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शुक्रवार, 7 दिसंबर 2018

सलाह

माना कि है गुनाह तो गुनाह कीजिये,
इश्क़ कीजिये अगर तो बे-पनाह कीजिये !

आने वाले ज़माने तेरा नाम लें,
जो भी कीजे वो बे-इंतिहा कीजिये !

चाह रखोगे जो, वो मिलेगा तुम्हें,
जो ना सोचा किसीने वो चाह कीजिये !

शम्स देता है ज्यूँ बे-ग़रज़ रौशनी,
इमदाद कुछ इस तरह कीजिये !

राह के पत्थरों को हटाते चलो,
काम कोई कभी बेवजह कीजिये !

गुड्डे-गुड़ियों के जैसा नहीं खेल ये,
निभा पाएँ अगर तो निकाह कीजिये !

है हक़ीक़त तो तस्लीम कर लीजिये,
अपनी हसरत से ऐसे सुलह कीजिये !

तारीफ़ कीजिये नहीं. सच बता दीजिये,
'अल्फ़ाज़' में असर हो तो वाह कीजिये !

||| अल्फ़ाज़ |||

गुनाह = Sin, Crime
बे-पनाह = Boundless, Limitless, Unlimited
बे-इंतिहा = Infinite, Endless
शम्स = The Sun
ज्यूँ = Like That
बे-ग़रज़ = Selfless, Without Any Interest
इमदाद =  Donation, Gift, Help, Support
बेवजह = Without Reason
गुड्डा = Doll, Puppet; An Effigy (The Figure Being That Of A Man)
निकाह = Matrimonial Bond, Marriage
हक़ीक़त = Reality, Truth
तस्लीम = Surrender, Accept, Acknowledge
हसरत = Desire
सुलह = Peace, Treaty,
तारीफ़ = Praise, Admiration,
असर = Effect, Impression

शनिवार, 10 मार्च 2018

सौदा-ए-नाकाम !!!

ज़िन्दगी को ज़िन्दगी की इंतिहा चाहिए,
कि दर्द भी चाहिए तो बे-पनाह चाहिए !

एक राज़ को तलब होती है लब-कुशाई की,
एक रंज को भी अब अपनी ज़ुबां चाहिए !

शहर-बाज़ार में सुकून क्यूँ नहीं मिलता,
मुझे ग़म-ए-हयात की शिफ़ा चाहिए !

इश्क़ तजुर्बा है तो चलो करके देखें,
इश्क़ इल्ज़ाम है तो हर दफ़ा चाहिए !

कोई नुक्सान न हुआ मुझको बेग़रज़ होकर,
और तुझे तो दोस्ती में भी नफ़ा चाहिए !

कुछ दोस्तों की वजह से है ये हाल  मेरा,
कि अब मुझे दुश्मनों से मशवरा चाहिए !

ये ज़माना मुनाफ़े में है ख़ुदग़र्ज़ी करके,
मुझे भी अब अपनी ज़ात से नफ़ा चाहिए !

न बतलाओ मुझको किसी इमारत का पता,
मुझे तो अपने दिल में ख़ुदा चाहिए !

न दर्द चाहिए, न अब कोई दवा चाहिए,
अब तो सौदा-ए-नाकाम का नफ़ा चाहिए !

शरीफ़ों की शराफ़त से बख़ूबी वाक़िफ़ हूँ,
'फ़राज़' मुझे अपने जैसा कोई बुरा चाहिए !

||| फ़राज़ ||| 

इंतिहा= utmost limit, end, extremity
बे-पनाह= Limitless, Unending.
राज़= Secret
तलब= demand, desire,
लब-कुशाई= lip-opening, Speech
रंज= Grief, Sorrow.
ज़ुबां= Tongue, Speech
शहर-बाज़ार= City Market
सुकून= Peace
ग़म-ए-हयात= sorrows of life
तजुर्बा= Experience
इल्ज़ाम= Blame, Accusation.
दफ़ा= Time
बेग़रज़= Selfless
मशवरा= Counsel, Advice
ज़माना= the world/ era
मुनाफ़ा= Profit
ख़ुदग़र्ज़ी= Selfishness
ज़ात= Self.
नफ़ा= Profit
इमारत= Building
सौदा-ए-नाकाम= Unsuccessful/Lost deal.
शरीफ़= Gentle, Noble, Eminent
शराफ़त= Nobility, Civility, Gentle Manners.
बख़ूबी= Thoroughly
वाक़िफ़= Aware, Informed, Acquainted.

सोमवार, 18 दिसंबर 2017

सरफ़राज़ियाँ !!!

बहुत ख़ूबसूरत लगी ज़िन्दगी मुझको,
जब दुनिया को बेसबब हो के देखा !
लगा न सका फ़िर कोई क़ीमत मेरी,
अनमोल हुआ जब सिफ़र हो के देखा !

एक सायबां से सीखा बेग़रज़ होना,
जब धूप में मैंने शजर हो के देखा !
देखना था उस बेशक्ल को 'फ़राज़',
सच को मैंने बेनज़र हो के देखा !

जिस्म के बग़ैर परछाईं कैसी दिखती है ,
अपने लोगों से मैंने अलग हो के देखा !
घर की दीवार भी बेजान नहीं होती,
घर को जाना जब बेघर हो के देखा !

तेरी ग़लतियों को ठहराना था जायज़,
आज मैंने भी ज़रा ग़लत हो के देखा !
अपने दामन के दाग़ भी नज़र आये,
ख़ुदको जब ख़ुद से अलग हो के देखा !

कोई आज़माइश हौसले से बड़ी नहीं होती,
हर मुश्किल को मैंने बेफ़िक्र हो के देखा !
आख़िर आ ही गईं सरफ़राज़ियाँ मेरे हिस्से
'फ़राज़' ने मर्तबा अपना ग़ज़ल हो के देखा !

|||फ़राज़|||

बेसबब = Without cause or reason. 
क़ीमत = Worth, Cost, Price, Value.
अनमोल = Rare.
सिफ़र = Zero, Naught.
सायबां = Canopy, Shade.
बेग़रज़ = Selfless.
शजर = Tree.
बेशक्ल = Faceless, The divine energy.
बेनज़र= Without sight.
बग़ैर = Without, Blind.
बेजान = Lifeless, Dead.
जायज़ = Lawfull, Legal, Right.
दामन = Hem.
दाग़ = Stigma, Spot.
आज़माइश = Test, Exam.
हौसला = Courage, Spirit, Capacity.
बेफ़िक्र= Careless.
सरफ़राज़ियाँ= Ennoblements, Blessings.
मर्तबा = Place, Class, Degree.

रविवार, 27 अगस्त 2017

बेमुरव्वत!!!

बेमुरव्वत मैं भी ज़रा हो जाऊं,
क्यूँ न अब मैं भी ख़फ़ा हो जाऊं!

तू बेनियाज़ है अब मेरी मरीज़ी से,
बेग़रज़ मैं तुझसे इस दफ़ा हो जाऊं!

तुझसा कोई हुनर मुझको भी अता हो,
क़त्ल भी करूँ और बेगुनाह हो जाऊं!

तेरे क़िरदार का हर ऐब नुमाया होगा,
सर-ए-बाज़ार अगर मैं बेरिदा हो जाऊं!

वो तग़ाफ़ुल न करेगा ख़बर है हमको,
'फ़राज़' किसके लिए मैं फ़ना हो जाऊं!

मेरे ऐब को भी लोग मेरी अदा समझें,
मुकम्मल मैं कुछ इस तरह हो जाऊं!

क़फ़स में तो हूँ मगर परिंदा तो नहीं,
मैं बाज़ुबां हूँ तो कैसे बेज़ुबां हो जाऊं!

|||फ़राज़|||

बेमुरव्वत=Unkind, Uncivil, Inhuman.
बेनियाज़= Carefree
मरीज़ी= Sickness, Unwell.
बेग़रज़=Uninterested.
अता= Gift, Giving
क़िरदार= Character
ऐब=Defect, Imperfection
नुमाया= Apparent, Visible.
सर-ए-बाज़ार= In public, Openly.
बेरिदा=Uncover
तग़ाफ़ुल=Negligence
फ़ना=Destroy
क़फ़स=Cage, Prison
बाज़ुबां= One who can speak
बेज़ुबां= Speechless, Voiceless