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बुधवार, 5 सितंबर 2018

उस्ताद


ज़िन्दगी की ईमारत की बुनियाद की तरह,
बेहतर कोई तोहफ़ा नहींउस्ताद की तरह !

||| फ़राज़ |||

ईमारत = Building 
बुनियाद= Foundation, Base
तोहफ़ा = Gift
उस्ताद = Teacher, Mentor

शनिवार, 10 मार्च 2018

सौदा-ए-नाकाम !!!

ज़िन्दगी को ज़िन्दगी की इंतिहा चाहिए,
कि दर्द भी चाहिए तो बे-पनाह चाहिए !

एक राज़ को तलब होती है लब-कुशाई की,
एक रंज को भी अब अपनी ज़ुबां चाहिए !

शहर-बाज़ार में सुकून क्यूँ नहीं मिलता,
मुझे ग़म-ए-हयात की शिफ़ा चाहिए !

इश्क़ तजुर्बा है तो चलो करके देखें,
इश्क़ इल्ज़ाम है तो हर दफ़ा चाहिए !

कोई नुक्सान न हुआ मुझको बेग़रज़ होकर,
और तुझे तो दोस्ती में भी नफ़ा चाहिए !

कुछ दोस्तों की वजह से है ये हाल  मेरा,
कि अब मुझे दुश्मनों से मशवरा चाहिए !

ये ज़माना मुनाफ़े में है ख़ुदग़र्ज़ी करके,
मुझे भी अब अपनी ज़ात से नफ़ा चाहिए !

न बतलाओ मुझको किसी इमारत का पता,
मुझे तो अपने दिल में ख़ुदा चाहिए !

न दर्द चाहिए, न अब कोई दवा चाहिए,
अब तो सौदा-ए-नाकाम का नफ़ा चाहिए !

शरीफ़ों की शराफ़त से बख़ूबी वाक़िफ़ हूँ,
'फ़राज़' मुझे अपने जैसा कोई बुरा चाहिए !

||| फ़राज़ ||| 

इंतिहा= utmost limit, end, extremity
बे-पनाह= Limitless, Unending.
राज़= Secret
तलब= demand, desire,
लब-कुशाई= lip-opening, Speech
रंज= Grief, Sorrow.
ज़ुबां= Tongue, Speech
शहर-बाज़ार= City Market
सुकून= Peace
ग़म-ए-हयात= sorrows of life
तजुर्बा= Experience
इल्ज़ाम= Blame, Accusation.
दफ़ा= Time
बेग़रज़= Selfless
मशवरा= Counsel, Advice
ज़माना= the world/ era
मुनाफ़ा= Profit
ख़ुदग़र्ज़ी= Selfishness
ज़ात= Self.
नफ़ा= Profit
इमारत= Building
सौदा-ए-नाकाम= Unsuccessful/Lost deal.
शरीफ़= Gentle, Noble, Eminent
शराफ़त= Nobility, Civility, Gentle Manners.
बख़ूबी= Thoroughly
वाक़िफ़= Aware, Informed, Acquainted.

मंगलवार, 6 मार्च 2018

!!! क़लंदर !!!

ज़िन्दगी बुलबुले जैसी और चाहतें समंदर जैसी,
ये ज़मीन निगल जाती है हस्तियाँ सिकंदर जैसी !

दोस्ती करने से पहले ज़रा तसल्ली कर लेना,
फ़ितरत बग़ल में रखते है लोग ख़ंजर जैसी !

रिश्तों के धागों की ये गिरहें मुझे अखरती हैं,
मुझको भी तरकीब सिखा दे कोई बुनकर जैसी !

मतलबी रिश्तेदारों से तो वो अजनबी बेहतर,
मोहब्बत जहाँ से मिल जाये अपने घर जैसी !

मुख़्तसर सामान ज़िन्दगी के सफ़र के लिए,
मस्तियाँ मन में रखता हूँ क़लंदर जैसी !

हर दिल में ख़ुदा का मुख़्तलिफ़ तसव्वुर है,
मस्जिदें भी तो महज़ इमारत हैं मंदर जैसी !

है ज़रूरी इंसान का महज़ इंसान होना,
'फ़राज़बे-ज़रूरी है हस्ती पैग़म्बर जैसी !

||| फ़राज़ |||

बुलबुले= Bubble
चाहतें= Desires
समंदर= Ocean
हस्तियाँ= Personalities, Lives.
तसल्ली= Satisfaction
फ़ितरत= Nature
अखरना= Annoy, Problematic 
तरकीब= To Feel Bad- Colloquial
बुनकर= Weaver
मुख़्तसर= Limited, Brief
सामान= Luggage, Goods, Provisions
मस्तियाँ= Joys, Intoxications.
क़लंदर= Wandering Ascetic Sufi Dervishes, Ascetic, One Who Has Abandoned Wealth And Worldly Pleasures.
मुख़्तलिफ़ = Different, Various, Unlike
तसव्वुर= Imagination
महज़= Only, Merely
इमारत= A Building, A Structure
मंदर= Temple
बे-ज़रूरी= Unimportant

पैग़म्बर= Prophet