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मंगलवार, 23 जनवरी 2018

तू बता !!!

मुझको भी ज़िद है ये कि, मैं वक़्त को बदल दूँ,
सूरज की र्दिशों की रफ़्तार तू बता !

फ़िर तेरी अंजुमन में, आया है ज़िक्र मेरा,
चर्चा है किस ख़ता का इस बार तू बता !

यूँ तो हैं सब बराबर, अल्लाह की नज़र में,
महँगा है क्यूँ रूपये से दीनार तू बता !

मुझको भी जाननी हैईमां की मेरे क़ीमत,
किस सम्त है ज़मीर का बाज़ार तू बता !

उस माँ की कोख में तो, बंटवारा न था कोई,
किसने उठाई घर में दीवार तू बता !

कभी मस्जिद के नाम पर, कभी मंदिर के नाम पर,
कब तक चुनेगा यूँही सरकार तू बता !

एक दिन ख़रीदने को, बिकता हूँ छः दिनों तक,
हफ़्ते में क्यूँ है एक ही इतवार तू बता !

पी कर के तू है कहता, कल से नहीं पियूँगा,,
क्यूँ है 'फ़राज़' इतना होशियार तू बता !

||| फ़राज़ |||

ज़िद= Insistence.
गर्दिश= Revolution, Circulation.
रफ़्तार= Speed, Behaviour, Manner
अंजुमन= Society, Party
ज़िक्र= Remembrance, Talk
चर्चा= Gossip, Rumor.
ख़ता= Mistake, Fault
रुपया= Indian Currency.
दीनार= Kuwaiti Currency.
ईमां= Conscience.
क़ीमत= Price, Value.
सम्त= Direction.
ज़मीर= Conscience.
बाज़ार= Market.

रविवार, 7 मई 2017

बचपन !!!

भरा है बटुआ पर मुफ़्लिसी नहीं जाती,
फोड़ कर गुल्लक अमीर हो जाया करते थे !
जाने अब क्यूँ अजनबी से लगते हैं सितारे,
गिन-गिन कर जिनको हम रात बिताया करते थे !

एक पेंसिल के दो टुकड़े कर देते थे,
मासूम दोस्ती कुछ यूँ निभाया करते थे !
जाने कब चुक गईं वो टॉफियाँ, जो तुम्हारे साथ,
दांत से काट कर आधी-आधी खाया करते थे !

इन दानिशवरों से वो नादान थे बेहतर,
रूठने पर जो हमको मनाया करते थे !
तरक्की की रफ़्तार में सूख गई वो बहती नदी,
स्कूल से भाग कर जिसमें नहाया करते थे !

सुनते हैं अब वहां कोई पेड़ नहीं बचा,
आम जिस बाग़ से हम चुराया करते थे !
मेरे हाथों का सहारा अब वो ढूढ़ते हैं,
जिनकी ऊँगली पकड़कर हम स्कूल जाया करते !

||| फ़राज़ |||


बटुआ= Wallet
मुफ़्लिसी= Poverty
गुल्लक= Piggy bank
अमीर= Rich
दानिशवर= Scholar, Intellectual.
नादान= Innocent
तरक्की= Development
बाग़= Garden