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सोमवार, 26 नवंबर 2018

क़ीमत

क्यूँ कहता है महंगाई है,
अब भी सस्ती अच्छाई है !

अब भी सस्ता है मुस्काना,
अब भी सस्ती तो भलाई है !

हो अह्ल-ए-नज़र, तुम क्या जानो
कितनी महँगी बीनाई है !

दुनिया की दौलत न माने,
कितनी महंगी सच्चाई है !

महसूस करो इसको छू कर,
अब भी सस्ती पुरवाई है !

सौ नाज़ उठा के हासिल है
कितनी महंगी अंगड़ाई है!

जिस भीड़ में न कोई अपना,
उससे बेहतर तन्हाई है !

हर रोज़ हूँ बिकता सस्ते हैं
कितनी महँगी ये कमाई है !

क़ानून की क़ीमत है सस्ती
महँगी 'अल्फ़ाज़' रिहाई है !

||| अल्फ़ाज़ |||

अह्ल-ए-नज़र= People Of Vision
बीनाई= Vision, Eye-Sight
नाज़= Pride, Grace, Tantrum
हासिल= Gain
बेहतर= Better

क़ानून= Law, Ordinance, Rule

मंगलवार, 13 मार्च 2018

कौन ???

बे-वजह किसीके लिए अब मुस्कुराता कौन है ?
भटके हुए को रास्ता अब दिखलाता कौन है ?

इंसान तो अब इंसान के भी काम नहीं आता,
परिंदों को आजकल पानी पिलाता कौन है ?

इंसानियत को हिस्से में बांटने वाली,
ज़मीन पर ये लकीरें बिछाता कौन है ?

सरहद के पार सब दुश्मन ही रहते हैं,
अफ़वाह दोनों ही तरफ ये फैलाता कौन है ?

लोग तो एक पल में रिश्ते भुला देते हैं,
रंजिशें कभी मगर भूल पाता कौन है ?

जिस ख़ुदा को तेरा क़ानून मानता ही नहीं,
उसकी कसम मेरे क़ातिल को खिलाता कौन है ?

मेरा आक़ीदा है तो इबादत करता हूँ,
नज़र से ख़ुदा को देख पाता कौन है ?

दाढ़ी पहचान हो गई दहशतगर्दी की,
इस्लाम की ये तस्वीर बनाता कौन है ?

सुना है 'फ़राज़' कि अच्छे दिन आयेंगे,
इस बार ये लतीफ़ा सुनाता कौन है ?

|||
फ़राज़ |||

बे-वजह= Without cause, 
परिंदे= Birds
इंसानियत= Humanity
लकीर= Line, Streak
सरहद= Border, Boundary
अफ़वाह= Rumor
रंजिश= Enmity, ill-will/ hostility
क़ातिल= Murderer
आक़ीदा= Faith, Fundamental Doctrine of Belief, Tenet
इबादत= Prayers, Adoration
दाढ़ी= Beard
दहशतगर्दी= Terrorism,
इस्लाम= The religion of the Muslims
लतीफ़ा= Joke

सोमवार, 26 फ़रवरी 2018

!!! फ़राज़-किरदारी !!!

बोहतान मुझपर कभी छोटा नहीं लगता,
अपनी भी शहर में मेयारी तो अभी बाक़ी है !

रिश्वत ही देनी है तो तू फ़िरदौस ले के आ,

मेरी भी फ़राज़-किरदारी तो अभी बाक़ी है !

तू तो क़र्ज़दार है मेरा, तू मुझे क्या देगा,
तेरे माज़ी पर मेरी उधारी तो अभी तो बाक़ी है !

महज़ क़ानून बना देने से जरायम नहीं रुकने वाले,
मेरे मुल्क में भूख और बेरोज़गारी तो अभी बाक़ी है !

मुकम्मल रश्क़ ज़ाया कर तू मेरी ग़ज़लों पर,
मेरे कलम की नग़मानिगारी तो अभी बाक़ी है !

पापा अक्सर ये सोचकर नए कपड़े नहीं लाते,
कि मेरे बच्चों की ख़रीदारी तो अभी बाक़ी है !

तुम अभी न दो मुझे उस्ताद का दर्जा,
मेरे कलाम की शाहकारी तो अभी बाक़ी है !

हाथ फैलाएगा तो सिर्फ़ अल्लाह के सामने,
'फ़राज़' में इतनी ख़ुद्दारी तो अभी बाक़ी है !

||| फ़राज़ |||

बोहतान= False accusation, Calumny
शहर= City
मेयारी= Qualitative, Standard
रिश्वत= Bribe
फ़िरदौस= The highest layer of heaven/Paradise.
फ़राज़-किरदारी= Elevated character.
क़र्ज़दार= Indebted, Debtor
माज़ी= Past
उधारी= Debt, Loan
बाक़ी= Remaining
महज़= Merely, Only.
क़ानून= Law, Stature, Rule. 
जरायम= Crimes, Sins.
मुल्क= Country
बेरोज़गारी= Unemployment.
मुकम्मल= Complete
रश्क़= Jealousy, Envy.
ज़ाया= Waste
कलम= Pen
नग़मानिगारी= Song/Lyrics writing.
ख़रीदारी= Shopping
उस्ताद=  Teacher, Mentor
दर्जा= Class, Rank, Grade.
कलाम= Word, Speech
शाहकारी= Masterpiece.
ख़ुद्दारी= Self-respect

सोमवार, 4 दिसंबर 2017

नज़र !!!

चाहत चमन की अगर दिल में है तो,
पहले ज़रा काँटों पर गुज़र करके देखिये !
क्या मज़ा मिलता है परवाने को जलने में,
कभी किसी शमा पर मचल करके देखिये !

उन निगाहों में फ़रेब भी हो सकता है,
देखिये, मगर ज़रा संभल करके देखिये !
पहली नज़र में धोखा भी हो सकता है,
दिल लगाने से पहले ज़रा ठहर करके देखिये !

उसकी हद क्या है, ये तो है उसकी मर्ज़ी,
आप तो अपनी हद से गुज़र करके देखिये !
इश्क़ मंज़िल की नहीं सफ़र की कहानी है,
अंजाम से बेफ़िक्र ये सफ़र करके देखिये !

अब तो क़ानून में महज़ इतनी गुंजाइश है,
कि देखिये मगर, न आँख भर के देखिये !
मगर इश्क़ ने कब माने हैं ज़माने के उसूल,
इश्क़ गुनाह ही सही, मगर करके देखिये !

कैसे दिखलायें आपको दिल की हालत,
मेरे दिल से दिल को बदल करके देखिये !
इश्क़ में तो मैं शहर हो चुका हूँ फ़राज़,
आइये, कभी मुझमें ठहर कर के देखिये !

|||फ़राज़|||

चमन= Flower garden, Flourishing place.
परवाना= Moth
शमा= Candle.
फ़रेब= Deceit, Deception.
हद= Limit, Boundry.
मर्ज़ी= Choice, Consent, Assent.
अंजाम= Result, Consequence, Fate. 
बेफ़िक्र= Careless.
क़ानून= Law, Ordinance, Rule.
महज़= Merely, Only.
गुंजाइश= Place, Room.
उसूल= Rule, Principle, Fundamental.