तमन्नाई हम उस नज़र के
हैं,
जिसपे परदे जहान भर के हैं !
काश कट जाये मेरा सर वतन के
लिए,
कुछ अरमान तो
मेरे भी सर के हैं !
अच्छाई की शोहरत में
उम्र लगती है,
मगर पंख लगते बुरी ख़बर के हैं !
क्या मेरे गाँव सा सुकून वहां
मिलता है?
आप ही बताइए, आप तो शहर के
हैं !
अल्लाह नहीं रहता सिर्फ़ मस्जिद में,
न ही भगवान सिर्फ़ मंदिर के हैं !
जिनकी हिफ़ाज़त में
इंसान लगे रहते हैं,
बेशक वो ख़ुदा महज़ पत्थर
के हैं !
शायद कोई अपना ही तेरा क़ातिल होगा,
तेरी पीठ पर निशान ख़ंजर के
हैं !
मत पूछिये कि मेरे ग़म का सबब क्या
है,
‘फ़राज़’ ये रंज तो
अब उम्र भर के हैं !
||| फ़राज़ |||
तमन्नाई= Requester
वतन= Abode,
Native Country
अरमान= Wish, Desire
शोहरत= Renown,
Fame
सुकून= Peace
हिफ़ाज़त= Protection
बेशक= Doubtless
महज़= Only, Merely
क़ातिल= Murderer
निशान= Mark, Impression, A Clue
ख़ंजर= Knife, Dagger
ग़म= Sorrow, Grief
सबब= Cause, Reason
रंज= Sorrow