नहीं सुनता मैं अब दिल की, स्याना हो गया हूँ
मैं,
इसी
दिल में तो मुझको इश्क़ की चाहत में डाला था !
ज़हन ने लाख रोका
था, दिल-ए-फ़ित्ना सुनता था,
दिल-ए-फ़ित्ना ही था जिसने
हमें उल्फ़त में डाला था
!
क्यूँ
दें इल्ज़ाम हम इन्सान को फ़ितनापरस्ती का,
पहल
फ़ित्ना तो इब्लीस ने जन्नत में डाला था
!
सबब
हैरानियों का था तेरा पहले-पहल मिलना,
तेरे
ही रुख़ बदलने ने
मुझे हैरत में डाला था
!
तेरे
ही इश्क़ ने हमको बराह-ए-रास्त दिखलाई,
तेरे
ही फ़िराक़ ने हमको बुरी सोहबत में डाला था
!
जगा
करते थे रातों को,
गिना
करते थे हम तारे,
तेरे
ही इश्क़ ने हमको अजब कसरत में डाला था
!
वो
एक दरिया जो ज़रिया था मेरी हर एक तसल्ली का,
उस
ही दरिया ने हमको
प्यास की शिद्दत में डाला था
!
जवाब
बनके हैं लौटे 'फ़राज़' काग़ज़ के वो पुर्ज़े,
जो ख़त
इज़्हार-ए-इश्क़ की हसरत में डाला था !
||| फ़राज़ |||
स्याना=
Wise, Clever, Shrewd
ज़हन= Mind
दिल-ए-फ़ित्ना=
Tempted Heart
उल्फ़त=
Love Affection
इल्ज़ाम=
Blame,
फ़ितनापरस्ती=
Worshiping of
temptation.
पहल= Begining, First,
Initiative.
फ़ित्ना=
Temptation
इब्लीस=
Satan, The Devil.
जन्नत=
Heaven, Paradise.
सबब= Cause, Reason.
हैरानियां=
Amazements,
Astonishments, Wonders.
पहले-पहल=
Initially, Firstly,
Begining.
रुख़= Appearance, Face,
Direction.
हैरत= Astonishment,
Wonder.
बराह-ए-रास्त= Directing/ Guiding path. The Right Way.
फ़िराक़=
Separation, Absence,
Departing.
सोहबत=
Company, Asociation.
अजब= Strange
कसरत= Exercise
दरिया=
River.
ज़रिया=
Source
तसल्ली=
Solace
शिद्दत=
Vehemence, Severity.
काग़ज़= Paper.
पुर्ज़े=
Shreds, Pieces.
ख़त= Letter
इज़्हार-ए-इश्क़=
To express love.
हसरत= Desire.