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मंगलवार, 23 जुलाई 2019

अमल

ज़िन्दगी की पहेली यूँ हल कीजिये,
जो ज़रूरी है उसपे अमल कीजिये !

||| अल्फ़ाज़ |||

अमल = Act, Process, कार्यकर्म,

शनिवार, 6 अप्रैल 2019

कश्मकश

सच की कोई भी ऐसी दवाई नहीं,
मयकशी में कोई भी बुराई नहीं !

ज़्यादा अच्छा भी होना है होता बुरा,
कुछ बुराई में कोई बुराई नहीं !

ठोकरोंतजरबेऔर कुछ एक सबक़,
और कुछ उम्र भर की कमाई नहीं !

सर्दियों का सितम उनसे पूछो जहाँ,
है अलाव नहींहै रज़ाई नहीं !

ये जो है अजनबीये था कहता कभी,
मौत मंज़ूर है पर जुदाई नहीं !

जाते-जाते वो मेरी हंसी ले गया,
ज़िन्दगी फ़िर कभी मुस्कुराई नहीं !

तेरे बिन ज़िन्दगी कश्मकश में कटी,
जिंदा रह न सकेमौत आई नहीं !

वो ग़ज़ल जिसको 'अल्फ़ाज़मिल न सके,
रोज़ सोचा किएपर सुनाई नहीं !

||| अल्फ़ाज़ |||

मयकशी = Boozing, मदिरापान
तजरबे = Experiences, अनुभव
सबक़ = Lesson, पाठ, सीख
सितम = Oppression, Outrage, Injustice, Tyranny, अत्याचार
अलाव = Bonfire, Campfire
रज़ाई = Quilt
मंज़ूर = Admired, Accepted, स्वीकार
कश्मकश = Struggle, Wrangle, Tussle, खेंच-तान, संघर्ष

शनिवार, 2 मार्च 2019

दुआ

ज़िन्दगी की किसीको दुआ दीजिये,
क़ैद में हों परिंदेउड़ा दीजिये !

माफ़ कर दें तो बे-शक बड़े आप हैं,
दुश्मनों को भी कोई दुआ दीजिये !

हूँ नशे में नसीहत नहीं कीजिये,
होश आये जो चाहे सज़ा दीजिये !

आप दिल से जो देंहमको मंज़ूर है,
न दुआ दे सकेंबद्दुआ दीजिये !

हमको अच्छों का अच्छा नहीं तजरबा,
हमको हमसा ही कोई बुरा दीजिये !

पहले 'अल्फ़ाज़को पढ़ तो लीजे ज़रा,
उसके बारे में फिर फ़ैसला दीजिये !

||| अल्फ़ाज़ |||

बे-शक = Doubtlessly, निसंदेह
नसीहत = Advice, Counsel, सदुपदेश, सीख, अच्छी सलाह,
होश = Sense, चेतना
मंज़ूर = Admired, Accepted, स्वीकार
बद्दुआ = Curse, श्राप
तजरबा = Experience, अनुभव
फ़ैसला = Decision, निर्णय

मंगलवार, 13 नवंबर 2018

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी में जीतने का राज़ तू ये जान ले,
हार है गर मान लेजीत है गर ठान ले !

चाहता है कुछ अगर फ़िक्र करबस कर गुज़र,
पहचान ले दुनिया तुझेगर ख़ुद को तू पहचान ले !

रोज़-ओ-शब्शाम-ओ-सहरभटका किया तू दर-ब-दर,
लौट के घर आएगा , तू ख़ाक दर-दर छान ले !

बोझ ले कर घूमता है क्यूँ तू सारी ज़िन्दगी,
मुख़्तसर सा है सफ़रतू मुख़्तसर सामान ले !

पायेगा तू दिल का
 सुकूँगर बात ये समझेगा तू,
औरों की ग़लती माफ़ करअपनी हो ग़लती मान ले !

अल्लाह को है मानता
अल्लाह की न मानता,
मान लेगा वो तेरीपहले तू उसकी मान ले !

वक़्त ये मुश्किल सही, 'अल्फ़ाज़ये कट जायेगा,
ज़िन्दगी मुश्किल नहींगर तू इसे आसान ले !

||| अल्फ़ाज़ |||

राज़ = Secret
गर = If
ठान = Determine
फ़िक्र = Worry
रोज़-ओ-शब् = Day And Night
शाम-ओ-सहर = Morning And Evening
दर-ब-दर = From Door To Door, Everywhere
ख़ाक =  Dust/ Ashes
दर-दर = Door To Door
मुख़्तसर = Brief
सामान = Provision, Goods, Luggage
सुकूँ =  Peace

शनिवार, 6 अक्टूबर 2018

इंतिहा

जो दुआ थी वही बद्-दुआ हो गई,
ये मेरी ज़िन्दगी क्या से क्या हो गई !

इस तरह से गए छोड़कर वो हमें,
रूह जैसे बदन से जुदा हो गई !

आशिक़ों की
 मिसालें था देता जहाँ,
आशिक़ी मैंने की तो ख़ता हो गई !

तेरी यादों में हमको ख़बर न हुई,
रात कब ढल गई, कब सुबह हो गई !

साथ अपने वो सब राहतें ले गया,
इन लबों से हँसी लापता हो गई !

हमने सोचा था, देखेंगे बस एक नज़र,
एक नज़र क्या मिलीसिलसिला हो गई !

अब तो उम्मीद भी थक के कहने लगी,
छोड़ 'अल्फ़ाज़' अब इंतिहा हो गई !

||| अल्फ़ाज़ |||

बद्-दुआ= Curse
रूह= Soul
बदन= Body
मिसाल= Example, Instance, Model
ख़ता= Mistake/ Fault
ख़बर= Information
राहत= Rest, Comfort, Ease
लब= Lips
लापता= Lost
सिलसिला= Chain, Series, Succession
उम्मीद= Hope
इंतिहा= Utmost Limit, End, Extremity

बुधवार, 5 सितंबर 2018

उस्ताद


ज़िन्दगी की ईमारत की बुनियाद की तरह,
बेहतर कोई तोहफ़ा नहींउस्ताद की तरह !

||| फ़राज़ |||

ईमारत = Building 
बुनियाद= Foundation, Base
तोहफ़ा = Gift
उस्ताद = Teacher, Mentor

सोमवार, 6 अगस्त 2018

ज़िन्दगी !!!

तू जीता क्यूँ गुज़रे कल में है,
ज़िन्दगी तो बस इस पल में है !

नज़र बा-अदब ये सोच के झुक जाती है,
कि उसकी इज़्ज़त भी छुपी आँचल में है !

दो किरदार किस तरह वो जी लेता है,
ज़बां पे यारी, छुरी उसकी बग़ल में है !

चलो मिलें हम फ़िर से अजनबी बन कर,
अधूरेपन सा लुत्फ़ कहाँ मुकम्मल में है !

नशा भी किरदार के मुताबिक़ होता है,
सच की एक दवा भी इस बोतल में है !

तन्हाई भी मुकम्मल मयस्सर नहीं होती,
जिस्म तो एक जिस्मों के जंगल में है !

यूँ तो हर मौत का लम्हा मुक़र्रर है,
जी ले कि ज़िन्दगी तो हर एक पल में है

यक़ीन कर कि ना-मुमकिन कुछ भी नहीं,
'फ़राज़मुश्किल तो महज़ पहल में है !

||| फ़राज़ |||

बा-अदब= Respectfully, With Due Respect.
इज़्ज़त= Respect, Esteem, Honor, Glory
किरदार= Character
ज़बां= Tongue, Speech
बग़ल= Armpit, Side
लुत्फ़= Pleasure, Enjoyment
मुकम्मल= Complete, Perfect
मुताबिक़= Like, Suitable, In Accordance
तन्हाई= Loneliness, Solitude
मयस्सर= Available
मुक़र्रर= Fixed
यक़ीन= Certainty, Truth, Confidence, Trust 
ना-मुमकिन= Impossible
मुश्किल= Difficulty
महज़= Only, Merely
पहल= Beginning, First Initiative.

रविवार, 1 जुलाई 2018

कि तुम जो आ गए हो !!!

कि तुम जो आ गए हो
तो चलो ऐसा करें,
कि वक़्त से कहें
ज़रा आहिस्ता गुज़र !
या घड़ियों को ही बंद कर दें,
और थाम लें हर उस पल को,
कि जिसमें तुम साथ हो !

वक़्त क़ीमती सा लगने लगा है,
कि तुम जो आ गए हो !

कि तुम जो आ गए हो
तो खो जाएँ चलो,
कहीं ऐसी जगह
जहाँ निगाह जहाँ तलक जाए,
कोई दूसरा न हो,
बस एक मैं हूँ,
बस एक तुम हो,

ख़्वाब पूरा सा हो रहा है
कि तुम जो आ गए हो !

कि तुम जो आ गए हो
तो एक इरादा है,
कि ज़िन्दगी को जियेंगे
ज़िन्दगी की तरह,
क्या ख़बर कि कल बिछड़ना हो,
हर पल को जियेंगे
आख़िरी की तरह,

कुछ अधूरा सा था, जो पूरा हो रहा है,
कि तुम जो आ गए हो !!!

कि तुम जो आ गए हो 
तो यूँ लगता है,
कि मेरा होना इतना भी बेवजह तो नहीं !
कई मक़सद हैं मुस्कुराने के,
कई मक़सद हैं ख़्वाब सजाने के,
कई मक़सद हैं रात जागने के,
और कई मक़सद हैं चाँद ताकने के,
और एक मक़सद है
हर बार दुआ मांगने का !

दुआओं पे यकीन आ गया है,
कि तुम जो आ गए हो !

||| फ़राज़ |||


आहिस्ता= Slowly, Gently, Softly.

निगाह= A look, Glance, Attention
यक़ीन= Confidence, Trust
तलक= Till
इरादा= Will, Desire, Intention
खबर = News, Information
आख़िरी= Last, Final.
मक़सद= Purpose, Object,

शनिवार, 12 मई 2018

!!! लकीरें !!!

फूलों से दिल लगाया, दिल चाक कर गए !
काँटों से दिल लगाया तो ज़ख़्म भर गए !

गर्दन को ख़ंजर पे तू रखता है तो सुन ले,
इस आशिक़ी में जाने कितनों के सर गए !

ख़ंजर से लकीरों को बदलने चले थे हम,
नादान हथेलियों में कई ज़ख़्म भर गए !

फ़िर अपनी ज़िन्दगी को मुड़कर जो मैंने देखा,
इस ज़िन्दगी से बहुत तेज़ हम गुज़र गए !

जो लोग ज़िन्दगी की गर्दिश से डर गए,
जीते जी वो लोग ज़िंदा ही मर गए !

इस ज़िन्दगी ने यूँ तो, सबको ही आज़माया,
कुछ लोग बिखर गए तो कुछ लोग निखर गए !

लौटा नहीं जो शाम को, मैं हूँ वो परिंदा,
वो लोग ख़ुश-नसीब थे जो अपने घर गए !

क्यूँ हमको ये ज़माना, कहने लगा है अच्छा,
'फ़राज़देखिये तो सही क्या हम भी मर गए !

||| फ़राज़ |||

चाक= Slit, 
ज़ख़्म= Wound
गर्दन= The neck
ख़ंजर= A Dagger, A poniard
नादान= Innocent, Foolish
गर्दिश= Circulation, Revolution, Misfortune
परिंदा= Bird
ख़ुशनसीब= Lucky, Fortunate.