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मंगलवार, 2 अप्रैल 2019

ज़िन्दगी

ख़्वाह-मख़ाह के डर में गुज़री,
ज़िन्दगी अगर-मगर में गुज़री !

तेरे इश्क़ में सारी जवानी,
एक गर्मी की दोपहर में गुज़री !

जैसे गाँव से रेलगाड़ी गुज़रे,
ज़िन्दगी ऐसे शहर में गुज़री !

रात को रो लिए अंधेरों में,
मत पूछिये क्या सहर में गुज़री !

गुनाहगारी में बाँकपन गुज़रा,
पीरी तो दर-गुज़र में गुज़री !

पल भर को सोचिये तो लगता है,
जैसे ज़िन्दगी पल भर में गुज़री !

पाँव फैले नहीं मगर ढके भी नहीं,
ज़िन्दगी छोटी सी चादर में गुज़री !

मेरे हाल से बे-ख़बर है 'अल्फ़ाज़',
ज़िन्दगी जिसकी फ़िकर में गुज़री !

||| अल्फ़ाज़ |||

ख़्वाह-मख़ाह = Just Like That, यूँ हीऐसे ही
अगर-मगर = If-But
सहर = Morning, प्रभातसुबह
गुनाहगारी = Sinning, पाप
बाँकपन = Teenage, Adolescence, लड़कपन
पीरी = Old Age, बुढ़ापा
दर-गुज़र = Pardon, Forgiveness, क्षमा करना
बे-ख़बर = Ignorant, Uninformed, अन्जान
फ़िकर = Concern, Thought, चिंता

शनिवार, 22 सितंबर 2018

जान-ए-जाँ

तुझे माँगता हूँ मैं हर दफ़ा,
कभी बा-सबब, कभी बे-वजह !

तू ही आजिज़ी, तू ही इल्तिजा,
कभी ख़्वाह-मख़ाह, कभी बा-वजह !

मेरी ज़ीस्त की तू ही दास्ताँ,
तू ही इब्तिदा, तू ही इंतिहा !

तू ही दर्द है, तू ही है दवा,
तू ही दुश्मना , तू ही जान-ए-जाँ !

कभी जान तू, कभी तू जुदा,
कभी चार सू, कभी बे-निशाँ !

बेदर्द तूहमदर्द तू,
बेपीर तू, तू ही हमनवा !

मेरी ज़ात में है तू इस क़दर,
तू ही हमनज़र, तू ही हमज़बाँ !

मेरी शायरी का ख़याल तू,
तू ‘फ़राज़' का नाम-ओ-निशाँ !

||| फ़राज़ |||

दफ़ा= Time
बा-सबब= By Reason
बे-वजह= Without Cause/Reason
आजिज़ी= Helplessness, Humility
इल्तिजा= Request
ख़्वाह-मख़ाह= Simply, For No Reason, Just Like That.
बा-वजह= For Some Reason.
ज़ीस्त= Life, The Existence
दास्ताँ= Story, Fable, Tale
इब्तिदा= Beginning, Starting, Origin
इंतिहा= Utmost Limit, End, Extremity
दुश्मना= Enemy
जान-ए-जाँ= Life, Sweetheart
चार सू= In Four Directions, In All Directions
बे-निशाँ= Without A Sign. Traceless
बेदर्द= Cruel, Merciless, Heartless
हमदर्द= A Sympathizer, A Fellow, Sufferer Partner In Adversity
बेपीर= Unrepentant, Ruthless
हमनवा= Friend
ज़ात= Personality, Being/ Caste, Race,
क़दर= Amount, Appreciation, Dignity, Honor
हमनज़र= Those Who View The World The Same Way
हमज़बाँ= Speaking In The Same Voice/Language
नाम-ओ-निशाँ= Identity, Signs