एक शाम मेरी हथेली पर
अपनी ऊँगली से
लिखा था तुमने
"मुझे प्यार है तुमसे"
न जाने कैसी स्याही थी वो...
जो अब न दिखती है
और न मिटती है !!
||| फ़राज़ |||
अपनी ऊँगली से
लिखा था तुमने
"मुझे प्यार है तुमसे"
न जाने कैसी स्याही थी वो...
जो अब न दिखती है
और न मिटती है !!
||| फ़राज़ |||
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