बुधवार, 20 सितंबर 2017

मेरा साया!!!

तू मेरी सूनी आँखों को,
ख़्वाबों से रोज़ सजाता है !
मैले-धुंधले  मेरे मन को,
तू रंगों से भर जाता है !

जब रात अँधेरी घिरते ही,
मेरा साया खो जाता है !
तू चुपके से मन में आकर,
मेरे साया हो जाता है !

तू दूर हैं मेरी आँखों से,
पर दूर कभी न लगता है !
हमदर्द जो बनके आया तू,
आसान सा जीना लगता है !

जाने कैसा मरहम मुझको,
तेरी बातों से मिलता है !
उम्मीद के धागों से मेरे,
मन के ज़ख्मों को सिलता है !

न कोई वादा लेता है,
न शर्त कोई तू रखता है !
न बांधता है तू कसमों में,
न रिश्तों के बंधन रखता है !

तू दोस्त से ज़्यादा अपना है,
तू इश्क़ से ज़्यादा गहरा है !
मैं ख़ुद से ज़्यादा तेरा हूँ,
तू ख़ुद से ज़्यादा मेरा है !

|||फ़राज़|||

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