मंज़िल
को छोड़ करके हम सफ़र में आ गए,
घर
लौट न सके जब से हम शहर में आ गए !
हम घर कभी मुकम्मल लौटे ही कहाँ हैं,
दफ़्तर का काम ले के हम घर में आ गए !
सजदे में भी सोचा किए दुनिया के काम-काज,
मस्जिद
तलक तो अल्लाह के डर में
आ गए !
करते हैं सफ़र रोज़ कहीं न पहुँचने का,
सफ़र
हम में आ गया, हम सफ़र में आ गए !
पढ़ता है कौन इन दिनों अच्छाई की ख़बर,
जितने
ग़लत थे वो सभी ख़बर में आ गए !
वही
लोग कि जो काटते थे रात दिन शजर,
धूप
में जले तो साया-ए-शजर में आ गए !
कोई
चल न सका दूर तलक साथ में मेरे,
मंज़िल
से पहले मोड़ रहगुज़र में आ गए !
किस-किस अदा की आपकी तारीफ़ मैं करूँ,
तमाम
दरिया सिमट
के समंदर में आ गए !
कुछ तो अलग सी बात है 'अल्फ़ाज़' में मेरे,
यूँ
ही नहीं हम आपकी नज़र में आ गए !
||| अल्फ़ाज़ |||
सफ़र
= Journey, Voyage, Travel, यात्रा
मुकम्मल
= Perfect, Complete सम्पूर्ण, पूर्णतयः
दफ़्तर
= Office, Department, कार्यालय
सजदे = Prayers,
To Kneel And Touch One's Forehead To The Ground, TO Bow प्रार्थना
काम-काज = Work,
Occupation, Activity
मस्जिद =
Mosque
तलक = Till,
तक
शजर =
Tree पेड़, वृक्ष
साया-ए-शजर = Shadow/
Shade/ Protection Of The Tree पेड़/वृक्ष
की छाया
रहगुज़र = Road,
Path, रास्ता, पथ, मार्ग
अदा = Coquetry,
Gesture,
तारीफ़ = Praise
प्रशंसा
तमाम = Entire, All, सब
दरिया = River नदी
नज़र = Vision,
Favour