क़दम ज़मीन पर ही रखता हूँ हमेशा,
निगाह
में है सारा आसमां रखा !
याद अपनी हस्ती को भी रखना
था,
एक कुरता अलमारी में फटा सा रखा
!
निगाह में मेरी बुलंद आसमां है,
परवाज़ को मैंने बाज़ के जैसा रखा !
सोने से कुंदन बनने की ज़िद में,
एक जूनून
दिल में दहकता रखा !
दास्ताँ ज़रा तवील लिखनी थी मुझे,
कलम
रातों में अक्सर जागता रखा !
यूँ तो मैं ख़ामोश
तबियत हूँ लेकिन,
कलम में हुनर है चीख़ता रखा !
मुझे
सीखना था हुनर बदल जाने का,
वक़्त को
था मैंने रहनुमा रखा !
संभालना भी मैं सीख ही गया 'फ़राज़',
अपनी
ठोकरों से था मैने तजुर्बा रखा !!!
|||फ़राज़|||
आसमां= Sky
हस्ती= Existence, Life.
बुलंद= Raised, High, Great.
परवाज़= Flight
कुंदन= Pure Gold, Fine.
दहकता= Aflame.
दास्ताँ= Story, Tale.
तवील= Long, Lengthy.
ख़ामोश तबियत= Introvert
हुनर= Talent, Skill.
रहनुमा= Guide,
तजुर्बा= Experience.
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