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शुक्रवार, 5 अप्रैल 2019

आम चुनाव

मंदिर-मस्जिद पे दांव है,
शायद फ़िर आम चुनाव है !

जितना दिखता है ख़बरों में,
उतना भी कहाँ तनाव है !

फ़िर क़र्ज़ों की माफ़ी होगी,
फ़िर से ख़बरों में गाँव है !

बस धुआँ हैआग नहीं होगी,
कच्ची लकड़ी का अलाव है !

बस सूँघोखा न पाओगे,
वादों का ख़याली पुलाव है !

फ़िर अच्छे कल की बातें हैं,
फ़िर से काग़ज़ की नाव है !

'अल्फ़ाज़तू सच क्यूँ कहता है,
अब झूठ को मिलता भाव है !

||| अल्फ़ाज़ |||

दांव = Gamble
आम चुनाव = General Elections
तनाव = Tension
क़र्ज़ माफ़ी = Loan Waiving
अलाव = Bonfire, Campfire
ख़याली-पुलाव = Daydreaming, Building A Castle In The Air
भाव = Rate, Price

मंगलवार, 25 सितंबर 2018

मैं

अच्छा हूँ,  कुछ बुरा हूँ,
मैं भी तेरी तरह हूँ  !

किस बात का तकब्बुर,
मिट्टी का मैं बना हूँ !

मेरी तड़प क्या जानो !
पिंजरे का परिंदा हूँ !

डर तो है ज़िन्दगी का,
कब मौत से डरा हूँ !

रिश्तों की डोर की मैं,
नाज़ुक सी एक गिरह हूँ ! 

हर ज़ख़्म का हूँ मरहम,
हर रोग की दवा हूँ !

क्यूँ हो भँवर की परवाह,
मैं खुद का नाख़ुदा हूँ !

टूटा है जब से ये दिल,
मैं ख़ुद का हुक्मराँ हूँ !

पुरवाई का हूँ झौंका,
मौसम मैं इक नया हूँ !

ऊपर को ही उठूँगा
,
'अल्फ़ाज़मैं धुआँ हूँ !

||| अल्फ़ाज़ |||

तकब्बुर= Pride, Arrogance, Haughtiness
परिंदा= Bird
नाज़ुक= Delicate, Thin
गिरह= A Knot, A Joint, 
मरहम= Remedy, Ointment
भँवर= Whirlpool Vortex
परवाह= Care, Concern
नाख़ुदा= Boatman, Sailor, The Master/Commander Of A Ship
हुक्मराँ= Ruler