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मंगलवार, 18 सितंबर 2018

दिल-ए-नाकाम

सोचता हूँ कि कितना नफ़ा होता,
अगर तेरी तरह मैं भी बेवफ़ा होता !

तुझको भी कोई मेरी ख़बर देता,
काश ज़ख़्म तेरा भी कोई हरा होता !

मेरे दिल को भी कुछ तसल्ली होती,
काश तेरा भी दिल कभी दुखा होता !

तुझको भी किये की सज़ा मिलती,
काश तेरा भी कोई ख़ुदा होता !

इश्क़, दर्द, सुकून और मलाल,
दिल-ए-नाकाम में कुछ तो बचा होता !

ज़ख़्म न देते मगर मिलते तो सही,
ज़ख़्म पुराना ही कोई हरा होता !

मेरी अच्छाई अक्सर ये तलब करती है,
‘फ़राज़’ मैं भी उनकी तरह बुरा होता !

||| फ़राज़ |||

नफ़ा= profit
बेवफ़ा= unfaithful, treacherous
तसल्ली= ease
सुकून= peace, tranquillity
मलाल= regression
दिल-ए-नाकाम= lost heart
तलब= urge

मंगलवार, 3 जुलाई 2018

तसल्ली !!!

महज़ कांटे ही महफ़ूज़ हैं इस ज़माने में,
फूल तो मसल जाते हैं राहों को सजाने में !

कभी अपनों की शिकायत ग़ैरों से कीजिये,
कोई पीछे न रहेगा आग लगाने में !

इतना महँगा भी नहीं है तसल्ली देना,
इतना ख़र्चा भी नहीं है मुस्कुराने में !

कोई अपना रूठ जाए तो उसे मना लेना,
एक उम्र लगती है रिश्तों को बनाने में !

नफ़रत अगर चाहिए तो मुफ़्त मिलेगी,
मगर प्यार ख़र्च होता है प्यार कमाने में !

इक़रार न सही तो इंकार ही सही,
कुछ तो हासिल होगा दिल आज़माने में !

तुझे याद तो महज़ इसलिए करता हूँ,
मुझे आराम मिलता है दिल जलाने में !

तेरी हसरत तो करता हूँज़िद नहीं करता,
कोई बुराई तो नहीं तुझे इस तरह चाहने में !

गुनाह तो तब है कि जब मयकशी की जाये,
कोई गुनाह नहीं 'फ़राज़मयकदे जाने में !

||| फ़राज़ |||

महज़ = Merely, Only
महफ़ूज़ = Safe
ज़माना = World, Era
शिकायत = Complaint, Lamentation
ग़ैर = Stranger, Rival, Outsider 
तसल्ली = Solace, Consolation, Comfort
ख़र्चा = Expense
नफ़रत = Hate
इक़रार = Consent, Pledge
इंकार = Denial, Refusal
हासिल = Gain, Result
आज़माना = Try, Test
हसरत = Desire
ज़िद = Insistence
गुनाह = Sin, Crime, Fault
मयकशी = Boozing, To Drink
मयकदे= Bar, Tavern

गुरुवार, 28 जून 2018

ज़िन्दगी !!!

ज़िन्दगी को ऐ दोस्त, इस तरह जीना होगा,
ये दवा हो या ज़हर, इसे हंस के पीना होगा !

लोगों की तसल्ली से तसल्ली न मिलेगी,
ज़ख्म तेरे अपने हैं, तुझे ख़ुद ही सीना होगा !

शायरी का सबब पूछिये तो महज़ इतना है,
एहसास-बयानी का मख़्सूस क़रीना होगा !

आँखों से बह गए तो क़ीमत न रहेगी,
ये तअ'ल्लुक़ के अश्क़ हैं, इन्हें पीना होगा !

साहिल पे खड़े हो के यूँ न देख तमाशा,
मझधार में कभी तेरा भी सफ़ीना होगा !

शायद तभी होगी शिफ़ा मेरे ग़मों की,
जब मेरी निगाहों में पैकर मदीना होगा !

मेरा दर्द मुझे बताता है कि मैं जिंदा हूँ अभी,
कैसे जियूँगा 'फ़राज़' अगर दर्द ही न होगा !

||| फ़राज़ |||

तसल्ली= Solace, Consolation
सबब= Cause, Reason
एहसास= Feeling
बयानी= Narratory
क़रीना= Manner, Method
तअ'ल्लुक़= Relation, Connection.
अश्क़= Tears
साहिल= The Sea-Shore, Beach, Coast.
मझधार= Vortex, Mid-Stream.
सफ़ीना= Boat, Vessel
ग़म= Sorrow, Grief.
शिफ़ा= Cure, Healing.
पैकर= Form, Appearance, Figure
मदीना= Medina Is A City In Western Saudi Arabia.

मंगलवार, 6 मार्च 2018

!!! क़लंदर !!!

ज़िन्दगी बुलबुले जैसी और चाहतें समंदर जैसी,
ये ज़मीन निगल जाती है हस्तियाँ सिकंदर जैसी !

दोस्ती करने से पहले ज़रा तसल्ली कर लेना,
फ़ितरत बग़ल में रखते है लोग ख़ंजर जैसी !

रिश्तों के धागों की ये गिरहें मुझे अखरती हैं,
मुझको भी तरकीब सिखा दे कोई बुनकर जैसी !

मतलबी रिश्तेदारों से तो वो अजनबी बेहतर,
मोहब्बत जहाँ से मिल जाये अपने घर जैसी !

मुख़्तसर सामान ज़िन्दगी के सफ़र के लिए,
मस्तियाँ मन में रखता हूँ क़लंदर जैसी !

हर दिल में ख़ुदा का मुख़्तलिफ़ तसव्वुर है,
मस्जिदें भी तो महज़ इमारत हैं मंदर जैसी !

है ज़रूरी इंसान का महज़ इंसान होना,
'फ़राज़बे-ज़रूरी है हस्ती पैग़म्बर जैसी !

||| फ़राज़ |||

बुलबुले= Bubble
चाहतें= Desires
समंदर= Ocean
हस्तियाँ= Personalities, Lives.
तसल्ली= Satisfaction
फ़ितरत= Nature
अखरना= Annoy, Problematic 
तरकीब= To Feel Bad- Colloquial
बुनकर= Weaver
मुख़्तसर= Limited, Brief
सामान= Luggage, Goods, Provisions
मस्तियाँ= Joys, Intoxications.
क़लंदर= Wandering Ascetic Sufi Dervishes, Ascetic, One Who Has Abandoned Wealth And Worldly Pleasures.
मुख़्तलिफ़ = Different, Various, Unlike
तसव्वुर= Imagination
महज़= Only, Merely
इमारत= A Building, A Structure
मंदर= Temple
बे-ज़रूरी= Unimportant

पैग़म्बर= Prophet

शनिवार, 24 फ़रवरी 2018

!!! रंग !!!

अब तो हर मौसम में
ज़रा और फीका पड़ जाता है,
रंग बालों का,
रंग ख़यालों का
और,
रंग मलालों का !

उस दीवार-घड़ी ने
बदलते देखे हैं 
कैलेण्डर,
न जाने कितने सालों के  !
सोचता हूँ कि वक़्त न सही,
इस बार
घड़ी ही बदल दूँ !

उस खिड़की पर भी
बदले जा चुके हैं
कई पुराने परदे,
लेकिन
तुम्हारे होने का एहसास
बाक़ी है
उस तकिये में,
और मुझमें !

मैं ख़ुद को तसल्ली दूँ,
या ख़ुद से ही मैं जंग करूँ !
ऐ-रंग-ए-ग़म-ए-यार,
बता क्या मैं तेरा रंग करूँ !

||| फ़राज़ |||

मौसम= season
ज़रा= A bit
फीका= Insipid, Faded, Languid
ख़यालों= Thoughts
मलालों= Regrets.
सालों= Years.
वक़्त= Time
परदे= Veil
एहसास= Feeling
तकिया= Pillow
ख़ुद= Self
तसल्ली= Solace, Consolation
जंग= Battle, War
रंग-ए-ग़म-ए-यार= Color of beloved's sorrow.


मंगलवार, 20 फ़रवरी 2018

!!! दिल-ए-फ़ित्ना !!!

नहीं सुनता मैं अब दिल की, स्याना हो गया हूँ मैं,
इसी दिल में तो मुझको इश्क़ की चाहत में डाला था !

ज़हन ने लाख रोका थादिल-ए-फ़ित्ना सुनता था,
दिल-ए-फ़ित्ना ही था जिसने हमें उल्फ़त में डाला था !

क्यूँ दें इल्ज़ाम हम इन्सान को फ़ितनापरस्ती का,
पहल फ़ित्ना तो इब्लीस ने जन्नत में डाला था !

सबब हैरानियों का था तेरा पहले-पहल मिलना,
तेरे ही रुख़ बदलने ने मुझे हैरत में डाला था !

तेरे ही इश्क़ ने हमको बराह-ए-रास्त दिखलाई,
तेरे ही फ़िराक़ ने हमको बुरी सोहबत में डाला था !

जगा करते थे रातों को, गिना करते थे हम तारे,
तेरे ही इश्क़ ने हमको अजब कसरत में डाला था !

वो एक दरिया जो ज़रिया था मेरी हर एक तसल्ली का,
उस ही दरिया ने हमको प्यास की शिद्दत में डाला था !

जवाब बनके हैं लौटे 'फ़राज़काग़ज़ के वो पुर्ज़े,
जो ख़त इज़्हार-ए-इश्क़ की हसरत में डाला था !

||| फ़राज़ |||

स्याना= Wise, Clever, Shrewd
ज़हन= Mind
दिल-ए-फ़ित्ना= Tempted Heart
उल्फ़त= Love Affection
इल्ज़ाम= Blame,
फ़ितनापरस्ती= Worshiping of temptation.
पहल= Begining, First, Initiative.
फ़ित्ना= Temptation
इब्लीस= Satan, The Devil.
जन्नत= Heaven, Paradise.
सबब= Cause, Reason.
हैरानियां= Amazements, Astonishments, Wonders.
पहले-पहल= Initially, Firstly, Begining.
रुख़= Appearance, Face, Direction.
हैरत= Astonishment, Wonder.
बराह-ए-रास्त= Directing/ Guiding path. The Right Way.
फ़िराक़= Separation, Absence, Departing.
सोहबत= Company, Asociation.
अजब= Strange
कसरत= Exercise
दरिया= River.
ज़रिया= Source
तसल्ली= Solace
शिद्दत= Vehemence, Severity.
काग़ज़= Paper.
पुर्ज़े= Shreds, Pieces.
ख़त= Letter
इज़्हार-ए-इश्क़= To express love.
हसरत= Desire.