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शनिवार, 29 सितंबर 2018

ख़त

थी इक नई जलन सी, जब ख़त जला पुराना,
लपटों में दिख रहा था, गुज़रा हुआ ज़माना !

सोचा कि फ़िर से इक ख़त, लिख करके मैं जला दूँ,
जो भूल सब गया है, मैं भी उसे भुला दूँ !

मुश्किल ये कशमकश थी, मुश्किल ये फ़ैसला था,
जब हर्फ़ वो जले थे, मैं साथ में जला था !

थी राख में नुमाया उस चेहरे की बनावट,
जलकर भी मिट न पाई, उन हाथों की लिखावट !

जिन उँगलियों से लिक्खे, तुमने हज़ार वादे,
जिन हाथों की हिना में महके मेरे इरादे !

उस याद के धुएँ में महकी वही हिना है,
मैं जिसकी हर ख़ुशी था, वो ख़ुश मेरे बिना है !

इस राख में सुलगते हैं राज़ अब भी बाक़ी,
एहसास बुझ गए हैं, ‘अल्फ़ाज़’ अब भी बाक़ी !

||| अल्फ़ाज़ |||

ख़त= Letter
ज़माना= Time, World, Era
कशमकश= Struggle, Wrangle, Tug Of War
फ़ैसला= Decision
हर्फ़= Alphabet
राख= Ashes
नुमाया= Apparent, Conspicuous, Prominent, Visible
हिना= Henna
इरादे= Intentions, Will, Desires
एहसास= Feeling

रविवार, 27 अगस्त 2017

बेमुरव्वत!!!

बेमुरव्वत मैं भी ज़रा हो जाऊं,
क्यूँ न अब मैं भी ख़फ़ा हो जाऊं!

तू बेनियाज़ है अब मेरी मरीज़ी से,
बेग़रज़ मैं तुझसे इस दफ़ा हो जाऊं!

तुझसा कोई हुनर मुझको भी अता हो,
क़त्ल भी करूँ और बेगुनाह हो जाऊं!

तेरे क़िरदार का हर ऐब नुमाया होगा,
सर-ए-बाज़ार अगर मैं बेरिदा हो जाऊं!

वो तग़ाफ़ुल न करेगा ख़बर है हमको,
'फ़राज़' किसके लिए मैं फ़ना हो जाऊं!

मेरे ऐब को भी लोग मेरी अदा समझें,
मुकम्मल मैं कुछ इस तरह हो जाऊं!

क़फ़स में तो हूँ मगर परिंदा तो नहीं,
मैं बाज़ुबां हूँ तो कैसे बेज़ुबां हो जाऊं!

|||फ़राज़|||

बेमुरव्वत=Unkind, Uncivil, Inhuman.
बेनियाज़= Carefree
मरीज़ी= Sickness, Unwell.
बेग़रज़=Uninterested.
अता= Gift, Giving
क़िरदार= Character
ऐब=Defect, Imperfection
नुमाया= Apparent, Visible.
सर-ए-बाज़ार= In public, Openly.
बेरिदा=Uncover
तग़ाफ़ुल=Negligence
फ़ना=Destroy
क़फ़स=Cage, Prison
बाज़ुबां= One who can speak
बेज़ुबां= Speechless, Voiceless