अपनी ही ठोकरों से क़ायदा सीखेगा,
नस्ल-ए-आदम है, करके ख़ता सीखेगा!
ये रंगीनियाँ, आसाईशें, ये फ़रेब ज़माने के,
शौक़-ए-लज़्ज़त में कितने गुनाह सीखेगा!
आलिम-ए-दीन भी अब तो करते हैं सियासत,
इनकी सोहबत में कौन सा ख़ुदा सीखेगा!
देखना तू भी तड़पेगा दिलनवाज़ी करके,
इश्क़ करके ही नुक़्साँ-ओ-नफ़ा सीखेगा!
इश्क़ करके ही नुक़्साँ-ओ-नफ़ा सीखेगा!
तालीमगाहों में सीखेगा किताबी बातें,
ज़िन्दगी से लड़कर ही तजरबा सीखेगा!
ज़िन्दगी से लड़कर ही तजरबा सीखेगा!
शोर में भी अगर तू तन्हा सा रहता है,
तो ख़ामोशी में दिल की ज़बाँ सीखेगा!
तो ख़ामोशी में दिल की ज़बाँ सीखेगा!
जीतना है तो फ़िर तू हार से न डर,
हार कर ही जीतने का सलीक़ा सीखेगा!
हार कर ही जीतने का सलीक़ा सीखेगा!
स्याह रात के बाद सुबह होती है 'अल्फ़ाज़',
बार-हा ये सबक़ भी तो तू सुबह सीखेगा!
बार-हा ये सबक़ भी तो तू सुबह सीखेगा!
||| अल्फ़ाज़ |||
क़ायदा=
Regulations, Custom, Rule, Habit.
नस्ल-ए-आदम=
Progeny Of Adam.
रंगीनियाँ= Ornateness.
आसाईशें=
Comfort, Luxury.
फ़रेब=Deceit,
Deception.
शौक़-ए-लज़्ज़त= Desire
Of Enjoyment.
आलिम-इ-दीन= Scholars Of The Religion.
सियासतें=
Politics.
दिलनवाज़ी= Heart-pleasing.
नुक़सान-ओ-नफ़ा= Loss
and profit.
तालीमगाह= Seminary.
सलीक़ा= manner.
स्याह= Dark
बार-हा= Often
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