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रविवार, 4 मार्च 2018

!!! नाम-ए-फ़राज़ !!!

बहुत एहतियात से ख़यालों को चुनता हूँ मैं,
नाम-ए-फ़राज़ के भी कुछ आदाब हुआ करते हैं !

ख़ुदा की क़ुदरत को कभी ग़ौर से देखिये,
ज़र्रे-ज़र्रे में छुपे आफ़ताब हुआ करते हैं !

ऐलान किया करती है हर एक मंज़िल,
कोशिश करने वाले ही कामयाब हुआ करते हैं !

ख़ुदा ही जाने कि रूह से क्या तक़ाज़े होंगे, 
हमसे तो ज़िन्दगी के भी हिसाब हुआ करते हैं !

ज़िन्दगी सो कर गुज़ार दें, जो तेरा ख़्वाब मिले, 
ख़्वाबों ही में मुकम्मल कुछ ख़्वाब हुआ करते हैं !

ये दो जहाँ की फ़िक्रें हों आपको मुबारक,
हम तो फ़ाक़ा-मस्ती में ही सैराब हुआ करते हैं !

कांटो से नफ़रत करने वाले ये क्यूँ भूल जाते हैं,
कि काँटों की हिफ़ाज़त में ही गुलाब हुआ करते हैं !

कभी 'फ़राज़' की ग़ज़ल को पढ़कर देखो,
शोरफ़ा किस तरह बेनक़ाब हुआ करते हैं !

||| फ़राज़ |||

एहतियात= Care, Caution, Precaution
ख़याल= Thought
नाम-ए-फ़राज़= Name Of Faraz (Referring to the legendry Urdu Poet To Ahmad Faraz)
आदाब= Etiquettes, Manners
ख़ुदा= God.
क़ुदरत= The Universe, Creation
ग़ौर= Deep Thought, Reflection, Deliberation
ज़र्रे-ज़र्रे= Atom, Particles.
आफ़ताब= The Sun
ऐलान= Announcement, Proclamation
मंज़िल= Destination
कोशिश= Effort, Attempt, Endeavour, Try
कामयाब= Successful
रूह= Soul, Spirit, The Vital Principle
तक़ाज़े= Demands, Pressing Settlements, Urges.
हिसाब= Computation, Calculation, Account
गुज़ार= To Pass
ख़्वाब= Dream
मुकम्मल= Complete
जहाँ= World, Universe
फ़िक्रें= Worries, Thoughts
मुबारक= Auspicious, Congratulation
फ़ाक़ा-मस्ती= Cheerfulness In Adversity
सैराब= Fulfilled
नफ़रत= Hate
हिफ़ाज़त= Guarding, Preserving, Custody, Protection
शोरफ़ा= Nobles, Gentlemen
बेनक़ाब= Unveiled, Unmask






मंगलवार, 2 जनवरी 2018

दुआ !!!

'फ़राज़' अपने किसी ऐब को तू क़ज़ा कर दे,
साल नया आया है, तू भी कुछ नया कर दे !

ख़ुदारा तू हसरतें मेरी मुख़्तसर कर दे,
या फ़िर मेरी चादर को तू बड़ा कर दे !

अपनी ख़्वाहिश की ग़ुलामी करता हूँ मैं,
नफ़्स की क़ैद से तू मुझे रिहा कर दे !

मुझको चाहत नहीं फ़रिश्ता बनने की,
ख़ुदारा, मुझको तो बस तू इंसाँ कर दे !

सोचता हूँ कि शायद कोई शोरफ़ा न रहे,
गर ख़ुदा दीवारों को लब-कुशा कर दे !

बातिन का कोई इल्म तो नहीं है मुझको,
या मुझे ख़्वाब न दे, या ताबीरदां कर दे !

तेरे लहू की तासीर भी ज़माना देखेगा,
अपने हुनर को तू रगों में रवां कर दे !

कभी ग़ालिब ने लिखा, अब 'फ़राज़' लिखता है
इश्क़ इतना न कीजिये, जो निकम्मा कर दे !

||| फ़राज़ |||

क़ज़ा= Death.
ऐब= Defect, Vice, Imperfection.
हसरत= Desire.
मुख़्तसर= Brief, Concise.
ख़्वाहिश= Wish, Desire, Will.
ग़ुलामी= Slavery, Servitude,
नफ़्स= Soul, Spirit, Self.
फ़रिश्ता= Angel
इंसाँ= Human.
शोरफ़ा= Gentlemen, Noble.
लब-कुशा= Opened lip, One who can speak.
बातिन= Concealed, Covert, Unapparent.
इल्म= Knowledge
ताबीरदां= One who interprets the dream.
लहू= Blood.
तासीर= Effect, Influence, Impression.
रग= Vein, Artery, Nerve.
रवां= Moving, Active, Life.