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सोमवार, 4 दिसंबर 2017

नज़र !!!

चाहत चमन की अगर दिल में है तो,
पहले ज़रा काँटों पर गुज़र करके देखिये !
क्या मज़ा मिलता है परवाने को जलने में,
कभी किसी शमा पर मचल करके देखिये !

उन निगाहों में फ़रेब भी हो सकता है,
देखिये, मगर ज़रा संभल करके देखिये !
पहली नज़र में धोखा भी हो सकता है,
दिल लगाने से पहले ज़रा ठहर करके देखिये !

उसकी हद क्या है, ये तो है उसकी मर्ज़ी,
आप तो अपनी हद से गुज़र करके देखिये !
इश्क़ मंज़िल की नहीं सफ़र की कहानी है,
अंजाम से बेफ़िक्र ये सफ़र करके देखिये !

अब तो क़ानून में महज़ इतनी गुंजाइश है,
कि देखिये मगर, न आँख भर के देखिये !
मगर इश्क़ ने कब माने हैं ज़माने के उसूल,
इश्क़ गुनाह ही सही, मगर करके देखिये !

कैसे दिखलायें आपको दिल की हालत,
मेरे दिल से दिल को बदल करके देखिये !
इश्क़ में तो मैं शहर हो चुका हूँ फ़राज़,
आइये, कभी मुझमें ठहर कर के देखिये !

|||फ़राज़|||

चमन= Flower garden, Flourishing place.
परवाना= Moth
शमा= Candle.
फ़रेब= Deceit, Deception.
हद= Limit, Boundry.
मर्ज़ी= Choice, Consent, Assent.
अंजाम= Result, Consequence, Fate. 
बेफ़िक्र= Careless.
क़ानून= Law, Ordinance, Rule.
महज़= Merely, Only.
गुंजाइश= Place, Room.
उसूल= Rule, Principle, Fundamental.

बुधवार, 6 सितंबर 2017

दिल के फ़रेब

रूबरू ख़ुद से मैं जिस पल हो गया,
एक पहेली सा था, मैं हल हो गया !

दिल के हर फ़रेब की किताबत की है,
कीमियागरी अब मेरा शग़ल हो गया !

जब भी तेरा नाम मेरी ज़ुबान पर आया,
मुख़ालिफ़ मेरे ये सारा शहर हो गया !

कुछ ठिकाने फ़िर कभी न आबाद हुए,
मेरे शहर से जब मैं शहर-बदर हो गया !

आना तो न था मुझे वापस तेरे दर पर ,
फ़क़त आदतन मुझसे ये अमल हो गया !

बिखरा सा था तू अब तलक ख़यालों में,
मैंने समेटा लिया तो तू ग़ज़ल हो गया !

|||फ़राज़|||

फ़रेब= Deception, Deceit.
किताबत= Correspondence.
कीमियागरी= Alchemy.
शग़ल= Hobby.
मुख़ालिफ़= Opposite, Enemy.
शहर-बदर= Outcasted, Exiled.
फ़क़त= merely, simply, only.
आदतन= Habitually.
अमल= Act.

शुक्रवार, 14 अप्रैल 2017

क़ायदा !!!


अपनी ही ठोकरों से क़ायदा सीखेगा,
नस्ल-ए-आदम हैकरके ख़ता सीखेगा!

ये रंगीनियाँआसाईशेंये  फ़रेब ज़माने के,
शौक़-ए-लज़्ज़त में कितने गुनाह सीखेगा!


आलिम-ए-दीन भी अब तो करते हैं सियासत,
इनकी सोहबत में कौन सा ख़ुदा सीखेगा!


देखना तू भी तड़पेगा दिलनवाज़ी करके,
इश्क़ करके ही नुक़्साँ-ओ-नफ़ा सीखेगा!

तालीमगाहों में सीखेगा किताबी बातें,
ज़िन्दगी से लड़कर ही तजरबा सीखेगा!


शोर में भी अगर तू तन्हा सा रहता है,
तो ख़ामोशी में दिल की ज़बाँ सीखेगा!


जीतना है तो फ़िर तू हार से न डर,
हार कर ही जीतने का सलीक़ा सीखेगा!

स्याह रात के बाद सुबह होती है 'अल्फ़ाज़',
बार-हा ये सबक़ भी तो तू सुबह सीखेगा!

||| अल्फ़ाज़ |||

क़ायदा=  Regulations, Custom, Rule, Habit.
नस्ल-ए-आदम= Progeny Of Adam.
रंगीनियाँ= Ornateness.
आसाईशें= Comfort, Luxury.
फ़रेब=Deceit, Deception.
शौक़-ए-लज़्ज़त= Desire Of Enjoyment.
आलिम-इ-दीन= Scholars Of The Religion.
सियासतें= Politics.
दिलनवाज़ी= Heart-pleasing.
नुक़सान-ओ-नफ़ा= Loss and profit.
तालीमगाह= Seminary.
सलीक़ा= manner.
स्याह= Dark
बार-हा= Often