भरा है बटुआ पर मुफ़्लिसी नहीं जाती,
फोड़ कर गुल्लक अमीर हो जाया करते थे !
जाने अब क्यूँ अजनबी से लगते हैं
सितारे,
गिन-गिन कर जिनको हम रात बिताया करते
थे !
एक पेंसिल के दो टुकड़े कर देते थे,
मासूम दोस्ती कुछ यूँ निभाया करते थे
!
जाने कब चुक गईं वो टॉफियाँ, जो तुम्हारे
साथ,
दांत से काट कर आधी-आधी खाया करते थे
!
इन दानिशवरों से वो नादान थे बेहतर,
रूठने पर जो हमको मनाया करते थे !
तरक्की की रफ़्तार में सूख गई वो बहती नदी,
स्कूल से भाग कर जिसमें नहाया करते थे
!
सुनते हैं अब वहां कोई पेड़ नहीं बचा,
आम जिस बाग़ से हम चुराया करते थे !
मेरे हाथों का सहारा अब वो ढूढ़ते हैं,
जिनकी ऊँगली पकड़कर हम स्कूल जाया करते !
जिनकी ऊँगली पकड़कर हम स्कूल जाया करते !
||| फ़राज़ |||
बटुआ= Wallet
मुफ़्लिसी= Poverty
मुफ़्लिसी= Poverty
गुल्लक= Piggy bank
अमीर= Rich
अमीर= Rich
दानिशवर= Scholar, Intellectual.
नादान= Innocent
तरक्की= Development
बाग़= Garden
नादान= Innocent
तरक्की= Development
बाग़= Garden