सोचता हूँ कि कितना नफ़ा होता,
अगर तेरी तरह मैं भी बेवफ़ा होता !
तुझको भी कोई मेरी ख़बर देता,
काश ज़ख़्म तेरा भी कोई हरा होता !
मेरे दिल को भी कुछ तसल्ली होती,
काश तेरा भी दिल कभी दुखा होता !
तुझको भी किये की सज़ा मिलती,
काश तेरा भी कोई ख़ुदा होता !
इश्क़, दर्द, सुकून और मलाल,
दिल-ए-नाकाम में कुछ तो बचा होता !
ज़ख़्म न देते मगर मिलते तो सही,
ज़ख़्म पुराना ही कोई हरा होता !
मेरी अच्छाई अक्सर ये तलब करती है,
‘फ़राज़’ मैं भी उनकी तरह बुरा होता !
||| फ़राज़ |||
नफ़ा= profit
बेवफ़ा= unfaithful, treacherous
तसल्ली= ease
सुकून= peace, tranquillity
मलाल= regression
दिल-ए-नाकाम= lost heart
तलब= urge
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