मंदिर-मस्जिद
पे दांव है,
शायद फ़िर आम चुनाव है !
जितना दिखता है ख़बरों में,
उतना भी कहाँ तनाव है !
फ़िर क़र्ज़ों की माफ़ी होगी,
फ़िर से ख़बरों में गाँव है !
बस धुआँ है, आग नहीं होगी,
कच्ची लकड़ी का अलाव है !
बस सूँघो, खा न पाओगे,
वादों का ख़याली पुलाव है !
फ़िर अच्छे कल की बातें हैं,
फ़िर से काग़ज़ की नाव है !
'अल्फ़ाज़' तू सच क्यूँ कहता है,
अब झूठ को मिलता भाव है !
||| अल्फ़ाज़ |||
दांव = Gamble
आम चुनाव = General Elections
आम चुनाव = General Elections
तनाव = Tension
क़र्ज़ माफ़ी = Loan Waiving
अलाव = Bonfire,
Campfire
ख़याली-पुलाव = Daydreaming, Building A Castle In The Air