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सोमवार, 10 जून 2019

पागल


तकलीफ़न कोई हलचल है,
शायद अब दर्द मुसलसल है !

अब उसके बिना अधूरा हूँ,
अब मेरा इश्क़ मुकम्मल है !

ये कह के उसने ठुकराया,
शायर हैशायद पागल है !

दिखती है क़त्ल की तैयारी,
उनकी आँखों में काजल है !

कुछ अब भी गुज़रा करता है
,
हाँलाकि वो गुज़रा कल है !

तहज़ीब ही उनका गहना है,
वो जिनके सर पे आँचल है !

जीने की अज़ीयत क्या जाने,
जिनके बिस्तर में मख़मल है !

सच्चाई की
जाँ को ख़तरा है,
'अल्फ़ाज़शहर अब मक़्तल है !

||| अल्फ़ाज़ |||

तकलीफ़ = Trouble, Difficulty, कष्टपीड़ा
हलचल = Tumult, Turmoil, कोलाहल
मुसलसल  = Regular, Successive, लगातार, जारी
मुकम्मल  = Perfect, Complete, सम्पूर्णपूर्णतयः
क़त्ल = Murder, हत्या
अज़ीयत = Trouble, Suffering, कष्ट
मख़मल = Velvet
तहज़ीब = Politeness, Civilization, सभ्यता
आँचल = Veil, दुपट्टा
जाँ = life, existence, जीवन
मक़्तल = A Place Of Slaughter Or Execution, वधशाला

सोमवार, 25 फ़रवरी 2019

सफ़र

मंज़िल को छोड़ करके हम सफ़र में आ गए,
घर लौट न सके जब से हम शहर में आ गए !

हम घर कभी मुकम्मल लौटे ही कहाँ हैं,
दफ़्तर का काम ले के हम घर में आ गए !

सजदे में भी सोचा किए दुनिया के काम-काज,
मस्जिद तलक तो अल्लाह के डर में आ गए !

करते हैं सफ़र रोज़ कहीं न पहुँचने का,
सफ़र हम में आ गया, हम सफ़र में आ गए !

पढ़ता है कौन इन दिनों अच्छाई की ख़बर,
जितने ग़लत थे वो सभी ख़बर में आ गए !

वही लोग कि जो काटते थे रात दिन शजर,
धूप में जले तो साया-ए-शजर में आ गए !

कोई चल न सका दूर तलक साथ में मेरे,
मंज़िल से पहले मोड़ रहगुज़र में आ गए !

किस-किस अदा की आपकी तारीफ़ मैं करूँ,
तमाम दरिया सिमट के समंदर में आ गए !

कुछ तो अलग सी बात है
 'अल्फ़ाज़में मेरे,
यूँ ही नहीं हम आपकी नज़र में आ गए !

||| अल्फ़ाज़ |||

सफ़र = Journey, Voyage, Travel, यात्रा
मुकम्मल = Perfect, Complete सम्पूर्ण, पूर्णतयः
दफ़्तर = Office, Department, कार्यालय
सजदे = Prayers, To Kneel And Touch One's Forehead To The Ground, TO Bow प्रार्थना
काम-काज = Work, Occupation, Activity
मस्जिद = Mosque
तलक = Till, तक
शजर = Tree पेड़, वृक्ष
साया-ए-शजर = Shadow/ Shade/ Protection Of The Tree पेड़/वृक्ष की छाया
रहगुज़र = Road, Path, रास्ता, पथ, मार्ग
अदा = Coquetry, Gesture, 
तारीफ़ = Praise प्रशंसा
तमाम = Entire, All, सब
दरिया = River नदी
नज़र = Vision, Favour 

शनिवार, 25 अगस्त 2018

तफ़्सील


सवालों को यूँ हल कर देता हूँ,
ख़यालों को ग़ज़ल कर देता हूँ !

दुनिया से जो मैंने सीखा है,
काग़ज़ पे नक़्ल कर देता हूँ

ठोकर की तराशों से ख़ुद को,
मैं ताजमहल कर देता हूँ !

किरदार चराग़ सा है मेरा,
एक नूर मैं जल कर देता हूँ !

होता है वही जो लिखा है,
मैं तो बस अमल कर देता हूँ !

हक़ बात पे क़ाएम रहता हूँ,
तजवीज़ संभल कर देता हूँ !

'फ़राज़मैं हूँ एक आईना,
तफ़्सील मुकम्मल देता हूँ !

||| फ़राज़ |||

सवाल= Questions, Query
ख़याल= Thought
काग़ज़= Paper
नक़्ल= Narrative, Copying,
ठोकर= Obstacle, Kick, Stumble
तराश= Chisel, Carver
किरदार= Character, 
चराग़= An Oil Lamp
नूर= Light, Splendour
अमल= Act
हक़= Truth
क़ाएम= Stay, Permanence
तजवीज़= Suggestion
आईना= The Mirror
तफ़्सील =  Detail, Analysis
मुकम्मल= Complete, Perfect

सोमवार, 20 अगस्त 2018

हालात


मैं भी तो जीना सीख गया,
हालाततुम्हारा शुक्रिया !

मैं ख़ुद ही ख़ुद का चारागर,
मैं ख़ुद ही ख़ुद का कीमिया !

लोगों से उम्मीद कम ही रखी,
जो करना था, वो ख़ुद किया !

मैं गुनाहगार किस बात का हूँ,
क़िस्मत में जो थावो किया !

अब दिल से कम ही सोचता हूँ,
कम करता हूँ मन-मर्ज़ियाँ !

मुझपर यक़ीन न इतना कर,
मेरी भी हैं ख़ुदग़र्ज़ियाँ !

अब उतनी मीठी नहीं रहीं,
वो रंग-बिरंगी टॉफ़ियाँ !

दो रोटी का सवाल अब भी है,
घर में रखी हैं डिग्रियाँ !

अभी याद ज़रा वो मुझको है,
अभी और पिला दे साक़िया !

'फ़राज़एक ग़ज़ल अधूरी सी,
तू एक मुकम्मल क़ाफ़िया !

||| फ़राज़ |||

हालात= State, Condition, Circumstances,
शुक्रिया= Thanks
चारागर= Cure-Provider, Doctor
कीमिया= Alchemist
उम्मीद= Hope
गुनाहगार= Sinner, Guilty, Criminal, Culprit
मन-मर्ज़ियां = Heart’s Desires
यक़ीन= Trust
ख़ुदग़र्ज़ियाँ= Selfishness 
डिग्रियाँ= Degrees
साक़िया = Bar-Tender
मुकम्मल= Complete, Perfect
क़ाफ़िया= Rhyme, The Last Or Second Last Words Of Each Verse Is Called Qaafiyaa

सोमवार, 6 अगस्त 2018

ज़िन्दगी !!!

तू जीता क्यूँ गुज़रे कल में है,
ज़िन्दगी तो बस इस पल में है !

नज़र बा-अदब ये सोच के झुक जाती है,
कि उसकी इज़्ज़त भी छुपी आँचल में है !

दो किरदार किस तरह वो जी लेता है,
ज़बां पे यारी, छुरी उसकी बग़ल में है !

चलो मिलें हम फ़िर से अजनबी बन कर,
अधूरेपन सा लुत्फ़ कहाँ मुकम्मल में है !

नशा भी किरदार के मुताबिक़ होता है,
सच की एक दवा भी इस बोतल में है !

तन्हाई भी मुकम्मल मयस्सर नहीं होती,
जिस्म तो एक जिस्मों के जंगल में है !

यूँ तो हर मौत का लम्हा मुक़र्रर है,
जी ले कि ज़िन्दगी तो हर एक पल में है

यक़ीन कर कि ना-मुमकिन कुछ भी नहीं,
'फ़राज़मुश्किल तो महज़ पहल में है !

||| फ़राज़ |||

बा-अदब= Respectfully, With Due Respect.
इज़्ज़त= Respect, Esteem, Honor, Glory
किरदार= Character
ज़बां= Tongue, Speech
बग़ल= Armpit, Side
लुत्फ़= Pleasure, Enjoyment
मुकम्मल= Complete, Perfect
मुताबिक़= Like, Suitable, In Accordance
तन्हाई= Loneliness, Solitude
मयस्सर= Available
मुक़र्रर= Fixed
यक़ीन= Certainty, Truth, Confidence, Trust 
ना-मुमकिन= Impossible
मुश्किल= Difficulty
महज़= Only, Merely
पहल= Beginning, First Initiative.