जिंदगी दो तरह के सवालों में है एक जीते हैं हम, एक ख़यालों में है! चलिए रूबरू कराते हैं अल्फ़ाज़ की अल्फ़ाज़ियत से l मैं वादा करता हूँ कि मेरी हर ग़ज़ल में आप मुझसे, और ख़ुद से भी मिलेंगे l
शनिवार, 27 अगस्त 2022
अक्स...
शुक्रवार, 5 अगस्त 2022
इंसान
मुश्किल में न पड़ें हम,आसान ही रहें,
क्यूँ न कि आप और हम इंसान ही रहें!
संजीदगी से जीने को उम्र है पड़ी,
बच्चे हैं तो ज़रा से शैतान ही रहें!
आई हैं पेश ऐसी कड़वी हक़ीक़तें,
इम्कान या ख़ुदारा इम्कान ही रहें!
अल्लाह तू भले ही नादान हमको रख,
आधे-अधूरे सच से अन्जान ही रहें!
‘अल्फ़ाज़’ है ज़रूरी थोड़ा अधूरापन,
अरमान कुछ हमेशा अरमान ही रहें!
।।। अल्फ़ाज़ ।।।
संजीदगी = Seriousness, गंभीरता
शैतान = Naughty, शरारती
पेश = Happen, समक्ष
हक़ीक़त = Reality, वास्तविकता
इम्कान = Possibility, Probability, अंदेशा, शंका
या ख़ुदारा = O God
नादान = Innocent, Ignorant, अज्ञानी
अरमान = Desire, Longing, इच्छा, लालसा
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मेरे दिल को जो ग़म की ख़बर हो गई, शायरी किस क़दर बा-हुनर हो गई! हम तेरे इश्क़ में मुब्तला यूँ हुए, लोग कहते हैं हमको नज़र हो गई! ...
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लुटा दिल देख कर अपना तू क्यूँ हैरान है आख़िर , लुटेरा तेरी दुनिया का तेरी ही जान है आख़िर , बनाया था ख़ुदा जिसको कभी तूने मोहब्बत का , ...
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दिल्लगी का इल्ज़ाम भला उसको क्यूँ दें, हम ही तो उसके थे वो हमारा कब था ! जिस नाख़ुदा के हवाले थी कश्ती अपनी, वो तो एक मौज था, व...