thokar लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
thokar लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 6 अप्रैल 2019

कश्मकश

सच की कोई भी ऐसी दवाई नहीं,
मयकशी में कोई भी बुराई नहीं !

ज़्यादा अच्छा भी होना है होता बुरा,
कुछ बुराई में कोई बुराई नहीं !

ठोकरोंतजरबेऔर कुछ एक सबक़,
और कुछ उम्र भर की कमाई नहीं !

सर्दियों का सितम उनसे पूछो जहाँ,
है अलाव नहींहै रज़ाई नहीं !

ये जो है अजनबीये था कहता कभी,
मौत मंज़ूर है पर जुदाई नहीं !

जाते-जाते वो मेरी हंसी ले गया,
ज़िन्दगी फ़िर कभी मुस्कुराई नहीं !

तेरे बिन ज़िन्दगी कश्मकश में कटी,
जिंदा रह न सकेमौत आई नहीं !

वो ग़ज़ल जिसको 'अल्फ़ाज़मिल न सके,
रोज़ सोचा किएपर सुनाई नहीं !

||| अल्फ़ाज़ |||

मयकशी = Boozing, मदिरापान
तजरबे = Experiences, अनुभव
सबक़ = Lesson, पाठ, सीख
सितम = Oppression, Outrage, Injustice, Tyranny, अत्याचार
अलाव = Bonfire, Campfire
रज़ाई = Quilt
मंज़ूर = Admired, Accepted, स्वीकार
कश्मकश = Struggle, Wrangle, Tussle, खेंच-तान, संघर्ष

शनिवार, 25 अगस्त 2018

तफ़्सील


सवालों को यूँ हल कर देता हूँ,
ख़यालों को ग़ज़ल कर देता हूँ !

दुनिया से जो मैंने सीखा है,
काग़ज़ पे नक़्ल कर देता हूँ

ठोकर की तराशों से ख़ुद को,
मैं ताजमहल कर देता हूँ !

किरदार चराग़ सा है मेरा,
एक नूर मैं जल कर देता हूँ !

होता है वही जो लिखा है,
मैं तो बस अमल कर देता हूँ !

हक़ बात पे क़ाएम रहता हूँ,
तजवीज़ संभल कर देता हूँ !

'फ़राज़मैं हूँ एक आईना,
तफ़्सील मुकम्मल देता हूँ !

||| फ़राज़ |||

सवाल= Questions, Query
ख़याल= Thought
काग़ज़= Paper
नक़्ल= Narrative, Copying,
ठोकर= Obstacle, Kick, Stumble
तराश= Chisel, Carver
किरदार= Character, 
चराग़= An Oil Lamp
नूर= Light, Splendour
अमल= Act
हक़= Truth
क़ाएम= Stay, Permanence
तजवीज़= Suggestion
आईना= The Mirror
तफ़्सील =  Detail, Analysis
मुकम्मल= Complete, Perfect

मंगलवार, 21 नवंबर 2017

तजुर्बा !!!

क़दम ज़मीन पर ही रखता हूँ हमेशा,
निगाह में है सारा आसमां रखा !
याद अपनी हस्ती को भी रखना था,
एक कुरता अलमारी में फटा सा रखा !

निगाह में मेरी बुलंद आसमां है,
परवाज़ को मैंने बाज़ के जैसा रखा !
सोने से कुंदन बनने की ज़िद में,
एक जूनून दिल में दहकता रखा !

दास्ताँ ज़रा तवील लिखनी थी मुझे,
कलम रातों में अक्सर जागता रखा !
यूँ तो मैं ख़ामोश तबियत हूँ लेकिन,
कलम में हुनर है चीख़ता रखा !

मुझे सीखना था हुनर बदल जाने का,
वक़्त को था मैंने रहनुमा रखा !
संभालना भी मैं सीख ही गया 'फ़राज़',
अपनी ठोकरों से था मैने तजुर्बा रखा !!!

|||फ़राज़|||


आसमां= Sky
हस्ती= Existence, Life.
बुलंद= Raised, High, Great.
परवाज़= Flight
कुंदन= Pure Gold, Fine.
दहकता= Aflame.
दास्ताँ= Story, Tale.
तवील= Long, Lengthy.
ख़ामोश तबियत= Introvert
हुनर= Talent, Skill.
रहनुमा= Guide, 
तजुर्बा= Experience.






शुक्रवार, 17 नवंबर 2017

मोहताज !!!

सूख गए वो फूल जो तुझपर चढ़ाये थे,
ख़ुदा तो तू भी था, मगर पत्थर का था !

अब किसको मैं दिखाऊँ ज़ख़्म ये पीठ का,
ये वार तो किसी दोस्त के ख़ंजर का था !

यूँ तो मुआफ़ करता रहा ख़ुदा उम्र भर मुझको,
लेकिन आज  मुआ'मला तो रोज़-ए-महशर का था !

अपनी हसरतों के पैरों को मैंने छुपा कर रखा,
क्योंकि अरज ज़रा छोटा मेरी चादर का था !

रुकने की तड़प बहुत थी, मगर जाना भी था उसे,
ख़ुदारा आलम बुरा फ़िराक़ के उस मंज़र का था !

तेरे किरदार पर आज एक ग़ज़ल सुनी मैंने,
तू भी हमराज़ ज़रूर किसी शायर का था !

तू कभी मेरे दिल में झाँक कर देख न सका,
तू भी इन्सान था, मोहताज तू भी नज़र का था

जिसे दिल्लगी करके तूने ठोकर लगायी थी,
वो ग़ुरूर तो 'फ़राज़' के झुके सर का था !

|||फ़राज़|||

ज़ख़्म= wound
पीठ= Back
वार= Attack.
ख़ंजर= Dagger, Knife.
मुआफ़= Excused, Freed, Absolved.
मुआ'मला= Matter
रोज़-ए-महशर= Doomsday, The day of resurrection, The day of divine judgement.
हसरत= Unfulfilled desire
अरज= Width or measurement of the cloth.
ख़ुदारा= O God.
आलम= Condition
फ़िराक़= Separation, Absence, Departing 
मंज़र= Scene, View, Spectacle.
किरदार= Character, Manner, Coduct
हमराज़= Secret holder, Confidant.
मोहताज= Dependent, 
दिल्लगी= Amusement, Merriment.
ग़ुरूर= Pride

गुरुवार, 12 अक्टूबर 2017

सिफ़र!!!

सख्त़ धूप में जब मेरा सफ़र हो गया,
कच्ची मिट्टी सा था, मैं पत्थर हो गया !

चोट सहने का हुनर भी सीखा मैंने,
ख़ुद को तराशा तो मैं संगमरमर हो गया !

ऐ ठोकरों सुनो, तुम्हारा शुक्रगुज़ार हूँ मैं,
गिरते सँभालते मैं भी रहबर हो गया !

एक तू मिल गया तो कई गुना सा हूँ,
एक तू नहीं तो मैं तन्हा सिफ़र हो गया !

शहर में मैंने जब घर ख़रीद लिया,
अपना सा ये सारा शहर हो गया !

आज माँ को फ़िर हंसाया मैंने,
नूर ही नूर मेरा सारा घर हो गया !

क़त्ल आज मैंने अपना माफ़ किया,
अपने क़ातिल पर मैं ज़बर हो गया !

तेरे दुश्मन की दाद तुझे हासिल है,
कामिल 'फ़राज़' तेरा हुनर हो गया !

|||फ़राज़|||

तराशा= chiselled
शुक्रगुज़ार=Thankful.Grateful.
रहबर= Guide, 
सिफ़र= Zero.Naught.
नूर=Light, Splendour.
क़त्ल= Murder.
क़ातिल= Murderer.
ज़बर= Superior, Greater
दाद= Words of praise.
कामिल= Perfect, Complete, Accomplished, Entire.

शुक्रवार, 15 सितंबर 2017

अशआर की हाज़िरी !!!

मेरी हस्ती को दरकार नहीं शीशों की,
रेज़ा-रेज़ा होकर मुझे शीशागरी आई है !

है ग़रज़ तो ले ले  तू मेरी ठोकरों से सबक़,
जा-ब-जा भटका हूँ तो मुझे रहबरी आई है !

बस यही पल हैं हक़ीकत, तू जी भर जी ले,
क्या ख़बर कौन सी सांस आखरी आई है !

फ़ुरसतें, आवारगी, और सब शौक़-ओ-जूनून,
आदतों के सौदे में हाथ ये नौकरी आई है !

चल के काँटों पे है मैंने हँसना सीखा,
हो के मिसमार तजुर्बों से मसख़री आई है !

तू क्यूँ हैरान होता है मेरी बेनियाज़ी पर,
तेरी बेरुख़ी से ही हमें ये ख़ुदसरी आई है !

तेरी सोहबत हुई तो इश्क़ को जाना हमने,
तेरी फ़ुरक़तों में हासिल ये शायरी आई है !

तू भी फ़राज़ के अल्फाज़ से हानत ले ले,
आज फ़िर मुझपर अशआर की हाज़िरी आई है !

|||
फ़राज़|||

दरकार= Need, Necessity.
रेज़ा-रेज़ा= Shattered.
शीशागरी= Glass making.
ग़रज़= Intention, Purpose, Object. 
जा-ब-जा= Everywhere
रहबरी= Guidance.
फ़ुरसत= Leisure.
आवारगी= Wandering, Waywardness.
शौक़= Ardour, Desires.
जूनून= Frenzy, Madness.
मिसमार- Demolished, Razed, Ruined.
मसख़री= Comedy, Funnyness.
बेनियाज़ी= Unconcern, Not being in any need.
बेरुख़ी= Ignorance, Indifference.
ख़ुदसरी= Obstinate, Stubbornness.
सोहबत= Association, Company.
फ़ुरक़त= Absences, Separation.
अल्फाज़= Words.
ज़हानत= Intelligence.
अशआर= Couplets.
हाज़िरी= Presence, Attendance.



शुक्रवार, 14 अप्रैल 2017

क़ायदा !!!


अपनी ही ठोकरों से क़ायदा सीखेगा,
नस्ल-ए-आदम हैकरके ख़ता सीखेगा!

ये रंगीनियाँआसाईशेंये  फ़रेब ज़माने के,
शौक़-ए-लज़्ज़त में कितने गुनाह सीखेगा!


आलिम-ए-दीन भी अब तो करते हैं सियासत,
इनकी सोहबत में कौन सा ख़ुदा सीखेगा!


देखना तू भी तड़पेगा दिलनवाज़ी करके,
इश्क़ करके ही नुक़्साँ-ओ-नफ़ा सीखेगा!

तालीमगाहों में सीखेगा किताबी बातें,
ज़िन्दगी से लड़कर ही तजरबा सीखेगा!


शोर में भी अगर तू तन्हा सा रहता है,
तो ख़ामोशी में दिल की ज़बाँ सीखेगा!


जीतना है तो फ़िर तू हार से न डर,
हार कर ही जीतने का सलीक़ा सीखेगा!

स्याह रात के बाद सुबह होती है 'अल्फ़ाज़',
बार-हा ये सबक़ भी तो तू सुबह सीखेगा!

||| अल्फ़ाज़ |||

क़ायदा=  Regulations, Custom, Rule, Habit.
नस्ल-ए-आदम= Progeny Of Adam.
रंगीनियाँ= Ornateness.
आसाईशें= Comfort, Luxury.
फ़रेब=Deceit, Deception.
शौक़-ए-लज़्ज़त= Desire Of Enjoyment.
आलिम-इ-दीन= Scholars Of The Religion.
सियासतें= Politics.
दिलनवाज़ी= Heart-pleasing.
नुक़सान-ओ-नफ़ा= Loss and profit.
तालीमगाह= Seminary.
सलीक़ा= manner.
स्याह= Dark
बार-हा= Often

बुधवार, 5 अप्रैल 2017

फ़ितरत !!!

तूफ़ान से उलझकर 
सीखा है मैंने जलना,
खायी हज़ार ठोकर
आया है तब संभलना !

एक सिम्त जो हूँ डूबा,
एक सिम्त उग रहा हूँ,
फ़ितरत में हैं उजाले
सीखा न मैंने ढलना !

हर शब तू इम्तेहान ले,
मत भूल मेरी ज़िद को,
मैं शम्स हूँ सहर का
हर रोज़ है निकलना !

अपनी ही उलझनों से
सुलझाये कुछ हुनर हैं,
दरिया सा मुझको बहना,
पुरवाइयों सा चलना !

अहसास की ज़ुबान के
अल्फाज़ तर्जुमा है,
अग़ाज़ कुछ हैं लिखने,
अंजाम हैं बदलना !

शब= Night, रात
सिम्त= Directions, दिशा!
फ़ितरत= Nature, स्वभाव
शम्स= Sun, सूरज
दरिया= River, नदी

||| फ़राज़ |||