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शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2018

अभी बाक़ी है !!!

उसके नाम की पर्देदारी तो अभी बाक़ी है,
इश्क़ की कुछ ज़िम्मेदारी तो अभी बाक़ी है !

अभी 
बाक़ी हैं तेरी ज़ात से और भी हैरानियाँ,
दिल-ए-नाकाम की भी सोग़वारी तो अभी बाक़ी है !

यूँ तो ये ज़माना आज़ाद-ख़यालों का है,
फ़िर भी इश्क़ पर पहरेदारी तो अभी बाक़ी है !

तेरे नाम से बदल जाती है धड़कन की लय,
दिल पर तेरी कुछ हक़दारी तो अभी बाक़ी है !

अभी तो बेआबरू हो के निकला हूँ तेरे कूचे से,
सर-ए-बाज़ार मेरी संगसारी तो अभी बाक़ी है !

ऐ यारज़रा अहिस्ता ले चल मेरी मय्यत,
मेरे क़ातिल की ग़म-गुसारी तो अभी बाक़ी है !

भरें तो कैसे भरें, कि ज़ख़्म हैं दिल के,
मेरे ज़ालिम की तीमारदारी तो अभी बाक़ी है !

ऐ ख़ुदा, तू ज़रा और मोहलत दे दे,
'फ़राज़' मौत की तैयारी तो अभी बाक़ी है !

||| फ़राज़ |||

बाक़ी= Remaining.
पर्देदारीSecrecy, Concealment.
ज़िम्मेदारी= Responsibility.
ज़ात= Personality.
हैरानियाँ= Amazements, Astonishments.
दिल-ए-नाकाम= Unsuccessful heart
सोग़वारी= Mourning
ज़माना= Era, Time.
आज़ाद-ख़याल= liberal, Broad/Open minded. 
पहरेदारी= Guarding.
लय= Melody, Tone, Rhythm
हक़दारी= Entitlement
बेआबरू= Dishonored
कूचा= Narrow street, Lane.
सर-ए-बाज़ार= In public, Openly.
संगसारी= Stoning.
ज़रा A bit.
अहिस्ता= Slowly, Softly.
मय्यत= Dead body, Corpse.
क़ातिल= Murderer.
ग़म-गुसारी= Sympathy.
ज़ख़्म= Wound
ज़ालिम= One who hurts, Oppressor, Unjust, Tyrant
तीमारदारी= Nursing, Taking care of, Looking after sick.
मोहलत= Respite, Time, Leisure.
तैयारी= Preparation

रविवार, 1 अक्टूबर 2017

इश्क़ का चर्चा !!!

हमको भी न ख़बर थी कि हमें प्यार हो गया,
फ़िर सारे ज़माने में कैसे इश्तिहार हो गया !

हर कोई पढ़ने लगा मुझको ख़बर की तरह,
तेरी आशिक़ी में आख़िर मैं अख़बार हो गया !

जो आये न थे कभी मेरी मिजाज़पुर्सी को,
उनको भी मेरी हंसी से सरोकार हो गया !

हर कोई पढ़ने लगा मुझको ख़बर की तरह,
तेरी आशिक़ी में आख़िर मैं अख़बार हो गया !

सर-ए-बाज़ार हर नज़र तेरा ही सवाल करती है,
इश्क़ का चर्चा मेरे शहर का कारोबार हो गया !

मुख़बिर तो उस गली में पहले भी थे 'फ़राज़',
उस राह का हर पत्थर अब पहरेदार हो गया !

|||फ़राज़|||

इश्तिहार= Advertisement, Notification.
मिजाज़पुर्सी= Asking for Wellbeing.
सरोकार= Concern, Relation.
सर-ए-बाज़ार= Openly, In public.
मुख़बिर= Spy, Informer, Reporter.

रविवार, 27 अगस्त 2017

बेमुरव्वत!!!

बेमुरव्वत मैं भी ज़रा हो जाऊं,
क्यूँ न अब मैं भी ख़फ़ा हो जाऊं!

तू बेनियाज़ है अब मेरी मरीज़ी से,
बेग़रज़ मैं तुझसे इस दफ़ा हो जाऊं!

तुझसा कोई हुनर मुझको भी अता हो,
क़त्ल भी करूँ और बेगुनाह हो जाऊं!

तेरे क़िरदार का हर ऐब नुमाया होगा,
सर-ए-बाज़ार अगर मैं बेरिदा हो जाऊं!

वो तग़ाफ़ुल न करेगा ख़बर है हमको,
'फ़राज़' किसके लिए मैं फ़ना हो जाऊं!

मेरे ऐब को भी लोग मेरी अदा समझें,
मुकम्मल मैं कुछ इस तरह हो जाऊं!

क़फ़स में तो हूँ मगर परिंदा तो नहीं,
मैं बाज़ुबां हूँ तो कैसे बेज़ुबां हो जाऊं!

|||फ़राज़|||

बेमुरव्वत=Unkind, Uncivil, Inhuman.
बेनियाज़= Carefree
मरीज़ी= Sickness, Unwell.
बेग़रज़=Uninterested.
अता= Gift, Giving
क़िरदार= Character
ऐब=Defect, Imperfection
नुमाया= Apparent, Visible.
सर-ए-बाज़ार= In public, Openly.
बेरिदा=Uncover
तग़ाफ़ुल=Negligence
फ़ना=Destroy
क़फ़स=Cage, Prison
बाज़ुबां= One who can speak
बेज़ुबां= Speechless, Voiceless