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शुक्रवार, 4 अगस्त 2017

सफ़र-ओ-क़याम

मंज़र भी बदल जाते हैं
रंग-ए-चट्टान बदल जाता है !
वक़्त जब करवट लेता है
तो हर इन्सान बदल जाता है !

एक उम्र से मुसाफ़िर हूँ
दरबदर  सच की तलाश में,
कभी मेरा ख़ुदा बदल जाता है
कभी मेरा ईमान बदल जाता है !

हर बार नए एक ज़हर से 
वो मुझको आज़माता है !
जब पीना सीख जाता हूँ तो
वो मेरा जाम बदल जाता है !

हर हमसफ़र करता है वादा
हर क़दम साथ निभाने का,
किसीका सफ़र बदल जाते हैं
किसीका क़याम बदल जाता है !

चिट्ठियां अब भी मिलती हैं
डाकिया अब भी इधर आता है,
तेरी उँगलियों की लिखावट में 
हर बार तेरा पैग़ाम बदल जाता है !

बहुत नाज़ था हमको वफ़ाओं पर
कि अब यकीं करें भी तो कैसे,
सुना है तेरी महफ़िल में अक्सर
तेरा मेहमान बदल जाता है !

वो नादान अपनी ख़ुदी में चूर है
ज़माने की रिवायतें नहीं जानता, 
जब फूल मुरझा जाता है 'फ़राज़'
तो उसका दाम बदल जाता है !

|||फ़राज़|||

क़याम= stay
ख़ुदी= egotism, pride, self-respect

रविवार, 7 मई 2017

बचपन !!!

भरा है बटुआ पर मुफ़्लिसी नहीं जाती,
फोड़ कर गुल्लक अमीर हो जाया करते थे !
जाने अब क्यूँ अजनबी से लगते हैं सितारे,
गिन-गिन कर जिनको हम रात बिताया करते थे !

एक पेंसिल के दो टुकड़े कर देते थे,
मासूम दोस्ती कुछ यूँ निभाया करते थे !
जाने कब चुक गईं वो टॉफियाँ, जो तुम्हारे साथ,
दांत से काट कर आधी-आधी खाया करते थे !

इन दानिशवरों से वो नादान थे बेहतर,
रूठने पर जो हमको मनाया करते थे !
तरक्की की रफ़्तार में सूख गई वो बहती नदी,
स्कूल से भाग कर जिसमें नहाया करते थे !

सुनते हैं अब वहां कोई पेड़ नहीं बचा,
आम जिस बाग़ से हम चुराया करते थे !
मेरे हाथों का सहारा अब वो ढूढ़ते हैं,
जिनकी ऊँगली पकड़कर हम स्कूल जाया करते !

||| फ़राज़ |||


बटुआ= Wallet
मुफ़्लिसी= Poverty
गुल्लक= Piggy bank
अमीर= Rich
दानिशवर= Scholar, Intellectual.
नादान= Innocent
तरक्की= Development
बाग़= Garden