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शनिवार, 9 मार्च 2019

पहली दुआ

क्या मेरी आजिज़ी इतनी कामिल न थी,
जो थी पहली दुआवो ही हासिल न थी !

बाद तेरे तुझे ही तलाशा किए,
एक सफ़र वो कियाजिसकी मंज़िल न थी !

दिल को हमने ये कह कर के समझा लिया,
शायद मेरी वफ़ा के वो क़ाबिल न थी !

मेरी राह-ए-गुज़र की वो एक शाम थी,
मेरी कश्ती का लेकिन वो साहिल न थी !

शायरी की मिलीं जिससे सारी वजहें,
मेरे अशआ' की वो ही क़ाइल न थी !

मोड़ आया तो'अल्फ़ाज़वो मुड़ गई,
हमसफ़र तो थी लेकिन वो मंज़िल न थी !

||| अल्फ़ाज़ |||

आजिज़ी = Helplessness, Humility, असहायता 
कामिल = Perfect, Complete, पूरापूर्णसंपूर्ण,
हासिल = Gain, Result, प्राप्तउपलब्ध
तलाशा = Search, खोज
क़ाबिल = Deserving, पात्र
सफ़र = Journey, Voyage, Travel, यात्रा
राह-ए-गुज़र = Road, Path, रास्तापथमार्ग 
साहिल = The Sea-Shore, Beach, Coast, तटकिनारा
अशआ'र = Couplets
क़ाइल = Agree, Consent, Convince, Acknowledge
हमसफ़र = Fellow-Traveler

सोमवार, 25 फ़रवरी 2019

सफ़र

मंज़िल को छोड़ करके हम सफ़र में आ गए,
घर लौट न सके जब से हम शहर में आ गए !

हम घर कभी मुकम्मल लौटे ही कहाँ हैं,
दफ़्तर का काम ले के हम घर में आ गए !

सजदे में भी सोचा किए दुनिया के काम-काज,
मस्जिद तलक तो अल्लाह के डर में आ गए !

करते हैं सफ़र रोज़ कहीं न पहुँचने का,
सफ़र हम में आ गया, हम सफ़र में आ गए !

पढ़ता है कौन इन दिनों अच्छाई की ख़बर,
जितने ग़लत थे वो सभी ख़बर में आ गए !

वही लोग कि जो काटते थे रात दिन शजर,
धूप में जले तो साया-ए-शजर में आ गए !

कोई चल न सका दूर तलक साथ में मेरे,
मंज़िल से पहले मोड़ रहगुज़र में आ गए !

किस-किस अदा की आपकी तारीफ़ मैं करूँ,
तमाम दरिया सिमट के समंदर में आ गए !

कुछ तो अलग सी बात है
 'अल्फ़ाज़में मेरे,
यूँ ही नहीं हम आपकी नज़र में आ गए !

||| अल्फ़ाज़ |||

सफ़र = Journey, Voyage, Travel, यात्रा
मुकम्मल = Perfect, Complete सम्पूर्ण, पूर्णतयः
दफ़्तर = Office, Department, कार्यालय
सजदे = Prayers, To Kneel And Touch One's Forehead To The Ground, TO Bow प्रार्थना
काम-काज = Work, Occupation, Activity
मस्जिद = Mosque
तलक = Till, तक
शजर = Tree पेड़, वृक्ष
साया-ए-शजर = Shadow/ Shade/ Protection Of The Tree पेड़/वृक्ष की छाया
रहगुज़र = Road, Path, रास्ता, पथ, मार्ग
अदा = Coquetry, Gesture, 
तारीफ़ = Praise प्रशंसा
तमाम = Entire, All, सब
दरिया = River नदी
नज़र = Vision, Favour 

शुक्रवार, 4 जनवरी 2019

यक़ीं

जीतना है अगरहार से तू न डर,
ख़ुद पे रख तू यक़ीं, और बस कर गुज़र !

जो है लम्हा अभीइसको जी भर के जी,
ये ही लम्हा है जिसमें है सारी उमर !

फ़िर ये मौक़ा दोबारा मिले न मिले,
जब भी मौक़ा मिलेख़ुद को साबित तू कर !

अड़चनें कोई  भी न नज़र आएँगी,
गर हमेशा रहे मंज़िलों पर नज़र !

तोड़ दे सरहदेंतू भी हद से गुज़र,
सब पढ़ें ग़ौर सेबन तू ऐसी ख़बर !

क्या हुआ वो अगर तुझको ठुकरा गया,
और हैं मंज़िलेंऔर भी हैं सफ़र !

शर्तिया साथ कुछ भी नहीं जाएगा,
ज़िन्दगी कर मुसाफ़िर की तरह बसर !

शे' लिख कर के 'अल्फ़ाज़ने की दुआ,
जाऊँ हँसता हुआरोए सारा शहर !

||| अल्फ़ाज़ |||

यक़ीं= Trust, Faith, Belief, Confidence
उमर (उम्र) = Age, Life, The Span Of Life
मौक़ा= Opportunity, Chance, 
साबित= Prove
अड़चन= Obstacle 
गर= If              
सरहदें= Boundaries, Borders
हद= Limit, Boundary
ग़ौर= Deep Thought, Reflection, Deliberation
शर्तिया= Surely, Certainly, Undoubtedly
मुसाफ़िर= Traveler, Passenger
बसर= Pass, Spend, Live
शे'र= Verse, Couplet

सोमवार, 3 सितंबर 2018

मंज़िल


दूर सही, एक मंज़िल है,
धुंधला ही सही, एक साहिल है !

कुछ भी नहीं है नामुमकिन,
एक राह ज़रा सी मुश्किल है !

दुनिया की फ़िक्र में ऐ इंसाँ,
तू ख़ुद से क्यूँ इतना ग़ाफ़िल है !

मत हार, लड़ाई बाक़ी है,
जीता न सही, तू क़ाबिल है !

चादर में समेटो पैरों को,
क़िस्मत में था जितनाहासिल है !

जहाँ कोई क़दम न पहुँचा हो,
फ़राज़की वही तो मंज़िल है !

||| फ़राज़ |||

मंज़िल= Stage, Destination
साहिल= The Sea-Shore, Coast, Beach
नामुमकिन= Impossible
फ़िक्र= Concern, Thought
इंसाँ= Human, Mankind
ग़ाफ़िल= Negligent, Oblivious
क़ाबिल= Able, Competent, Deserving
हासिल= Gain, Profit

बुधवार, 13 जून 2018

सफ़र !!!

कभी धूप का सफ़र, तो कभी छाँव का सफ़र,
एक तलातुम से झगड़ती मेरी नाव का सफ़र !

पा के मंज़िल को भी सफ़र में हम हैं
ख़त्म होता नहीं इश्क़ की राहों का सफ़र !

मेरे दर्द से तकलीफ़ कभी उनको भी हो,
कभी उन तक भी तो पहुंचे मेरी आहों का सफ़र !

वो भंवर था हमने जिसको साहिल समझा,
अब तो जाँ पे बन आया है वफ़ाओं का सफ़र !

मेरे पैरों में बेड़ियाँ मेरे हालात की हैं,
वरना लम्बा तो नहीं यहाँ से मेरे गाँव का सफ़र !

ख़ुद को तलाशता हूँ मैं अह्ल-ए-नज़र,
आईना दिखलाता है निगाहों का सफ़र !

जबीं रोज़ पूछती है ख़ुदा से सजदा करके !
मुकम्मल कब होगा मेरी दुआओं का सफ़र !

चाहतें जन्नत की दिल में रखता है 'फ़राज़',
फ़िर भी करता है शब्-ओ-रोज़ गुनाहों का सफ़र !

||| फ़राज़ |||

सफ़र= Journey
तलातुम= Sea-Storm, High Tide, Upheaval
मंज़िल= Destination, Stage
तकलीफ़= Trouble, Difficulty
आहों= Sighs, Moans.
भंवर= Whirlpool Vortex
साहिल= The Sea-Shore, Coast, Bank, 
जाँ= Life, Soul
वफ़ा= Fidelity, Faithfulness.
बेड़ियाँ= Shackles, Chains
हालात= Circumstances, Condition
वरना= Else, Otherwise
तलाशता= Search, Investigation, Quest, 
अह्ल-ए-नज़र= People Of Vision
आईना= Mirror
जबीं= Forehead
सजदा= Bowing In Prayer So As To Touch The Ground With The Forehead
मुकम्मल= Complete, Perfect
दुआ= Prayer
चाहत= Affection, Appetite
जन्नत= Paradise
शब्-ओ-रोज़= Night And Day
गुनाह= Sin, Crime, Fault

मंगलवार, 10 अप्रैल 2018

!!! नाम-ए-फ़राज़ !!!

कोई न जोड़ पाया है कभी टूटे हुए दिल को,
तेरी शीशागरी पे तुझको इतना नाज़ बेजा है !

कि उसके नाज़ नख़रों के सवाली और भी होंगे,
मनाने वो न आयेगा, कि तू नाराज़ बेजा है !

तुझे तो जीतना है आसमान की हर बुलंदी को,
अगर मंज़िल ज़मीं है तो तेरी परवाज़ बेजा है !

नहीं थमते तेरे मन के ये कारोबार दुनिया के,
महज़ कसरत ज़बानी हो तो वो नमाज़ बेजा है !

तजरबे हैं बुरे लेकिन सबक़ अच्छा मैं देता हूँ,
तेरी इस्लाह न कर पायें तो मेरे अल्फ़ाज़ बेजा हैं !

तेरे मेरे कलम में तो स्याही एक जैसी है,
अगर बेहतर न मैं लिखूं तो नाम-ए-फ़राज़ बेजा है !

||| फ़राज़ |||


शीशागरी= Art of glass-making.
नाज़= Pride, Proud.
बेजा= Fruitless, Unbecoming, Unfair, Unbefitting.
नख़रा= Coquetry
सवाली= A beggar, A petitioner
नाराज़= Displeased, Offended.
बुलंदी= High place, Height, Loftiness
मंज़िल= Destination
परवाज़= Flight
कारोबार= Business, Trade, affair
महज़= Merely, Only
कसरत= Exercise
ज़बानी= Oral, Verbal
तजरबे= Experiences,
सबक़= Lesson
इस्लाह= Correction, Reform
अल्फ़ाज़= Words
स्याही= Ink
बेहतर= Better

नाम-ए-फ़राज़= Name of Faraaz (In respect of the great Urdu poet Ahmed Faraz Sir)

रविवार, 4 मार्च 2018

!!! नाम-ए-फ़राज़ !!!

बहुत एहतियात से ख़यालों को चुनता हूँ मैं,
नाम-ए-फ़राज़ के भी कुछ आदाब हुआ करते हैं !

ख़ुदा की क़ुदरत को कभी ग़ौर से देखिये,
ज़र्रे-ज़र्रे में छुपे आफ़ताब हुआ करते हैं !

ऐलान किया करती है हर एक मंज़िल,
कोशिश करने वाले ही कामयाब हुआ करते हैं !

ख़ुदा ही जाने कि रूह से क्या तक़ाज़े होंगे, 
हमसे तो ज़िन्दगी के भी हिसाब हुआ करते हैं !

ज़िन्दगी सो कर गुज़ार दें, जो तेरा ख़्वाब मिले, 
ख़्वाबों ही में मुकम्मल कुछ ख़्वाब हुआ करते हैं !

ये दो जहाँ की फ़िक्रें हों आपको मुबारक,
हम तो फ़ाक़ा-मस्ती में ही सैराब हुआ करते हैं !

कांटो से नफ़रत करने वाले ये क्यूँ भूल जाते हैं,
कि काँटों की हिफ़ाज़त में ही गुलाब हुआ करते हैं !

कभी 'फ़राज़' की ग़ज़ल को पढ़कर देखो,
शोरफ़ा किस तरह बेनक़ाब हुआ करते हैं !

||| फ़राज़ |||

एहतियात= Care, Caution, Precaution
ख़याल= Thought
नाम-ए-फ़राज़= Name Of Faraz (Referring to the legendry Urdu Poet To Ahmad Faraz)
आदाब= Etiquettes, Manners
ख़ुदा= God.
क़ुदरत= The Universe, Creation
ग़ौर= Deep Thought, Reflection, Deliberation
ज़र्रे-ज़र्रे= Atom, Particles.
आफ़ताब= The Sun
ऐलान= Announcement, Proclamation
मंज़िल= Destination
कोशिश= Effort, Attempt, Endeavour, Try
कामयाब= Successful
रूह= Soul, Spirit, The Vital Principle
तक़ाज़े= Demands, Pressing Settlements, Urges.
हिसाब= Computation, Calculation, Account
गुज़ार= To Pass
ख़्वाब= Dream
मुकम्मल= Complete
जहाँ= World, Universe
फ़िक्रें= Worries, Thoughts
मुबारक= Auspicious, Congratulation
फ़ाक़ा-मस्ती= Cheerfulness In Adversity
सैराब= Fulfilled
नफ़रत= Hate
हिफ़ाज़त= Guarding, Preserving, Custody, Protection
शोरफ़ा= Nobles, Gentlemen
बेनक़ाब= Unveiled, Unmask