arman लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
arman लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 17 जुलाई 2018

तमन्नाई !!!

तमन्नाई हम उस नज़र के हैं,
जिसपे परदे जहान भर के हैं !

काश कट जाये मेरा सर वतन के लिए,
कुछ अरमान तो मेरे भी सर के हैं !

अच्छाई की शोहरत में उम्र लगती है,
मगर पंख लगते बुरी ख़बर के हैं !

क्या मेरे गाँव सा सुकून वहां मिलता है?
आप ही बताइए, आप तो शहर के हैं !

अल्लाह नहीं रहता सिर्फ़ मस्जिद में,
न ही भगवान सिर्फ़ मंदिर के हैं !

जिनकी हिफ़ाज़त में इंसान लगे रहते हैं,
बेशक वो ख़ुदा महज़ पत्थर के हैं !

शायद कोई अपना ही तेरा क़ातिल होगा,
तेरी पीठ पर निशान ख़ंजर के हैं !

मत पूछिये कि मेरे ग़म का सबब क्या है,
फ़राज़ये रंज तो अब उम्र भर के हैं !

||| फ़राज़ ||| 

तमन्नाई= Requester
वतन= Abode, Native Country
अरमान= Wish, Desire
शोहरत= Renown, Fame
सुकून= Peace 
हिफ़ाज़त= Protection
बेशक= Doubtless
महज़= Only, Merely
क़ातिल= Murderer
निशान= Mark, Impression, A Clue
ख़ंजर= Knife, Dagger
ग़म= Sorrow, Grief
सबब= Cause, Reason

रंज= Sorrow

बुधवार, 25 अप्रैल 2018

ग़ज़ल-ए-फ़राज़ !!!

फ़र्क़ पड़ता है क्या कि सज़ा क्या है,
इश्क़ बदनाम न हो तो मज़ा क्या है !

रतजगे, तन्हाई, मलाल और तड़प,
हमको मालूम है कि वफ़ा क्या है !

अरमान दिल में तो कई बाक़ी हैं,
 ज़हन, तेरा मशवरा क्या है !

इश्क़ करना है तो फ़िर ये न सोचिये,
कि नुक़सान क्या, और नफ़ा क्या है !

इश्क़ गुनाह है तो हम मुजरिम बेहतर,
इश्क़ मर्ज़ है तो फिर शिफ़ा क्या है !

आज फ़िर हूँ मैं तेरा तमन्नाई हूँ,
इस दफ़ा मेरा इम्तिहाँ क्या है !

जब दिल टूटेगा तो ख़ुद समझ जाओगे,
इश्क़ मिसरा है तो क़ाफ़िया क्या है !

ये ग़ज़ल-ए-फ़राज़ नज़ीर इस बात की है,
कि हादिसा मेरे दिल पे गुज़रा क्या है !

||| फ़राज़ |||

फ़र्क़= Difference.
रतजगा= Vigil,  Keeping Awake All Night
तन्हाई= Loneliness
मलाल= Regret
तड़प= Agitation Of Mind And Body
मालूम= Known
वफ़ा= Faithfulness, Loyalty
अरमान= Desire, Longing
बाक़ी= Remaining, Perpetual
ज़हन= Mind
मशवरा= Advice, Counsel
नुक़सान= Loss, Damage
नफ़ा= Profit
गुनाह= Sin, Crime
मुजरिम = Sinner, Culprit.
बेहतर= Better
मर्ज़= Illness, Sickness
शिफ़ा= Heal, Cure
तमन्नाई= Wisher, Desirous, 
दफ़ा= Time
इम्तिहाँ= Exam, Trail, Test
मिसरा= One Line Of A Couplet Or Verse.
क़ाफ़िया= Rhyme, The Last Or Second Last Words Of Each Verse Is Called Qafiya
ग़ज़ल-ए-फ़राज़= Gazal Of Faraz
नज़ीर= Precedent, Example.
हादिसा= Accident, Calamity, Misfortune
गुज़रा= Passed, Gone