दूर
सही, एक मंज़िल है,
धुंधला ही सही, एक साहिल है !
कुछ भी नहीं है नामुमकिन,
एक राह ज़रा सी मुश्किल है !
दुनिया की फ़िक्र में ऐ इंसाँ,
तू ख़ुद से क्यूँ इतना ग़ाफ़िल है !
मत हार,
लड़ाई बाक़ी है,
जीता न सही, तू क़ाबिल है !
चादर में समेटो पैरों को,
क़िस्मत में था जितना, हासिल है !
जहाँ कोई क़दम न पहुँचा हो,
‘फ़राज़’ की
वही तो मंज़िल है !
||| फ़राज़ |||
मंज़िल= Stage,
Destination
साहिल= The
Sea-Shore, Coast, Beach
नामुमकिन= Impossible
फ़िक्र= Concern, Thought
इंसाँ= Human,
Mankind
ग़ाफ़िल= Negligent, Oblivious
क़ाबिल= Able, Competent, Deserving
हासिल= Gain, Profit