इसलिए आईने से हमें बैर है!
ज़िन्दगी के मुताल्लिक़ न कुछ पूछिए,
ठीक कुछ भी नहीं, और सब ख़ैर है!
वक़्त तो वक़्त है, फिर बदल जाएगा,
तू नज़ाकत समझ, वक़्त का फेर है!
बीच में पिस गई सारी इंसानियत,
एक तरफ है हरम, एक तरफ दैर है!
सिक्के के दोनों पहलू समझ आ गए,
आज जाकर मुकम्मल हुआ शेर है!
बोझ इतना भी ले कर के मत घूमिये,
ये जो दुनिया है ‘अल्फ़ाज़’ एक सैर है!
।।। अल्फ़ाज़।।।
अक्स = प्रतिबिंब, Reflection
ग़ैर = अजनबी, दूसरा, Other, Stranger
बैर = विरोध, शत्रुता, Animity
मुताल्लिक़ = सम्बन्ध में, विषय में, Belonging, Relating (to)
ख़ैर = कुशल, मंगल, Well, Good
नज़ाकत
= कोमलता, Delicacy
हरम = मस्जिद, Mosque
दैर = मंदिर, Temple
मुकम्मल = पूर्ण, पूरा, Complete.
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