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रविवार, 14 जुलाई 2019

उर्दू


लफ़्ज़ों में ख़ुशबू होती है,
फूलों सी उर्दू होती है !

||| अल्फ़ाज़ |||

लफ़्ज़ = Word, शब्द

बुधवार, 20 फ़रवरी 2019

वतन

एक रिश्ता पूरे मन से है,
जो पहला इश्क़ वतन से है !

दाढ़ी और टोपी है सुन्नत,
ईमान तो जन-गण-मन से है !

सिख-ओ-सिंधी, उर्दू-हिंदी,
हर मज़हब यहाँ अमन से है !

आवाम से फ़ौजी का रिश्ता,
जैसे दिल का धड़कन से है !

आवाम नहीं, अब फ़ौज हैं हम,
ये जंग तो अब जन-जन से है !

बस बहुत सहा, अब और नहीं,
ललकार ये अब दुश्मन से है !

जाऊँगा तिरंगे में लिपटा,
वादा ये अपने कफ़न से है !

तैयार वतन पे मिटने को,
'अल्फ़ाज़' तो तन-मन-धन से है !

||| अल्फ़ाज़ |||

दाढ़ी = Beard 
टोपी= Cap
सुन्नत= Tradition Of The Holy Prophet Which Is Followed By Muslims. इस्लाम धर्म के वह नियम/ स्वभाव/ आदत, जो पैगंबर साहिब ने किया हो!
ईमान= Belief, Faith, धर्म, निष्ठा
जन-गण-मन= National Anthem, Patriotism, राष्ट्र-गान, देशभक्ति
सिख-ओ-सिंधी = Sikhs And Sindhis, 
मज़हब= Religion, धर्म
अमन = Peace, शांति
आवाम = Public, जनता
फ़ौजी = Soldier, The Military/Army Man, फ़ौज का जवान, सैनिक, 
फ़ौज = Army, Military, सेना, 
जंग = War, रण, युद्ध
जन-जन = People, Everyone, Public, Commons प्रत्येक व्यक्ति
ललकार = Challenge, Whoop
कफ़न = Shroud, Cloth To Cover The Corpse
तन-मन-धन = Body-Mind-Wealth I.E. All That Defines A Person- One's Physical, Mental And Material Sources  

बुधवार, 26 जुलाई 2017

पुरवाई !!!

लगता है छू कर आई है मेरे घर को,
बड़ी हमदर्द सी मुझे आज हवा लगती है !

छू के यूँ गुज़री के हर ज़ख्म भर गया,
पुरवाई में शामिल माँ की दुआ लगती है !

कल ख़्वाब में घर था और घर में मैं,
ख़ुशग़वार मुझे आज की सुबह लगती है !

फ़िज़ा में बहती है वहां ख़ुशबुएँ रिश्तों की,
रूह को तस्कीन सी घर की हवा लगती है !

जिस ज़मीं पे बने थे मेरे पहले क़दम,
वो दर-ओ-दीवार मुझे रहनुमा सी लगती है !

झांक कर देखा तेरी पलकों के दरवाज़ों में,
तेरी दुनिया मेरे ख़्वाबों का मकां लगती है !

दिन ढलने का बहाना करके चली जाती है,
शब्-ए-तन्हाई, तू भी महबूबा सी लगती है !

मेरी तरबियत, मेरी तहज़ीब का आईना है,
बहुत मीठी सी मुझे उर्दू जुबां लगती है !

||| फ़राज़ |||

ख़ुशग़वार=Pleasent, Congenial.
फ़िज़ा= Breeze
तस्कीन= Comfort, Soothing.
शब्-ए-तन्हाई=Night of Loneliness.
तरबियत= Education, Training,
तहज़ीब= Culture.