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बुधवार, 24 जुलाई 2019

किसको है !

अब हिज्र की हैबत किसको है,
अब उनसे मोहब्बत किसको है !

अब लोग ज़रा जल्दी में है,
जीने की फ़ुर्सत किसको है !

आमाल ज़रा सबके देखो,
दोज़ख़ से दहशत किसको है !

गर मिले हमें तो जाएज़ है,
रिश्वत से अज़ीयत किसको है !

गर फिसले ज़बाँतो बात अलग,
सच कहने की आदत किसको है !

दुनिया के
 मसाइल क्या कम हैं,
मज़हब की ज़रुरत किसको है  !

'अल्फ़ाज़जो न हो मौत का डर,
तो रब की ज़रुरत किसको है !

||| अल्फ़ाज़ |||

हिज्र = Separation From Beloved, जुदाईविरह
हैबत = Fright, Panic, भयडर,
फ़ुर्सत = Leisure, Rest, आराम 
आमाल = Deeds, Conducts, कर्मव्यवहार
दोज़ख़ = Hell, नर्क
दहशत = Terror, Fear,आतंक 
गर = If, यदि
जाएज़ = Legal, Right, उचितवैध
रिश्वत = Bribe, घूस
अज़ीयत = Trouble, Suffering, कष्ट
ज़बाँ = Tongue, जिह्वाजीभ
मसाइल = Problems, Issues, समस्याएँमुद्दे
मज़हब = Religion, धर्म
रब = God, अल्लाह, ईश्वर

सोमवार, 10 जून 2019

पागल


तकलीफ़न कोई हलचल है,
शायद अब दर्द मुसलसल है !

अब उसके बिना अधूरा हूँ,
अब मेरा इश्क़ मुकम्मल है !

ये कह के उसने ठुकराया,
शायर हैशायद पागल है !

दिखती है क़त्ल की तैयारी,
उनकी आँखों में काजल है !

कुछ अब भी गुज़रा करता है
,
हाँलाकि वो गुज़रा कल है !

तहज़ीब ही उनका गहना है,
वो जिनके सर पे आँचल है !

जीने की अज़ीयत क्या जाने,
जिनके बिस्तर में मख़मल है !

सच्चाई की
जाँ को ख़तरा है,
'अल्फ़ाज़शहर अब मक़्तल है !

||| अल्फ़ाज़ |||

तकलीफ़ = Trouble, Difficulty, कष्टपीड़ा
हलचल = Tumult, Turmoil, कोलाहल
मुसलसल  = Regular, Successive, लगातार, जारी
मुकम्मल  = Perfect, Complete, सम्पूर्णपूर्णतयः
क़त्ल = Murder, हत्या
अज़ीयत = Trouble, Suffering, कष्ट
मख़मल = Velvet
तहज़ीब = Politeness, Civilization, सभ्यता
आँचल = Veil, दुपट्टा
जाँ = life, existence, जीवन
मक़्तल = A Place Of Slaughter Or Execution, वधशाला

शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2019

मोहब्बत

ये जो उनसे ज़रा सी शिकायत हुई,
देखिये तो सही क्या मोहब्बत हुई !

चोट प्यारी सी है, दर्द मीठा सा है,
दिल को भी एक अजब सी अज़ीयत हुई ! 

एक तेरे सिवा सूझता कुछ नहीं,
अब ज़हन की भी दिल जैसी हालत हुई !

आज मेरे लिए मुस्कुरा वो दिए,
ज़िन्दगी ख़ुशनुमा, पुर-मसर्रत हुई !

दिल में महफ़िल है, त्यौहार और जश्न है,
इश्क़ इतवार की जैसे फ़ुर्सत हुई !

हर तसव्वुर तेरा है अदब से किया,
इस तरह आशिक़ी भी इबादत हुई !

उनके आने से 'अल्फ़ाज़' की ज़िन्दगी,
मेहरबान और ख़ूबसूरत हुई !

||| अल्फ़ाज़ |||

शिकायत = Complaint
अजब = Strange, Wonderful, 
अज़ीयत = Trouble, Suffering, 
ज़हन = Mind, Brain, 
ख़ुशनुमा = Pleasant, Beautiful, 
पुरमसर्रत = Joyous, Full Of Happiness
महफ़िल = Party, The Congregation
त्यौहार = Festival
जश्न = A Feast, A Jubilee, Celebration
फ़ुर्सत = Leisure, Freedom, Rest
तसव्वुर = Imagination, Contemplation,
अदब = Respect, Courtesy
आशिक़ी = Love, State Of Being In Love Courtship
तसव्वुर = Imagination, Contemplation,
अदब = Respect, Courtesy
आशिक़ी = Love, State Of Being In Love Courtship
इबादत = Prayer, Worship
मेहरबान = Benign, Kind,

रविवार, 22 जुलाई 2018

मुंडेर !

चलो फ़िर से उसे छत पे बुलाया जाए,
चाँद फ़िर से मुंडेर पे लाया जाए !

सुना है उसकी मुस्कान बड़ी महँगी है,

चलो ख़ुद को दांव पे लगाया जाए !

चलो फ़िर से बहाने से उनको देखें,

चलो फ़िर से  पतंगों को उड़ाया जाए !

वो कश्मकश कि कौन पहले बात करे,

बात करने का कोई बहाना बनाया जाए !

शायद मेरी आहट पे चला आये दौड़ के,

चलो दीवार पे कपड़ों को सुखाया जाए !

चलो फिर से नज़र से कोई बात करें,

हाल-ए-दिल इशारों में जताया जाए !

चलो फ़िर से घर पे कोई महफ़िल हो,

सबके बहाने से उनको भी बुलाया जाए !

चलो फिर से ख़ुद को एक अज़ीयत दें,

चलो फ़िर से दिल उनसे लगाया जाए !

चलो चाँद में तकें फ़िर से उनके चेहरे को,

चलो फ़िर रात को जाग के बिताया जाए !

कोई बदनामी न होगी अगर नाम न आये,

बिना नाम लिए 'फ़राज़' उनपे कुछ सुनाया जाए !

||| फ़राज़ |||


कश्मकश= Struggle, Wrangle, Tussle,
हाल-ए-दिल= Condition Of The Heart
महफ़िल= Party, Gathering
अज़ीयत= Trouble, Suffering, Distress
बदनामी= Defame, Ignominy

सोमवार, 4 सितंबर 2017

इश्क-ए-कामिल!

एक रूह क़ैद है मेरे जिस्म की पिंजरे में,
ऐ ख़ुदा ये क्या अज़ीयत मुझपे नाज़िल है !
मेरी नाकामियां पढ़कर मुझे कहता क़ाबिल है,
हमने तो सुना था कि ज़माना बहुत फ़ाज़िल हैं !

ऐ मुश्किलों तुमसे हर बार जीत जाता हूँ,
मेरी निगाह में हरदम मेरी मंज़िल है !
तू भी आज अपने लहू की तासीर बता,
मेरी रगों में तो मेरे अल्फाज़ शामिल हैं !

बेक़रारियाँ, रतजगे, हूक सी दिल में है,
तेरी उम्मीद में इतना तो हमें हासिल है !
बारहा मेरे होश-ओ-हवास से भी तो तू जाता रहा,
फ़िर क्यूँ तेरे ख़्वाब से मेरी पलकें बोझिल हैं !

मेरे जनाज़े पर वो मेरा ही पता पूछता है,
बहुत ही मासूम सा वो मेरा क़ातिल है !
मेरे ज़िक्र पर अब भी वो चौंक सा जाता है,
नाक़ाम ही सही 'फ़राज़', इश्क तेरा कामिल है !

|||फ़राज़|||


नाज़िल= Descend.
फ़ाज़िल= Intelligent, wise, Expert.
तासीर=Effect, Influence, Impression.
होश-ओ-हवास= All Conciousness and Sense.
कामिल= Perfect.

मंगलवार, 14 फ़रवरी 2017

वो दो आँखें !

जाने कैसा मरहम सा रखती हैं,
जाने कैसी ख़ुदायी हैं वो दो आँखें !
कभी जूनून तो कभी तसल्ली सी,
काजल की स्याही हैं वो दो आँखें !

पलकें बंद कर लीं जब दिल घबराया,
पास चली आयीं वो दो आँखें !
मंज़िल न सही, वो हमसफ़र हैं मेरी,
बाँटती हैं मेरी तन्हाई वो दो आँखें !

कभी ज़िन्दगी ने जो दी अज़ीयत,
छू गयीं जैसे पुरवाई वो दो आँखें !
आज फ़ुरक़त जो सर-ए-शाम आई,
दिल में जगमगायीं हैं वो दो आँखें !

फ़राज़...