एक ख़ौफ़ का ये मंज़र क्यूँ है,
अपने
ही घर में डर क्यूँ है !
झगड़ा
तो है इंसानों का,
रुसवा मस्जिद-मंदिर क्यूँ है !
जिन
हाथों में मुस्तक़बिल था,
उन
हाथों में पत्थर क्यूँ है !
जो
बात ज़रूरी है कहनी,
वो
ही दिल के अंदर क्यूँ है !
तुमको
भी इश्क़ हुआ था न,
इल्ज़ाम सिरफ़ मुझ पर क्यूँ है !
कहते
हैं इसको बड़ा शहर,
तो
इतने छोटे घर क्यूँ हैं !
कुछ
करना है तो कर डालो,
इतनी
भी अगर मगर क्यूँ है !
‘अल्फ़ाज़’ के दुश्मन ज़ाहिर थे,
तो
पीठ में ये ख़ंजर क्यूँ है !
||| अल्फ़ाज़ |||
ख़ौफ़ = Fear, Dread, Terror, भय
मंज़र = Scene, View, दृश्य
रुसवा = Dishonored, Despondent, अपमानित, हताश
मुस्तक़बिल = Future, भविष्य
इल्ज़ाम = Allegation,
Blame, आरोप
सिरफ़ = Only, मात्र
ज़ाहिर = Evident, Open, प्रत्यक्ष