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शनिवार, 22 सितंबर 2018

जान-ए-जाँ

तुझे माँगता हूँ मैं हर दफ़ा,
कभी बा-सबब, कभी बे-वजह !

तू ही आजिज़ी, तू ही इल्तिजा,
कभी ख़्वाह-मख़ाह, कभी बा-वजह !

मेरी ज़ीस्त की तू ही दास्ताँ,
तू ही इब्तिदा, तू ही इंतिहा !

तू ही दर्द है, तू ही है दवा,
तू ही दुश्मना , तू ही जान-ए-जाँ !

कभी जान तू, कभी तू जुदा,
कभी चार सू, कभी बे-निशाँ !

बेदर्द तूहमदर्द तू,
बेपीर तू, तू ही हमनवा !

मेरी ज़ात में है तू इस क़दर,
तू ही हमनज़र, तू ही हमज़बाँ !

मेरी शायरी का ख़याल तू,
तू ‘फ़राज़' का नाम-ओ-निशाँ !

||| फ़राज़ |||

दफ़ा= Time
बा-सबब= By Reason
बे-वजह= Without Cause/Reason
आजिज़ी= Helplessness, Humility
इल्तिजा= Request
ख़्वाह-मख़ाह= Simply, For No Reason, Just Like That.
बा-वजह= For Some Reason.
ज़ीस्त= Life, The Existence
दास्ताँ= Story, Fable, Tale
इब्तिदा= Beginning, Starting, Origin
इंतिहा= Utmost Limit, End, Extremity
दुश्मना= Enemy
जान-ए-जाँ= Life, Sweetheart
चार सू= In Four Directions, In All Directions
बे-निशाँ= Without A Sign. Traceless
बेदर्द= Cruel, Merciless, Heartless
हमदर्द= A Sympathizer, A Fellow, Sufferer Partner In Adversity
बेपीर= Unrepentant, Ruthless
हमनवा= Friend
ज़ात= Personality, Being/ Caste, Race,
क़दर= Amount, Appreciation, Dignity, Honor
हमनज़र= Those Who View The World The Same Way
हमज़बाँ= Speaking In The Same Voice/Language
नाम-ओ-निशाँ= Identity, Signs

बुधवार, 20 सितंबर 2017

मेरा साया!!!

तू मेरी सूनी आँखों को,
ख़्वाबों से रोज़ सजाता है !
मैले-धुंधले  मेरे मन को,
तू रंगों से भर जाता है !

जब रात अँधेरी घिरते ही,
मेरा साया खो जाता है !
तू चुपके से मन में आकर,
मेरे साया हो जाता है !

तू दूर हैं मेरी आँखों से,
पर दूर कभी न लगता है !
हमदर्द जो बनके आया तू,
आसान सा जीना लगता है !

जाने कैसा मरहम मुझको,
तेरी बातों से मिलता है !
उम्मीद के धागों से मेरे,
मन के ज़ख्मों को सिलता है !

न कोई वादा लेता है,
न शर्त कोई तू रखता है !
न बांधता है तू कसमों में,
न रिश्तों के बंधन रखता है !

तू दोस्त से ज़्यादा अपना है,
तू इश्क़ से ज़्यादा गहरा है !
मैं ख़ुद से ज़्यादा तेरा हूँ,
तू ख़ुद से ज़्यादा मेरा है !

|||फ़राज़|||

रविवार, 16 अप्रैल 2017

दूरियां !!!

हमक़दम हमदर्द भी हो ये लाज़मी तो नहीं..
दूरियां संवार देती हैं रिश्ते अक्सर !!!

||| फ़राज़ |||