थी इक नई जलन सी, जब ख़त जला पुराना,
लपटों में दिख रहा था, गुज़रा हुआ ज़माना !
सोचा कि फ़िर से इक ख़त, लिख करके मैं जला दूँ,
जो भूल सब गया है, मैं भी उसे भुला दूँ !
मुश्किल ये कशमकश थी, मुश्किल ये फ़ैसला था,
जब हर्फ़ वो जले थे, मैं साथ में जला था !
थी राख में नुमाया उस चेहरे की बनावट,
जलकर भी मिट न पाई, उन हाथों की लिखावट !
जिन उँगलियों से लिक्खे, तुमने हज़ार वादे,
जिन हाथों की हिना में महके मेरे इरादे !
उस याद के धुएँ में महकी वही हिना है,
मैं जिसकी हर ख़ुशी था, वो ख़ुश मेरे बिना है !
इस राख में सुलगते हैं राज़ अब भी बाक़ी,
एहसास बुझ गए हैं, ‘अल्फ़ाज़’ अब भी बाक़ी !
||| अल्फ़ाज़ |||
ख़त= Letter
ज़माना= Time, World, Era
ज़माना= Time, World, Era
कशमकश= Struggle,
Wrangle, Tug Of War
फ़ैसला= Decision
हर्फ़= Alphabet
राख= Ashes
नुमाया= Apparent,
Conspicuous, Prominent, Visible
हिना= Henna
इरादे= Intentions,
Will, Desires
एहसास= Feeling
एहसास= Feeling