सोमवार, 3 सितंबर 2018

मंज़िल


दूर सही, एक मंज़िल है,
धुंधला ही सही, एक साहिल है !

कुछ भी नहीं है नामुमकिन,
एक राह ज़रा सी मुश्किल है !

दुनिया की फ़िक्र में ऐ इंसाँ,
तू ख़ुद से क्यूँ इतना ग़ाफ़िल है !

मत हार, लड़ाई बाक़ी है,
जीता न सही, तू क़ाबिल है !

चादर में समेटो पैरों को,
क़िस्मत में था जितनाहासिल है !

जहाँ कोई क़दम न पहुँचा हो,
फ़राज़की वही तो मंज़िल है !

||| फ़राज़ |||

मंज़िल= Stage, Destination
साहिल= The Sea-Shore, Coast, Beach
नामुमकिन= Impossible
फ़िक्र= Concern, Thought
इंसाँ= Human, Mankind
ग़ाफ़िल= Negligent, Oblivious
क़ाबिल= Able, Competent, Deserving
हासिल= Gain, Profit

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