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बुधवार, 20 फ़रवरी 2019

वतन

एक रिश्ता पूरे मन से है,
जो पहला इश्क़ वतन से है !

दाढ़ी और टोपी है सुन्नत,
ईमान तो जन-गण-मन से है !

सिख-ओ-सिंधी, उर्दू-हिंदी,
हर मज़हब यहाँ अमन से है !

आवाम से फ़ौजी का रिश्ता,
जैसे दिल का धड़कन से है !

आवाम नहीं, अब फ़ौज हैं हम,
ये जंग तो अब जन-जन से है !

बस बहुत सहा, अब और नहीं,
ललकार ये अब दुश्मन से है !

जाऊँगा तिरंगे में लिपटा,
वादा ये अपने कफ़न से है !

तैयार वतन पे मिटने को,
'अल्फ़ाज़' तो तन-मन-धन से है !

||| अल्फ़ाज़ |||

दाढ़ी = Beard 
टोपी= Cap
सुन्नत= Tradition Of The Holy Prophet Which Is Followed By Muslims. इस्लाम धर्म के वह नियम/ स्वभाव/ आदत, जो पैगंबर साहिब ने किया हो!
ईमान= Belief, Faith, धर्म, निष्ठा
जन-गण-मन= National Anthem, Patriotism, राष्ट्र-गान, देशभक्ति
सिख-ओ-सिंधी = Sikhs And Sindhis, 
मज़हब= Religion, धर्म
अमन = Peace, शांति
आवाम = Public, जनता
फ़ौजी = Soldier, The Military/Army Man, फ़ौज का जवान, सैनिक, 
फ़ौज = Army, Military, सेना, 
जंग = War, रण, युद्ध
जन-जन = People, Everyone, Public, Commons प्रत्येक व्यक्ति
ललकार = Challenge, Whoop
कफ़न = Shroud, Cloth To Cover The Corpse
तन-मन-धन = Body-Mind-Wealth I.E. All That Defines A Person- One's Physical, Mental And Material Sources  

शनिवार, 26 जनवरी 2019

न मिला !

सूखा पत्ता हूँ जिसको चमन न मिला,
वो मुहाजिर हूँ जिसको वतन न मिला !

सालहासाल मुझसे वो मिलता रहा,
मेरे मन से कभी उसका मन न मिला !

तू तो कहता था बिछड़े तो मर जायेंगे,
तुझसा कोई भी वादा-शिकन न मिला !

लूट कर के तू मेरा यक़ीं ले गया,
तेरे जैसा कोई राहज़न न मिला !

मय-कदे, मस्जिदें हमने सब छान लीं,
टूटा दिल जोड़ने का जतन न मिला !

रोने, बिलखने, बिखर जाने को,
तेरा दामन तेरा पैरहन न मिला !

कुछ तो हमसे कभी भी न मन से मिले,
और कुछ से हमारा ही मन न मिला !

इश्क़ है सिलसिला रूह से रूह का,
क्या हुआ कि अगर तन से तन न मिला !

जान जाने का 'अल्फ़ाज़' क्या फ़ायदा,
गर तिरंगे के जैसा कफ़न न मिला !

||| अल्फ़ाज़ |||

चमन= Flower Garden
मुहाजिर= Emigrant, Refugee, Evacuee, Migrant
वतन= Abode, Native Country, Home, Residence
सालहासाल= Years After Year
वादाशिकन= Promise Breaker
यक़ीं= Trust, Faith, Belief, Confidence
राहज़न= Robber, Highwayman
मय-कदा= Bar, Tavern
मस्जिदें= The Mosque
जतन= Effort
पैरहन= Dress, Apparel
सिलसिला= Chain, Series, Succession
रूह= Soul, Spirit
तन= Body
फ़ायदा= Profit, Gain
गर= If
कफ़न= Shroud, Winding Sheet For A Dead Body, Cloth To Cover The Corpse

मंगलवार, 14 अगस्त 2018

वतन के जाँ-निसार

कोई मज़हब नहीं होता शहीदों की मज़ारों का,
कोई मज़हब नहीं होता वतन के जाँ-निसारों का,

मज़हब को पूछकर गोली सरहद पे नहीं चलती,
कोई मज़हब नहीं होता सरहद के पहरेदारों का !

||| फ़राज़ |||

मज़हब= Religion
शहीद= Martyr
मज़ार= Shrine, Tomb
वतन= Country, Abode
जाँ-निसार= Devoted, Fervent, One Who Sacrifices His Life For Others.
सरहद= Border
पहरेदार= Sentinel, Watchman.

मंगलवार, 17 जुलाई 2018

तमन्नाई !!!

तमन्नाई हम उस नज़र के हैं,
जिसपे परदे जहान भर के हैं !

काश कट जाये मेरा सर वतन के लिए,
कुछ अरमान तो मेरे भी सर के हैं !

अच्छाई की शोहरत में उम्र लगती है,
मगर पंख लगते बुरी ख़बर के हैं !

क्या मेरे गाँव सा सुकून वहां मिलता है?
आप ही बताइए, आप तो शहर के हैं !

अल्लाह नहीं रहता सिर्फ़ मस्जिद में,
न ही भगवान सिर्फ़ मंदिर के हैं !

जिनकी हिफ़ाज़त में इंसान लगे रहते हैं,
बेशक वो ख़ुदा महज़ पत्थर के हैं !

शायद कोई अपना ही तेरा क़ातिल होगा,
तेरी पीठ पर निशान ख़ंजर के हैं !

मत पूछिये कि मेरे ग़म का सबब क्या है,
फ़राज़ये रंज तो अब उम्र भर के हैं !

||| फ़राज़ ||| 

तमन्नाई= Requester
वतन= Abode, Native Country
अरमान= Wish, Desire
शोहरत= Renown, Fame
सुकून= Peace 
हिफ़ाज़त= Protection
बेशक= Doubtless
महज़= Only, Merely
क़ातिल= Murderer
निशान= Mark, Impression, A Clue
ख़ंजर= Knife, Dagger
ग़म= Sorrow, Grief
सबब= Cause, Reason

रंज= Sorrow

बुधवार, 12 अप्रैल 2017

लोग !

क़ैद करते हैं परिंदों को पिंजरों में
आज़ादी-ए-वतन पर इतराते हैं लोग !

करते हैं फ़साद इबादतगाहों की ख़ातिर
इबादत में वक़्त कम ही बिताते हैं लोग !

अक्सर देते हैं हवाले मसरूफ़ियात के
अब लोगों के काम कहाँ आते हैं लोग !

करते हैं इश्तेहार लोगों की ख़ताओं का
अपने गिरेबां में झाँक कहाँ पाते है लोग !

सब कहाँ पाते हैं यहाँ आसमान नया
रास्ते औरों के ही अक्सर दोहराते हैं लोग !

करते हैं वक़ालत लोग इश्क़दारी की
भूल पाने का हुनर कहाँ बताते हैं लोग !

हर जिंदा बशर में ऐब ढूंढ लेने वाले
मय्यतों पर यहाँ सोज़ मनाते हैं लोग !

||| फ़राज़ |||