मुझे अब्र कर दे या मुझे मीनार कर दे,
मौला मुझे इतना बुलंद किरदार कर दे,
इस ज़िन्दगी की धूप से बेशक़ मुझे जला,
मुझको ख़ुदा शजर तू सायदार कर दे !!!
अब्र= Cloud
शजर= Tree
||| फ़राज़ |||
जिंदगी दो तरह के सवालों में है एक जीते हैं हम, एक ख़यालों में है! चलिए रूबरू कराते हैं अल्फ़ाज़ की अल्फ़ाज़ियत से l मैं वादा करता हूँ कि मेरी हर ग़ज़ल में आप मुझसे, और ख़ुद से भी मिलेंगे l
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