जीतना है अगर, हार से तू न डर,
ख़ुद पे रख तू यक़ीं, और बस कर गुज़र !
जो है लम्हा अभी, इसको जी भर के जी,
ये ही लम्हा है जिसमें है सारी उमर !
फ़िर ये मौक़ा दोबारा मिले न मिले,
जब भी मौक़ा मिले, ख़ुद को साबित तू कर !
अड़चनें कोई भी न नज़र आएँगी,
गर हमेशा रहे मंज़िलों पर नज़र !
तोड़ दे सरहदें, तू भी हद से गुज़र,
सब पढ़ें ग़ौर से, बन तू ऐसी ख़बर !
क्या हुआ वो अगर तुझको ठुकरा गया,
और हैं मंज़िलें, और भी हैं सफ़र !
शर्तिया साथ कुछ भी नहीं जाएगा,
ज़िन्दगी कर मुसाफ़िर की तरह बसर !
शे'र लिख कर के 'अल्फ़ाज़' ने की दुआ,
जाऊँ हँसता हुआ, रोए सारा शहर !
||| अल्फ़ाज़ |||
यक़ीं= Trust, Faith,
Belief, Confidence
उमर (उम्र) = Age, Life, The Span Of
Life
मौक़ा= Opportunity,
Chance,
साबित= Prove
अड़चन= Obstacle
गर= If
सरहदें= Boundaries,
Borders
हद= Limit,
Boundary
ग़ौर= Deep Thought, Reflection,
Deliberation
शर्तिया= Surely, Certainly,
Undoubtedly
मुसाफ़िर= Traveler, Passenger
बसर= Pass, Spend, Live