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शुक्रवार, 5 अप्रैल 2019

आम चुनाव

मंदिर-मस्जिद पे दांव है,
शायद फ़िर आम चुनाव है !

जितना दिखता है ख़बरों में,
उतना भी कहाँ तनाव है !

फ़िर क़र्ज़ों की माफ़ी होगी,
फ़िर से ख़बरों में गाँव है !

बस धुआँ हैआग नहीं होगी,
कच्ची लकड़ी का अलाव है !

बस सूँघोखा न पाओगे,
वादों का ख़याली पुलाव है !

फ़िर अच्छे कल की बातें हैं,
फ़िर से काग़ज़ की नाव है !

'अल्फ़ाज़तू सच क्यूँ कहता है,
अब झूठ को मिलता भाव है !

||| अल्फ़ाज़ |||

दांव = Gamble
आम चुनाव = General Elections
तनाव = Tension
क़र्ज़ माफ़ी = Loan Waiving
अलाव = Bonfire, Campfire
ख़याली-पुलाव = Daydreaming, Building A Castle In The Air
भाव = Rate, Price

मंगलवार, 26 मार्च 2019

मौसम-ए-बहार

ख़बरें तो हैं पुरानीइश्तिहार है नया,
तारीख़ पढ़ के जानाअख़बार है नया !

तफ़सील हर सितम की फ़िर से बताइए
एक दर्द पुराने का ग़मख़्वार है नया !

शायद में कहानी में मोड़ आएगा,
फ़िर मेरी दास्ताँ में किरदार नया है !

जो चाहे अपने दिल की क़ीमत वसूलिये,
सामान है पुरानाख़रीदार है नया ! !

दिल से लगे हो उनकी जाँ पे नहीं बने,
ज़्यादा न रूठिए अभी वो यार है नया !

मेरी तड़प में उनको कितना
 क़रार है,
हर बार उन लबों पे इंकार है नया ! !

'अल्फ़ाज़वो आते हैंजी भर के देखिये,
आँखों की रुत में मौसम-ए-बहार है नया !

||| अल्फ़ाज़ |||

ख़बर = News, Information, समाचार, संदेश
इश्तिहार = Advertisement, विज्ञापन,
तारीख़ = Date, दिनांक, तिथि
अख़बार = Newspaper, समाचारपत्र
तफ़सील = Analysis, Detail, Particulars, विवरण
सितम = Oppression, Outrage, Injustice, Tyranny, अत्याचार
ग़मख़्वार = Consoler, Sympathizer, Comforter
दास्ताँ = Story, Tale, कथा
किरदार = Character, चरित्र
क़ीमत = Price, Value, मूल्य
ख़रीदार = Purchaser, Buyer, ग्राहक
जाँ= Life, जीवन
यार = Beloved, Friend,
क़रार =  Peace, Tranquility, आराम
लब = Lips, होंठ, अधर
इंकार = Denial, Refusal, अस्वीकार 
रुत = Season, Weather, मौसम
मौसम-ए-बहार = Spring Season, बसंत ऋतु 

गुरुवार, 7 मार्च 2019

ऐलान

भूख हैबेरोज़गारी है,
पर सबपे मज़हब भारी है!

झूठी ही सहीतारीफ़ करो,
ऐलान हुआ सरकारी है !

अपना किरदार दिखाओ तुम,
अबकी सरकार तुम्हारी है !

उससे मज़हब से ख़ौफ़ नहीं,
जिस दिल से दिल की यारी है !

हम इस पर सजदा करते हैं,
धरती ईमान हमारी है !

कुफ्फ़ार भला क्या कर पाता,
ये क़ौम ही ख़ुद से हारी है !

कोई ज़ाहिर काकोई बातिन का,
इन्साँ फ़ितरत से पुजारी है !

'अल्फ़ाज़' ग़ज़ल ही लिखा कर,
ख़बरों पर पहरेदारी है !

||| अल्फ़ाज़ |||

मज़हब = Religion, धर्म
तारीफ़ = Praise, प्रशंसा
ऐलान = Declaration; Proclamation, Order
सरकारी = Governmental, Official, राजकीय, हुकूमती
किरदार = Character, Conduct, Deed, Manner, आचरण, व्यवहार,
ख़ौफ़ = Fear, Dread, Terror, भय
सजदा = Bowing In Prayer So As To Touch The Ground With The Forehead, शीश नमन
धरती = Land, Mother Earth, 
ईमान = Belief, Conscience, Faith
कुफ्फ़ार = Pagan, Infidel, Unbeliever, ग़ैर-मुस्लिम
क़ौम = People, Race, जाति, बिरादरी
ज़ाहिर = Evident, Open, प्रत्यक्ष
बातिन = Internal, Hidden, अप्रत्यक्ष,
इन्साँ =  Human Being, Mankind, मनुष्य
फ़ितरत = Creation, Nature, प्रकृति, स्वभाव,
पुजारी = Priest, Worshipper

सोमवार, 25 फ़रवरी 2019

सफ़र

मंज़िल को छोड़ करके हम सफ़र में आ गए,
घर लौट न सके जब से हम शहर में आ गए !

हम घर कभी मुकम्मल लौटे ही कहाँ हैं,
दफ़्तर का काम ले के हम घर में आ गए !

सजदे में भी सोचा किए दुनिया के काम-काज,
मस्जिद तलक तो अल्लाह के डर में आ गए !

करते हैं सफ़र रोज़ कहीं न पहुँचने का,
सफ़र हम में आ गया, हम सफ़र में आ गए !

पढ़ता है कौन इन दिनों अच्छाई की ख़बर,
जितने ग़लत थे वो सभी ख़बर में आ गए !

वही लोग कि जो काटते थे रात दिन शजर,
धूप में जले तो साया-ए-शजर में आ गए !

कोई चल न सका दूर तलक साथ में मेरे,
मंज़िल से पहले मोड़ रहगुज़र में आ गए !

किस-किस अदा की आपकी तारीफ़ मैं करूँ,
तमाम दरिया सिमट के समंदर में आ गए !

कुछ तो अलग सी बात है
 'अल्फ़ाज़में मेरे,
यूँ ही नहीं हम आपकी नज़र में आ गए !

||| अल्फ़ाज़ |||

सफ़र = Journey, Voyage, Travel, यात्रा
मुकम्मल = Perfect, Complete सम्पूर्ण, पूर्णतयः
दफ़्तर = Office, Department, कार्यालय
सजदे = Prayers, To Kneel And Touch One's Forehead To The Ground, TO Bow प्रार्थना
काम-काज = Work, Occupation, Activity
मस्जिद = Mosque
तलक = Till, तक
शजर = Tree पेड़, वृक्ष
साया-ए-शजर = Shadow/ Shade/ Protection Of The Tree पेड़/वृक्ष की छाया
रहगुज़र = Road, Path, रास्ता, पथ, मार्ग
अदा = Coquetry, Gesture, 
तारीफ़ = Praise प्रशंसा
तमाम = Entire, All, सब
दरिया = River नदी
नज़र = Vision, Favour 

शुक्रवार, 4 जनवरी 2019

यक़ीं

जीतना है अगरहार से तू न डर,
ख़ुद पे रख तू यक़ीं, और बस कर गुज़र !

जो है लम्हा अभीइसको जी भर के जी,
ये ही लम्हा है जिसमें है सारी उमर !

फ़िर ये मौक़ा दोबारा मिले न मिले,
जब भी मौक़ा मिलेख़ुद को साबित तू कर !

अड़चनें कोई  भी न नज़र आएँगी,
गर हमेशा रहे मंज़िलों पर नज़र !

तोड़ दे सरहदेंतू भी हद से गुज़र,
सब पढ़ें ग़ौर सेबन तू ऐसी ख़बर !

क्या हुआ वो अगर तुझको ठुकरा गया,
और हैं मंज़िलेंऔर भी हैं सफ़र !

शर्तिया साथ कुछ भी नहीं जाएगा,
ज़िन्दगी कर मुसाफ़िर की तरह बसर !

शे' लिख कर के 'अल्फ़ाज़ने की दुआ,
जाऊँ हँसता हुआरोए सारा शहर !

||| अल्फ़ाज़ |||

यक़ीं= Trust, Faith, Belief, Confidence
उमर (उम्र) = Age, Life, The Span Of Life
मौक़ा= Opportunity, Chance, 
साबित= Prove
अड़चन= Obstacle 
गर= If              
सरहदें= Boundaries, Borders
हद= Limit, Boundary
ग़ौर= Deep Thought, Reflection, Deliberation
शर्तिया= Surely, Certainly, Undoubtedly
मुसाफ़िर= Traveler, Passenger
बसर= Pass, Spend, Live
शे'र= Verse, Couplet

शनिवार, 6 अक्टूबर 2018

इंतिहा

जो दुआ थी वही बद्-दुआ हो गई,
ये मेरी ज़िन्दगी क्या से क्या हो गई !

इस तरह से गए छोड़कर वो हमें,
रूह जैसे बदन से जुदा हो गई !

आशिक़ों की
 मिसालें था देता जहाँ,
आशिक़ी मैंने की तो ख़ता हो गई !

तेरी यादों में हमको ख़बर न हुई,
रात कब ढल गई, कब सुबह हो गई !

साथ अपने वो सब राहतें ले गया,
इन लबों से हँसी लापता हो गई !

हमने सोचा था, देखेंगे बस एक नज़र,
एक नज़र क्या मिलीसिलसिला हो गई !

अब तो उम्मीद भी थक के कहने लगी,
छोड़ 'अल्फ़ाज़' अब इंतिहा हो गई !

||| अल्फ़ाज़ |||

बद्-दुआ= Curse
रूह= Soul
बदन= Body
मिसाल= Example, Instance, Model
ख़ता= Mistake/ Fault
ख़बर= Information
राहत= Rest, Comfort, Ease
लब= Lips
लापता= Lost
सिलसिला= Chain, Series, Succession
उम्मीद= Hope
इंतिहा= Utmost Limit, End, Extremity