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बुधवार, 8 मई 2019

इंसान


इंसान से रिश्ता हो जाए,
इंसान फ़रिश्ता हो जाए !

पहला ही क़दम बस मुश्किल है,
चल दो तो रास्ता हो जाए !

फ़िर ज़हन की एक नहीं चलती,
जब दिल वाबस्ता हो जाए !

दिल हार कभी न माने है,
पामालशिकस्ता हो जाए !

हर क़ीमत पर बिक जाता है,
ईमान जो सस्ता हो जाए !

कब लौट के वापस आया है,
जो वक़्त गुज़िश्ता हो जाए !

ये सोच के उसने छोड़ दिया,
शायद कभी सस्ता हो जाए !

वो मिल जाए 'अल्फाज़अगर,
तो ग़ज़ल का मक़्ता हो जाए !

||| अल्फ़ाज़ |||

फ़रिश्ता = An Angel, देवदूत
क़दम = Step, Footstep 
ज़हन = Mind, मस्तिष्क
वाबस्ता = Bound Together, Connected, संबद्ध, संलग्न
पामाल = Ruined, Trampled, नष्ट, तबाह
शिकस्ता = Broken, Defeated, टूटा हुआ, भग्न, खंडित,
क़ीमत = Price, Cost, मूल्य 
गुज़िश्ता = Past, Elapsed, अतीत, बीता हुआ
मक़्ता = The Last Verse Of A Poem, ग़ज़ल का अंतिम छंद

शुक्रवार, 4 अगस्त 2017

सफ़र-ओ-क़याम

मंज़र भी बदल जाते हैं
रंग-ए-चट्टान बदल जाता है !
वक़्त जब करवट लेता है
तो हर इन्सान बदल जाता है !

एक उम्र से मुसाफ़िर हूँ
दरबदर  सच की तलाश में,
कभी मेरा ख़ुदा बदल जाता है
कभी मेरा ईमान बदल जाता है !

हर बार नए एक ज़हर से 
वो मुझको आज़माता है !
जब पीना सीख जाता हूँ तो
वो मेरा जाम बदल जाता है !

हर हमसफ़र करता है वादा
हर क़दम साथ निभाने का,
किसीका सफ़र बदल जाते हैं
किसीका क़याम बदल जाता है !

चिट्ठियां अब भी मिलती हैं
डाकिया अब भी इधर आता है,
तेरी उँगलियों की लिखावट में 
हर बार तेरा पैग़ाम बदल जाता है !

बहुत नाज़ था हमको वफ़ाओं पर
कि अब यकीं करें भी तो कैसे,
सुना है तेरी महफ़िल में अक्सर
तेरा मेहमान बदल जाता है !

वो नादान अपनी ख़ुदी में चूर है
ज़माने की रिवायतें नहीं जानता, 
जब फूल मुरझा जाता है 'फ़राज़'
तो उसका दाम बदल जाता है !

|||फ़राज़|||

क़याम= stay
ख़ुदी= egotism, pride, self-respect