मैं नहीं जानता दास्ताँ
पिंजरे में क़ैद उस परिंदे की
मगर दिल है बाख़बर
उस बेज़ुबान के दर्द से !
एक काग़ज़ के टुकड़े के बदले
एक परिंदे को आज़ाद कर देना !
रिहाई बेज़ुबान की
इबादत है ख़ुदा की !!!
|||फ़राज़|||
पिंजरे में क़ैद उस परिंदे की
मगर दिल है बाख़बर
उस बेज़ुबान के दर्द से !
एक काग़ज़ के टुकड़े के बदले
एक परिंदे को आज़ाद कर देना !
रिहाई बेज़ुबान की
इबादत है ख़ुदा की !!!
|||फ़राज़|||
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