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सोमवार, 23 अप्रैल 2018

हो सकता है !

पत्थर भी तराशा जाए, तो ख़ुदा हो सकता है !
तू तो इन्सान है, सोच तू क्या से क्या हो सकता है !

बस यही सोच कर मैंने तुझे माफ़ कर दिया,
तू भी इंसान है, तुझसे भी गुनाह हो सकता है !

इस सवाल का जवाब तो मुझे बारहा मिल ही जाता है,
कि अब इससे भी बुरा और क्या हो सकता है !

सुना है कि ख़ुदा जो करता हैबेहतर करता है,
सब्र कर, इस नुक़सान में भी नफ़ा हो सकता है !

है क्या वजह जिसने मुझसे शायर बना डाला,
मत पूछ कि मेरा ज़ख़्म हरा हो सकता है !

ये डर तो था मुझे कि बिछड़ जायेंगे एक दिन
ये गुमान भी न था कि तू बेवफ़ा हो सकता है !

दिल लगाइये तो ज़रूर मगर लुटाइये नहीं,
जनाब, दिल के सौदे में ख़सारा हो सकता है !

अपने हालात पर जो तुझको सब्र आ जाए,
तो मुख़्तसर असासे में भी गुज़ारा हो सकता है !

ये और बात है कि वो तग़ाफ़ुल कर देगा,
कह लेने से मेरा दिल तो हल्का हो सकता है !

ठोकरों से सीखा है ‘फ़राज़’ ने संभलने का हुनर,
राह का हर एक पत्थर रहनुमा हो सकता है !

|||
फ़राज़ |||

तराशा= Chiseled
गुनाह= Fault, Crime, Sin
बारहा= Many Times
बेहतर= Better
सब्र= Patience
नुक़सान= Loss
नफ़ा= Profit
वजह= Reason, Cause
शायर= Poet
ज़ख़्म= Wound
गुमान= Doubt, Suspicion, Distrust,
बेवफ़ा= Unfaithful, Treacherous
ख़सारा= Loss
मुख़्तसर= Concise, Short, Abbreviated
असासे= Household Property, Belonging
गुज़ारा= Live Off, Livelihood
तग़ाफ़ुल= Neglect, Negligence.
हुनर= Talent, Art, Skill

रहनुमा= Guide

मंगलवार, 21 नवंबर 2017

तजुर्बा !!!

क़दम ज़मीन पर ही रखता हूँ हमेशा,
निगाह में है सारा आसमां रखा !
याद अपनी हस्ती को भी रखना था,
एक कुरता अलमारी में फटा सा रखा !

निगाह में मेरी बुलंद आसमां है,
परवाज़ को मैंने बाज़ के जैसा रखा !
सोने से कुंदन बनने की ज़िद में,
एक जूनून दिल में दहकता रखा !

दास्ताँ ज़रा तवील लिखनी थी मुझे,
कलम रातों में अक्सर जागता रखा !
यूँ तो मैं ख़ामोश तबियत हूँ लेकिन,
कलम में हुनर है चीख़ता रखा !

मुझे सीखना था हुनर बदल जाने का,
वक़्त को था मैंने रहनुमा रखा !
संभालना भी मैं सीख ही गया 'फ़राज़',
अपनी ठोकरों से था मैने तजुर्बा रखा !!!

|||फ़राज़|||


आसमां= Sky
हस्ती= Existence, Life.
बुलंद= Raised, High, Great.
परवाज़= Flight
कुंदन= Pure Gold, Fine.
दहकता= Aflame.
दास्ताँ= Story, Tale.
तवील= Long, Lengthy.
ख़ामोश तबियत= Introvert
हुनर= Talent, Skill.
रहनुमा= Guide, 
तजुर्बा= Experience.






बुधवार, 26 जुलाई 2017

पुरवाई !!!

लगता है छू कर आई है मेरे घर को,
बड़ी हमदर्द सी मुझे आज हवा लगती है !

छू के यूँ गुज़री के हर ज़ख्म भर गया,
पुरवाई में शामिल माँ की दुआ लगती है !

कल ख़्वाब में घर था और घर में मैं,
ख़ुशग़वार मुझे आज की सुबह लगती है !

फ़िज़ा में बहती है वहां ख़ुशबुएँ रिश्तों की,
रूह को तस्कीन सी घर की हवा लगती है !

जिस ज़मीं पे बने थे मेरे पहले क़दम,
वो दर-ओ-दीवार मुझे रहनुमा सी लगती है !

झांक कर देखा तेरी पलकों के दरवाज़ों में,
तेरी दुनिया मेरे ख़्वाबों का मकां लगती है !

दिन ढलने का बहाना करके चली जाती है,
शब्-ए-तन्हाई, तू भी महबूबा सी लगती है !

मेरी तरबियत, मेरी तहज़ीब का आईना है,
बहुत मीठी सी मुझे उर्दू जुबां लगती है !

||| फ़राज़ |||

ख़ुशग़वार=Pleasent, Congenial.
फ़िज़ा= Breeze
तस्कीन= Comfort, Soothing.
शब्-ए-तन्हाई=Night of Loneliness.
तरबियत= Education, Training,
तहज़ीब= Culture.