil Spirit, Demon, भूत-प्रेतप्रेत-बाधा
दरख़्त = Tree, पेड़वृक्ष
हमराह = Fellow-Traveler, सहयात्री

सोमवार, 17 जून 2019

फ़ासले

इस तरह थे कभी फ़ासले ही नहीं,
यूँ मिले जैसे पहले मिले ही नहीं !

उनसे पहले कोई दर्द हमको न था,
उनसे पहले कोई ग़म मिले ही नहीं !

आ भी जाओ तो वो बात होगी नहीं,
तुममें हममें वो अब सिलसिले ही नहीं !

सारे इल्ज़ाम तस्लीम हमने किये,
दरमियाँ अब कोई मसअले ही नहीं !

आख़िरी बार हमसे वो ऐसे मिले,
जैसे पहले कभी भी मिले ही नहीं !

उनको ख़ुश देख कर हम ज़रा जल गए,
हमको लगता था हम दिल-जले ही नहीं !

उम्र भर की कचहरी का चक्कर है इश्क़,
रोज़ तारीख़ हैफ़ैसले ही नहीं !

उनसे अल्फ़ाज़’ जब इश्क़ ही न रहा,
उनसे शिकवे नहींऔर गिले ही नहीं !

||| अल्फ़ाज़ |||

फ़ासले = Distance, दूरी
इल्ज़ाम = Allegation, Blame, आरोप
तस्लीम = Accept, Acknowledge, स्वीकार
दरमियाँ = Middle, In Between, मध्य
मसअले = Problem , Matter, 
दिल-जले = Bereaved, Frustrated
कचहरी = Court, न्यायालय
तारीख़ = Date, 
फ़ैसले = Decision, Judgment, निर्णय
शिकवे = Complaint, Reproach 
गिले = Complaint, Lamentation

सोमवार, 10 जून 2019

पागल


तकलीफ़न कोई हलचल है,
शायद अब दर्द मुसलसल है !

अब उसके बिना अधूरा हूँ,
अब मेरा इश्क़ मुकम्मल है !

ये कह के उसने ठुकराया,
शायर हैशायद पागल है !

दिखती है क़त्ल की तैयारी,
उनकी आँखों में काजल है !

कुछ अब भी गुज़रा करता है
,
हाँलाकि वो गुज़रा कल है !

तहज़ीब ही उनका गहना है,
वो जिनके सर पे आँचल है !

जीने की अज़ीयत क्या जाने,
जिनके बिस्तर में मख़मल है !

सच्चाई की
जाँ को ख़तरा है,
'अल्फ़ाज़शहर अब मक़्तल है !

||| अल्फ़ाज़ |||

तकलीफ़ = Trouble, Difficulty, कष्टपीड़ा
हलचल = Tumult, Turmoil, कोलाहल
मुसलसल  = Regular, Successive, लगातार, जारी
मुकम्मल  = Perfect, Complete, सम्पूर्णपूर्णतयः
क़त्ल = Murder, हत्या
अज़ीयत = Trouble, Suffering, कष्ट
मख़मल = Velvet
तहज़ीब = Politeness, Civilization, सभ्यता
आँचल = Veil, दुपट्टा
जाँ = life, existence, जीवन
मक़्तल = A Place Of Slaughter Or Execution, वधशाला

मंगलवार, 2 अप्रैल 2019

ज़िन्दगी

ख़्वाह-मख़ाह के डर में गुज़री,
ज़िन्दगी अगर-मगर में गुज़री !

तेरे इश्क़ में सारी जवानी,
एक गर्मी की दोपहर में गुज़री !

जैसे गाँव से रेलगाड़ी गुज़रे,
ज़िन्दगी ऐसे शहर में गुज़री !

रात को रो लिए अंधेरों में,
मत पूछिये क्या सहर में गुज़री !

गुनाहगारी में बाँकपन गुज़रा,
पीरी तो दर-गुज़र में गुज़री !

पल भर को सोचिये तो लगता है,
जैसे ज़िन्दगी पल भर में गुज़री !

पाँव फैले नहीं मगर ढके भी नहीं,
ज़िन्दगी छोटी सी चादर में गुज़री !

मेरे हाल से बे-ख़बर है 'अल्फ़ाज़',
ज़िन्दगी जिसकी फ़िकर में गुज़री !

||| अल्फ़ाज़ |||

ख़्वाह-मख़ाह = Just Like That, यूँ हीऐसे ही
अगर-मगर = If-But
सहर = Morning, प्रभातसुबह
गुनाहगारी = Sinning, पाप
बाँकपन = Teenage, Adolescence, लड़कपन
पीरी = Old Age, बुढ़ापा
दर-गुज़र = Pardon, Forgiveness, क्षमा करना
बे-ख़बर = Ignorant, Uninformed, अन्जान
फ़िकर = Concern, Thought, चिंता