be-zaroori लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
be-zaroori लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 6 मार्च 2018

!!! क़लंदर !!!

ज़िन्दगी बुलबुले जैसी और चाहतें समंदर जैसी,
ये ज़मीन निगल जाती है हस्तियाँ सिकंदर जैसी !

दोस्ती करने से पहले ज़रा तसल्ली कर लेना,
फ़ितरत बग़ल में रखते है लोग ख़ंजर जैसी !

रिश्तों के धागों की ये गिरहें मुझे अखरती हैं,
मुझको भी तरकीब सिखा दे कोई बुनकर जैसी !

मतलबी रिश्तेदारों से तो वो अजनबी बेहतर,
मोहब्बत जहाँ से मिल जाये अपने घर जैसी !

मुख़्तसर सामान ज़िन्दगी के सफ़र के लिए,
मस्तियाँ मन में रखता हूँ क़लंदर जैसी !

हर दिल में ख़ुदा का मुख़्तलिफ़ तसव्वुर है,
मस्जिदें भी तो महज़ इमारत हैं मंदर जैसी !

है ज़रूरी इंसान का महज़ इंसान होना,
'फ़राज़बे-ज़रूरी है हस्ती पैग़म्बर जैसी !

||| फ़राज़ |||

बुलबुले= Bubble
चाहतें= Desires
समंदर= Ocean
हस्तियाँ= Personalities, Lives.
तसल्ली= Satisfaction
फ़ितरत= Nature
अखरना= Annoy, Problematic 
तरकीब= To Feel Bad- Colloquial
बुनकर= Weaver
मुख़्तसर= Limited, Brief
सामान= Luggage, Goods, Provisions
मस्तियाँ= Joys, Intoxications.
क़लंदर= Wandering Ascetic Sufi Dervishes, Ascetic, One Who Has Abandoned Wealth And Worldly Pleasures.
मुख़्तलिफ़ = Different, Various, Unlike
तसव्वुर= Imagination
महज़= Only, Merely
इमारत= A Building, A Structure
मंदर= Temple
बे-ज़रूरी= Unimportant

पैग़म्बर= Prophet