ख़्वाह-मख़ाह के डर में गुज़री,
ज़िन्दगी अगर-मगर में गुज़री !
तेरे
इश्क़ में सारी जवानी,
एक
गर्मी की दोपहर में गुज़री !
जैसे
गाँव से रेलगाड़ी गुज़रे,
ज़िन्दगी
ऐसे शहर में गुज़री !
रात
को रो लिए अंधेरों में,
मत
पूछिये क्या सहर में गुज़री !
गुनाहगारी में बाँकपन गुज़रा,
पीरी तो दर-गुज़र में
गुज़री !
पल
भर को सोचिये तो लगता है,
जैसे
ज़िन्दगी पल भर में गुज़री !
पाँव
फैले नहीं मगर ढके भी नहीं,
ज़िन्दगी
छोटी सी चादर में गुज़री !
मेरे
हाल से बे-ख़बर है 'अल्फ़ाज़',
ज़िन्दगी
जिसकी फ़िकर में गुज़री !
||| अल्फ़ाज़ |||
ख़्वाह-मख़ाह
= Just Like That, यूँ ही, ऐसे ही
अगर-मगर
= If-But
सहर = Morning, प्रभात, सुबह
गुनाहगारी
= Sinning, पाप
बाँकपन
= Teenage,
Adolescence, लड़कपन
पीरी
= Old Age, बुढ़ापा
दर-गुज़र
= Pardon,
Forgiveness, क्षमा करना
बे-ख़बर
= Ignorant,
Uninformed, अन्जान
फ़िकर
= Concern, Thought, चिंता
||| अल्फ़ाज़ |||