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सोमवार, 25 फ़रवरी 2019

सफ़र

मंज़िल को छोड़ करके हम सफ़र में आ गए,
घर लौट न सके जब से हम शहर में आ गए !

हम घर कभी मुकम्मल लौटे ही कहाँ हैं,
दफ़्तर का काम ले के हम घर में आ गए !

सजदे में भी सोचा किए दुनिया के काम-काज,
मस्जिद तलक तो अल्लाह के डर में आ गए !

करते हैं सफ़र रोज़ कहीं न पहुँचने का,
सफ़र हम में आ गया, हम सफ़र में आ गए !

पढ़ता है कौन इन दिनों अच्छाई की ख़बर,
जितने ग़लत थे वो सभी ख़बर में आ गए !

वही लोग कि जो काटते थे रात दिन शजर,
धूप में जले तो साया-ए-शजर में आ गए !

कोई चल न सका दूर तलक साथ में मेरे,
मंज़िल से पहले मोड़ रहगुज़र में आ गए !

किस-किस अदा की आपकी तारीफ़ मैं करूँ,
तमाम दरिया सिमट के समंदर में आ गए !

कुछ तो अलग सी बात है
 'अल्फ़ाज़में मेरे,
यूँ ही नहीं हम आपकी नज़र में आ गए !

||| अल्फ़ाज़ |||

सफ़र = Journey, Voyage, Travel, यात्रा
मुकम्मल = Perfect, Complete सम्पूर्ण, पूर्णतयः
दफ़्तर = Office, Department, कार्यालय
सजदे = Prayers, To Kneel And Touch One's Forehead To The Ground, TO Bow प्रार्थना
काम-काज = Work, Occupation, Activity
मस्जिद = Mosque
तलक = Till, तक
शजर = Tree पेड़, वृक्ष
साया-ए-शजर = Shadow/ Shade/ Protection Of The Tree पेड़/वृक्ष की छाया
रहगुज़र = Road, Path, रास्ता, पथ, मार्ग
अदा = Coquetry, Gesture, 
तारीफ़ = Praise प्रशंसा
तमाम = Entire, All, सब
दरिया = River नदी
नज़र = Vision, Favour 

शनिवार, 3 नवंबर 2018

मंज़र

एक सवाल में उलझा हूँ उम्र भर से मैं,
कि मंज़र गुज़र जाता है या मंज़र से मैं !

यहाँ अभी न हिंदू
, न मुसलमान हूँ मैं,
शहर मुझसे अजनबी है और शहर से मैं !

इंसान से तो सीखा है ख़ुदगर्ज़ होना,
सख़ावत तो सीखा हूँ शजर से मैं !

मैं कहीं रहूँदिल तो घर पे रहता है,
न घर मुझसे दूर है, न घर से मैं !

कोई माटी का तो कोई बुत तसव्वुर का,
डरता हूँ अपने ही बनाये डर से मैं !

वो आ के थम जाएगी मेरे साहिल पर,
उम्मीद लगाये बैठा था एक लहर से मैं !

हर मील का पत्थर ये गवाही देगा,
कि सफ़र मुझसे था या सफ़र से मैं !

मर्तबे बिकते नहीं हैं  बाज़ारों में,
'अल्फ़ाज़बना हूँ अपने हुनर से मैं !

||| अल्फ़ाज़ |||

मंज़र= Scene, View
ख़ुदगर्ज़= Selfish
सख़ावत= Generosity
शजर= Tree
माटी= Mud, Clay, Silt
बुत= Idol
तसव्वुर= Imagination
मर्तबा= Account, Class, Degree, Office
हुनर= Art, Skill, Talent

शुक्रवार, 31 अगस्त 2018

मनचला

मैं जब से बे-वजह सा हो गया हूँ,
निहायत ख़ुशनुमा सा हो गया हूँ !

मुझे सब मांगने लगे हैं,
मैं जब से दुआ सा हो गया हूँ !

ख़िज़ाँ की धूप में झुलस कर,
शजर एक सायबाँ सा हो गया हूँ !

सभी को मुआफ़ जब से किया है,
मैं बाद-ए-सबा सा हो गया हूँ !

नहीं सुनता मैं अपने ज़हन की,
ज़रा सा मनचला सा हो गया हूँ !

न अपनी छत न अपनी ज़मीं है,
शहर में एक मकाँ सा हो गया हूँ !

पुरानी बेड़ियों को तोड़ कर के,
‘फ़राज़’ मैं फ़िर नया सा गया हूँ !

||| फ़राज़ |||

बे-वजह= Causeless, Without-Cause
निहायत= Very Much, Extreme
ख़ुशनुमा= Pleasant To Sight
ख़िज़ाँ= Autumn, Decay
शजर= Tree
सायबाँ= Shade, Shelter
मुआफ़= Excuse, Absolve, Exempt
बाद-ए-सबा= Morning Breeze, The Zephyr, A Refreshing Wind
ज़हन= Mind
मकाँ= House, Home
बेड़ियाँ= Chains

गुरुवार, 23 अगस्त 2018

नज़रिया !!!


हर पल जुनूँ में बे-क़रारी रखना,
ख़ुद से ख़ुद की जंग जारी रखना !

ज़िन्दगी तरह-तरह से आज़माएगी,
तुम भी हर क़िस्म की तैयारी रखना !

दस्तूर ही सही, बेवफ़ाई तो बेईमानी है,
तुम अपने हिस्से की ईमानदारी रखना !

जब कभी इम्तिहान तेरे किरदार का हो,
सबसे आगे तू अपनी ख़ुद्दारी रखना !

हर मील के पत्थर पे मैं ये लिख आया हूँ,
मंज़िल अनक़रीब हैसफ़र जारी रखना !

कुछ देना हो तो बे-ग़रज़ हो के देना,
शजर की तरह कोई ज़िम्मेदारी रखना !

'फ़राज़' ये दौर ही मुनाफ़ाख़ोरी का है,
तू भी अपना नज़रिया बाज़ारी रखना !

||| फ़राज़ |||

जुनूँ= Frenzy, Infatuation

बे-क़रारी= Unease, Excitement
क़िस्म= Kind, Variety
दस्तूर= Custom
बेईमानी= Dishonesty
इम्तिहान= Test, Exam
किरदार= Character, Conduct
ख़ुद्दारी= Self-Respect
मील के पत्थर= Mile-Stone
अनक़रीब= Soon, Shortly
सफ़र= Journey
बे-ग़रज़= Selfless
शजर= Tree
ज़िम्मेदारी= Responsibility
मुनाफ़ाख़ोरी= Profiteering
नज़रिया= Attitude, Viewpoint, Vantage-Point, Ideology
बाज़ारी= Marketeering


शनिवार, 14 जुलाई 2018

मुक़द्दर !!!

हर आज़माइश में तू और बेहतर हो जा,
अपनी तक़दीर का तू ख़ुद मुक़द्दर हो जा !

वो भी इंसान था जिसने फ़तह की दुनिया,
तू भी इंसान है, ज़िद करके सिकंदर हो जा !

पायेगा उतना ही जितना तू चाहेगा ,
प्यास इतनी रख कि तू समंदर हो जा !

डर जायेगा तो हार यक़ीनन होगी,
जीत तेरी होगी जो तू निडर हो जा !

इतना भी न तू पी कि प्यास बुझ जाए,
इतना भी न छलक कि तू साग़र हो जा !

बे-सबब होने में सुकून रूहानी है,
किसीके लिए तू धूप में शजर हो जा !

ऐ दिल, तू बच्चों की तरह ज़िद न किया कर,
ऐ पाँव, तू भी चादर के बराबर हो जा !

आईने भी तो मोहताज हैं बीनाई के,
सच देखना है 'फ़राज़' तो बे-नज़र हो जा !

||| फ़राज़ ||| 

आज़माइश= Trial, Test, Examination
बेहतर= Better
तक़दीर= Divine Decree, Fate, Destiny
मुक़द्दर= Fate, Destiny
फ़तह= Conquer, Victory
यक़ीनन=  Definitely
साग़र= Wine-Cup, Goblet
बे-सबब= Without Cause Or Reason
सुकून= Peace, Tranquillity
रूहानी= Divine
शजर= Tree
मोहताज= Dependent
बीनाई= Eye-Sight, Vision

बे-नज़र= Without Sight, One Without Perceptiveness For The Intrinsic Worth Of Something

शुक्रवार, 30 मार्च 2018

!!! दीन !!!

मुफ़्लिसी में अमीरी का हुनर होना भी दीन है,
अपने हालात पर सब्र होना भी दीन है !

यूँ तो इन्सान की फ़ितरत है ख़्वाहिश करना,
अपनी चादर पैरों के बराबर होना भी दीन है !

सारे आलम का इल्म हो, ये ज़रूरी तो नहीं,
पड़ोसी की ख़ैर-ख़बर होना भी दीन है !

इस मादर-ए-ज़मीं के कुछ क़र्ज़ तो चुका,
घर के आँगन में शजर होना भी दीन है !

ख़ाना-ए-काबा की ज़ियारत हो, ये ज़रुरी तो नहीं,
माँ-बाप पर मोहब्बत की नज़र होना भी दीन है !

यूँ तो हर इन्सान से गुनाह हो ही जाता है,
मगर दिल में अल्लाह का डर होना भी दीन है !

संग-ए-मरमर के महलों से भी जन्नत नहीं मिलती,
क़ब्रिस्तान में मिट्टी की क़ब्र होना भी दीन है !

इतना महँगा भी तो नहीं है नेक सलाह देना,
भटके हुओं का रहबर होना भी दीन है !

नज़र को ख़ुदा की तलाश तो हरगिज़ रही है,
मगर अक़ीदे का बे-नज़र होना भी दीन है !

अल्लाह को पसंद है 'अल्फ़ाज़नदामत करना,
अपनी लग़्ज़िशों की ख़बर होना भी दीन है !


||| अल्फ़ाज़ |||

मुफ़्लिसी= Poverty
हुनर= Talent
दीन= Religion, Belief
हालात= State, Condition, The Present Time
सब्र= Patience, Endurance
फ़ितरत= nature
ख़्वाहिश= wish, request, inclination, will
आलम= The Universe, World.
इल्म= Knowledge
ख़ैर-ख़बर= News About Well Being
मादर-ए-ज़मीं= Mother Earth
क़र्ज़= Debt
शजर= Tree
ख़ाना-ए-काबा= The Kaaba Is A Building At The Centre Of Islam's Most Important Mosque, Al-Masjid Al-Ḥarām, In The Hejazi City Of Mecca, Saudi Arabia. It Is The Most Sacred Site In Islam.
ज़ियारत= Pilgrimage, Visiting A Shrine
संग-ए-मरमर=  Sang-E-Marmar, The White Stone, Used To Build Taj Mahal, Comes From A Pyramidal Peak In The Batura Muztagh, At The End Of A Spur Ridge Running Southwest From Pasu Sar In Pakistan. It Lies Between The Muchuhar Glacier, On The West, And The Shispare (Or Hasanabad) Glacier On The East.
महल= A Mansion Or Palace.
क़ब्रिस्तान= Cemetery, Graveyard
क़ब्र= Grave
नेक= Good, Virtuous.
सलाह= Advice
रहबर= Guide
तलाश= Search
हरगिज़= Ever
अक़ीदा= Fundamental Doctrine Of Belief, Tenet
बे-नज़र= Without Sight, 
पसंद= Likeness, Preference
नदामत= Regret, Repentance, Shame
लग़्ज़िश= Blunder, Error, Mistake