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शनिवार, 6 अप्रैल 2019

कश्मकश

सच की कोई भी ऐसी दवाई नहीं,
मयकशी में कोई भी बुराई नहीं !

ज़्यादा अच्छा भी होना है होता बुरा,
कुछ बुराई में कोई बुराई नहीं !

ठोकरोंतजरबेऔर कुछ एक सबक़,
और कुछ उम्र भर की कमाई नहीं !

सर्दियों का सितम उनसे पूछो जहाँ,
है अलाव नहींहै रज़ाई नहीं !

ये जो है अजनबीये था कहता कभी,
मौत मंज़ूर है पर जुदाई नहीं !

जाते-जाते वो मेरी हंसी ले गया,
ज़िन्दगी फ़िर कभी मुस्कुराई नहीं !

तेरे बिन ज़िन्दगी कश्मकश में कटी,
जिंदा रह न सकेमौत आई नहीं !

वो ग़ज़ल जिसको 'अल्फ़ाज़मिल न सके,
रोज़ सोचा किएपर सुनाई नहीं !

||| अल्फ़ाज़ |||

मयकशी = Boozing, मदिरापान
तजरबे = Experiences, अनुभव
सबक़ = Lesson, पाठ, सीख
सितम = Oppression, Outrage, Injustice, Tyranny, अत्याचार
अलाव = Bonfire, Campfire
रज़ाई = Quilt
मंज़ूर = Admired, Accepted, स्वीकार
कश्मकश = Struggle, Wrangle, Tussle, खेंच-तान, संघर्ष

रविवार, 6 जनवरी 2019

फ़ातिहा !

फ़ातिहा सब हो मेरा, ज़ख़्म अभी हरे थे,
वो आये न जनाज़े परजिनके लिए मरे थे !

सबकुछ उन्हें पता हैपर हाल पूछते हैं,
लगते हैं अजनबी सेवो जो कभी मेरे थे !

हमको तो डर था ये कि कैसे जियेंगे तन्हा,
उतना नहीं है मुश्किलजितना कि हम डरे थे !

यूँ तो नहीं हैं बाक़ीउतने भी ज़ख़्म दिल में,
पर वक़्त के मरहम से सब ज़ख़्म कब भरे थे !

इक हाथ न बढ़ाया मेरी तरफ मदद को,
लोगों के थे बहानेलोगों के मशवरे थे !

मेरी क़सम की अब तकतुझपे उधारियाँ हैं,
तू कर हिसाब उनकावादे वो जो तेरे थे !

दो गज़ कफ़न के पर्दे में छुप गई है इज्ज़त,
मर कर हुए हैं अच्छेज़िन्दा थे तो बुरे थे !

इस दौर में मोहब्बतहै जिस्म की ज़रुरत,
जो इश्क़ कर गये थेवो लोग दूसरे थे !

सारा क़ुसूर न दो 'अल्फ़ाज़तुम हुस्न को,
हम भी तो इश्क़ में कुछ ज़्यादा ही सर-फिरे थे !

||| अल्फ़ाज़ |||

फ़ातिहा = Recitation Of Certain Suras Of The Holy Qur'aan For The Peace Of Departed Soul. 
ज़ख़्म = Wound (घाव)
जनाज़ा = Bier, Funeral (अंत्येष्टि, अंतिम संस्कार)
तन्हा = Lonely, Alone (अकेला)
तरफ़ = Side, Towards (ओर, दिशा)
मदद = Help (सहायता)
बहाना = Excuse, Pretext, Pretence
मशवरे = Suggestion, Advice (सलाह, परामर्श)
क़सम = An Oath (सौगंध)
उधारियाँ = Debts, Debts (ऋण)
कफ़न = Shroud, Cloth To Cover The Corpse
हुस्न = Beauty, Elegance, Comeliness (सुन्दरता, सौंदर्य)
सर-फिरे = Crazy

सोमवार, 6 अगस्त 2018

ज़िन्दगी !!!

तू जीता क्यूँ गुज़रे कल में है,
ज़िन्दगी तो बस इस पल में है !

नज़र बा-अदब ये सोच के झुक जाती है,
कि उसकी इज़्ज़त भी छुपी आँचल में है !

दो किरदार किस तरह वो जी लेता है,
ज़बां पे यारी, छुरी उसकी बग़ल में है !

चलो मिलें हम फ़िर से अजनबी बन कर,
अधूरेपन सा लुत्फ़ कहाँ मुकम्मल में है !

नशा भी किरदार के मुताबिक़ होता है,
सच की एक दवा भी इस बोतल में है !

तन्हाई भी मुकम्मल मयस्सर नहीं होती,
जिस्म तो एक जिस्मों के जंगल में है !

यूँ तो हर मौत का लम्हा मुक़र्रर है,
जी ले कि ज़िन्दगी तो हर एक पल में है

यक़ीन कर कि ना-मुमकिन कुछ भी नहीं,
'फ़राज़मुश्किल तो महज़ पहल में है !

||| फ़राज़ |||

बा-अदब= Respectfully, With Due Respect.
इज़्ज़त= Respect, Esteem, Honor, Glory
किरदार= Character
ज़बां= Tongue, Speech
बग़ल= Armpit, Side
लुत्फ़= Pleasure, Enjoyment
मुकम्मल= Complete, Perfect
मुताबिक़= Like, Suitable, In Accordance
तन्हाई= Loneliness, Solitude
मयस्सर= Available
मुक़र्रर= Fixed
यक़ीन= Certainty, Truth, Confidence, Trust 
ना-मुमकिन= Impossible
मुश्किल= Difficulty
महज़= Only, Merely
पहल= Beginning, First Initiative.

बुधवार, 28 फ़रवरी 2018

!!! रंग-ए-हिना !!!

रंग-ए-हिना तो वही रहता है लेकिन,
नक्श-ए-हिना में क्यूँ नाम बदल जाते हैं !

पहचानी सी लिखावटअजनबी सा मज़मून,
कि हाल न पूछिये जब पैग़ाम बदल जाते हैं !

 ग़म-ए-यार, कभी तू भी बदल के मिल,
फ़िलहाल तो बस साकी-ओ-जाम बदल जाते हैं !

मैं कब तलक बेगुनाही के सबूत देता रहूँ,
हर दफ़ा मुझपर इल्ज़ाम बदल जाते हैं !

राज़-ए-हस्ती उनको बताया तो ये सीखा हमने,
राज़ खुलते हैं तो आदाब-ए-एहतराम बदल जाते हैं !

तू नुमाईश न कर अपने दिल के टुकड़ों की,
टूटी-फूटी चीज़ों के तो दाम बदल जाते हैं !

बेशक दुश्मनों से भी सलाम-दुआ रखनी चाहिए,
जब हुकूमत बदलती है तो निज़ाम बदल जाते हैं !

मंज़िल-ए-मक़्सूद नहीं मिलती इश्क़वालों को,
कभी मीरा बदल जाती है, कभी श्याम बदल जाते हैं !

मैंने भी कभी किसीको ख़ुदा माना था 'फ़राज़',
इश्क़ में तो ख़ुदाओं के भी मक़ाम बदल जाते हैं !

||| फ़राज़ |||
रंग-ए-हिना= Color/Complexion Of Henna.
नक्श-ए-हिना= Design/Impression Of Henna
अजनबी= Stranger, Unknown
मज़मून= Composition, Subject Matter.
हाल= Condition
पैग़ाम= Message
ग़म-ए-यार= Sorrow Of Beloved
फ़िलहाल= As Of Now, At Present
साकी-ओ-जाम= One Who Serves Wine And Glass Of Wine 
बेगुनाही= Innocence, Without Sin.
सबूत= Evidence.
दफ़ा= Time
साबित= Prove
इल्ज़ाम= Blame Accusation.
राज़-ए-दिल= Secret Of The Heart
आदाब-ए-एहतराम= Manner/Etiquette Of Respect.
नुमाईश= Show, Display, Exhibition.
टूटी-फूटी= Broken, Shattered
चीज़= Thing
बेशक= Doubtless
सलाम-दुआ= Hi-Hello, Formality.
हुकूमत= Government, Dominion
निज़ाम= System, Order
मंज़िल-ए-मक़्सूद= Destination, The Goal, Aim
इश्क़वाले= Lovers, Love-Birds
ख़ुदा= God
इश्क़= Love

मक़ाम= Position, Place

मंगलवार, 23 मई 2017

ज़िन्दगी !!!

कभी भागती
कभी थमी-थमी सी लगती है !
ज़िन्दगी आजकल
अजनबी सी लगती है !

दिल ने आज
तेरी उम्मीद छोड़ दी शायद !
सांस भी ज़रा
थमी-थमी सी लगती है !

तेरे ख़याल आज
धुंधले- धुंधले से लगते हैं !
तेरी तस्वीर आज
लाज़मी सी लगती है !

वक़्त शायद
बहुत तेज़ गुज़रा होगा !
घड़ियाँ दीवार पर
थकी-थकी सी लगती है !

तूने जाते हुए
आज न मुड़कर देखा !
ये मुलाक़ात शायद
आख़िरी सी लगती है !

देर कर दी
तूने आने में फ़राज़’,
अपनी सी वो निगाह
अब अजनबी सी लगती है !

||| फ़राज़ |||


लाज़मी = compulsory, essential

रविवार, 7 मई 2017

बचपन !!!

भरा है बटुआ पर मुफ़्लिसी नहीं जाती,
फोड़ कर गुल्लक अमीर हो जाया करते थे !
जाने अब क्यूँ अजनबी से लगते हैं सितारे,
गिन-गिन कर जिनको हम रात बिताया करते थे !

एक पेंसिल के दो टुकड़े कर देते थे,
मासूम दोस्ती कुछ यूँ निभाया करते थे !
जाने कब चुक गईं वो टॉफियाँ, जो तुम्हारे साथ,
दांत से काट कर आधी-आधी खाया करते थे !

इन दानिशवरों से वो नादान थे बेहतर,
रूठने पर जो हमको मनाया करते थे !
तरक्की की रफ़्तार में सूख गई वो बहती नदी,
स्कूल से भाग कर जिसमें नहाया करते थे !

सुनते हैं अब वहां कोई पेड़ नहीं बचा,
आम जिस बाग़ से हम चुराया करते थे !
मेरे हाथों का सहारा अब वो ढूढ़ते हैं,
जिनकी ऊँगली पकड़कर हम स्कूल जाया करते !

||| फ़राज़ |||


बटुआ= Wallet
मुफ़्लिसी= Poverty
गुल्लक= Piggy bank
अमीर= Rich
दानिशवर= Scholar, Intellectual.
नादान= Innocent
तरक्की= Development
बाग़= Garden