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मंगलवार, 12 दिसंबर 2017

वतन और मज़हब !

मुताला क़ुर'आन से है कि वतनपरस्ती ईमान है,
मेरा क़ायदा इस्लाम है, और मज़हब हिन्दोस्तान है !

मेरी दीवार पर हिंदी में लिखो अल्लाह का नाम,
मेरी बुनियाद तो उर्दू है पर हिंदी मेरा दालान है !

तुम न कर पाओगे बंटवारा मेरी तहज़ीब का,
उर्दू तो मेरी क़ौम है मगर हिंदी मेरी पहचान है !

एक माँ की मोहब्बत, दूजी बहन के प्यार जैसी है,
मेरा अंदाज़-ए-बयां उर्दू है, हिंदी-रवां मेरी ज़ुबान है !

ख़ुदाओं की सियासत करते हैं ख़ुदा बेचने वाले,
जो उनकी इता'अत करते हैं वो भी कितने नादान हैं !

मय्यतें भला कब पूछती हैं कन्धों का मज़हब,
फ़िर भी ता-ज़िन्दगी मज़हब का ही इम्तिहान है !

ज़ुल्म बेज़ुबां पर हो तो वो भी शोर करता है,
हम क्यूँ लब-कुशा नहीं, यूँ तो हम बाज़ुबां हैं !

एक ही जोड़े की तो नस्ल सब इंसान हैं 'फ़राज़',
मज़हब मुख़्तलिफ़ सही, मगर एक ही ख़ानदान है ! 

यहीं सुनी पहली अज़ान, यहीं नमाज़-ए-आख़िर होगी,
यहीं मेरा पहला घर है और यहीं आख़िरी मकान है !

माना की पुरखों ने निभाए हैं झगड़े इबादतगाहों के,
चलो अब मिलकर सुलझा लें, हम लोग तो नौजवान हैं !

|||फ़राज़|||

मुताला= Study, Reference. 
क़ुर'आन= The Holy Quran. 
वतनपरस्ती= Patriotism.
ईमान= Belief, Conscience, Faith, Creed.
क़ायदा= Rule, System.
इस्लाम= The religion proclaimed by the Holy Prophet Mohammed (P.B.U.H.)
मज़हब= Religion.
बुनियाद= Foundation, Elementry, Basic.
दालान= Verandah.
तहज़ीब= Adorning, Politeness.
क़ौम= Tribe, Race, People.
दूजी= Other, Second.
अंदाज़-ए-बयां= Style of narration
हिंदी-रवां= Active/Souled in the Hindi Language.
ज़ुबान= Dialect, Language, Tongue.
सियासत= Politics.
इता'अत= Obedience.
नादान= Foolish, Innocent
मय्यत= Dead body, Corpse.
मज़हब= Religion.
ता-ज़िन्दगी= Till the end of life, All life.
इम्तिहान= Test, Exam.
ज़ुल्म= Oppression, Injustice.
बेज़ुबां= Speechless, Dumb.
लब-कुशा= Opened lips.
बाज़ुबां= One who can speak.
जोड़ा= Couple.
नस्ल= Breed, Caste, Pedigree
मुख़्तलिफ़= Different Unlike.
ख़ानदान= Family.
अज़ान= The Islamic call to prayer.
नमाज़-ए-आख़िर= The Islamic Funeral Prayer. The final prayer.
पुरखे= Ancestors.
इबादतगाह= A Place of worship.

बुधवार, 27 सितंबर 2017

मुक़म्मल जहान !!!

ये हिक़ायत-ए-हस्ती तेरी
दुनिया में है मेहमान सी,
क्यूँ तलब रखता है तू
इस मुक़म्मल जहान की !

सुना है उसकी क़ब्र है
एक फ़क़ीर के बराबर में,
तामीर सोने चांदी की थी
जिस शख्स़ के मकान की !

वक़्त-ए-रुख़सत जिस्म ये
जायगा ख़ाली हाथ ही,
तब पैरवी ख़ुदा से करेगी
दौलत तेरे ईमान की !

सुन ज़रा जिंदा बशर,
कब्रगाहों से न डर,
मिट्टी में ही मिल जानी है
हस्ती हर इन्सान की !

तू भी तमन्ना करेगा
बेज़ुबान हो जाने की,
जो सज़ा मालूम हो तुझे
गीब़त-ओ-बोहतान की !

|||फ़राज़|||

हिक़ायत-ए-हस्ती= Story of the existence
तलब= Desire, Demand.
मुक़म्मल= Perfect, complete
फ़क़ीर= Mendicent, Dervish, Begger
तामीर= Construction.
वक़्त-ए-रुख़सत= Time of separation/ Parting.
पैरवी= Prosecution, Lobbying.
ईमान= Beliefe, Conscience, Creed, Faith
बशर= Human being.
कब्रगाह= Graveyard.
गीब़त= Back biting
बोहतान= False accusation, Calumny, False imputation.

बुधवार, 13 सितंबर 2017

बेनियाज़ !!!

बेनियाज़ जो तुझसे हम ज़रा हो गए,
इल्ज़ाम ये आया कि हम बेवफ़ा हो गए !

ख़ुदसे कोई शिक़ायत न रही बाक़ी,
जबसे तुझसे ही हम ख़फ़ा हो गए !

तेरे मसअले पर हम कुछ यूँ मिसाल हुए,
जीती जागती सी एक तालीमगाह हो गए !

हमें ही तो था इश्क़ उस जलती लौ से,
बरहा पतंगे की तरह हम फ़ना हो गए !

छुपा न पाएगी उन्हें कफ़न की चादर,
राज़-ए-ज़मीर जो तेरे बेरिदा हो गए !

उनका ख़ुदा शायद कोई और ही होगा,
क़त्ल करके जो लोग बेगुनाह हो गए !

कौन सुनाएगा तुझको अब कहानी मेरी,
अब तो मेरे क़ासिद भी बेजुबान हो गए !

चराग़ों की तरह रात हम भर जलते रहे,
मज़लूम-ए-तजाहुल हर सुबह हो गए !

|||फ़राज़|||


बेनियाज़= Independent, Carefree.
इल्ज़ाम= Blame
मसअला= Matter, Problem. 
मिसाल= Example, Instance, Model.
तालीमगाह= Seminary.
लौ= Candle flame, Ardent desire.
फ़ना= Destruction. 
राज़-ए-ज़मीर= Secret of Heart/Conscience/Mind.
बेरिदा=Uncover.
क़त्ल= Murder.
क़ासिद= Messenger.
मज़लूम= Victimised, One who is treated wrongfully or unjustly.
तजाहुल= Ignorance. 

शनिवार, 2 सितंबर 2017

रिहाई बेज़ुबान की !!!

मैं नहीं जानता दास्ताँ 
पिंजरे में क़ैद उस परिंदे की
मगर दिल है बाख़बर
उस बेज़ुबान के दर्द से !

एक काग़ज़ के टुकड़े के बदले
एक परिंदे को आज़ाद कर देना !

रिहाई बेज़ुबान की
इबादत है ख़ुदा की !!!

|||फ़राज़|||

रविवार, 27 अगस्त 2017

बेमुरव्वत!!!

बेमुरव्वत मैं भी ज़रा हो जाऊं,
क्यूँ न अब मैं भी ख़फ़ा हो जाऊं!

तू बेनियाज़ है अब मेरी मरीज़ी से,
बेग़रज़ मैं तुझसे इस दफ़ा हो जाऊं!

तुझसा कोई हुनर मुझको भी अता हो,
क़त्ल भी करूँ और बेगुनाह हो जाऊं!

तेरे क़िरदार का हर ऐब नुमाया होगा,
सर-ए-बाज़ार अगर मैं बेरिदा हो जाऊं!

वो तग़ाफ़ुल न करेगा ख़बर है हमको,
'फ़राज़' किसके लिए मैं फ़ना हो जाऊं!

मेरे ऐब को भी लोग मेरी अदा समझें,
मुकम्मल मैं कुछ इस तरह हो जाऊं!

क़फ़स में तो हूँ मगर परिंदा तो नहीं,
मैं बाज़ुबां हूँ तो कैसे बेज़ुबां हो जाऊं!

|||फ़राज़|||

बेमुरव्वत=Unkind, Uncivil, Inhuman.
बेनियाज़= Carefree
मरीज़ी= Sickness, Unwell.
बेग़रज़=Uninterested.
अता= Gift, Giving
क़िरदार= Character
ऐब=Defect, Imperfection
नुमाया= Apparent, Visible.
सर-ए-बाज़ार= In public, Openly.
बेरिदा=Uncover
तग़ाफ़ुल=Negligence
फ़ना=Destroy
क़फ़स=Cage, Prison
बाज़ुबां= One who can speak
बेज़ुबां= Speechless, Voiceless

शुक्रवार, 30 जून 2017

ख़ानाबदोशियां!!!

मुद्दतों तलक बेवजह दश्त-ओ-बियाबान भटके,
तेरे फ़ितूर से बचने को हम सारा जहान भटके !

यूँ तो हैं दिल को मेरे रंजिशें तुझसे हज़ार,
लेकिन पर्देदारियों की ख़ातिर बेज़ुबान भटके !

तेरे अक्स तलाशने चले थे तेरी मुंडेरों के साए में,
धूप छाँव के एक खेल में हम सुबह शाम भटके !

सोचा था मयक़शी से भर जायेंगे कुछ तो ज़ख्म,
लेकिन तेरी जलन में तिश्ना साक़ी-ओ-जाम भटके !

इतने भी नहीं तन्हा अभी ख़ानाबदोशियों से “फ़राज़”,
मेरी गर्दिशों में साथ मेरे भी कुछ महेरबान भटके !!!

|||फ़राज़|||

मुद्दत=for a long time
रंजिश=ill-will, hostility
तिश्ना=thirsty, insatiable, eagerly
साक़ी-ओ-जाम= bartender or cup-bearer and goblet.
दश्त-ओ-बियाबान= forest and deserts 
ख़ानाबदोशियाँ=nomadicity
गर्दिश= misfortune