raah लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
raah लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 23 मार्च 2017

तन्हा !!!

स्याह रात और हवाएं तन्हा,
स्याहियों से उलझी मेरी सदायें तन्हा !
कोई बादलों के पार नहीं रहता शायद,
लौट आती हैं मेरी ख़ामोश दुआएं तन्हा !

अक्सर मेरी ख़ामोशियों में शोर बनके,
चीख़ती रहती हैं मेरी आहें तन्हा !
तेरी राहों से मिले महज़ पांव के छाले,
लौटकर जब आयीं बेज़ार निगाहें तन्हा !

इस रु-ए-ज़मीं तक तुझको तलाश कर,
लौट आयीं मेरी नाकाम निगाहें तन्हा !
न तलब-ए-वफ़ा, न शिक़वा रंजिशों से,
बेकैफ़ सफ़र, बेकैफ़ सी राहें तन्हा !!!

||| फ़राज़ |||

रु-ए-ज़मीं= End of the world
बेकैफ़= = joyless, languid

गुरुवार, 2 मार्च 2017

वो आँखों से ठग लेता है

वो पंछी मेरी मन बगिया
ख़्वाबों को चुनने आता है !
वो आँखों से ठग लेता है
वो बातों से छू जाता है !

बेरंग सी मेरी हस्ती को
वो रंग नए से देता है !
किरदार से काँटों को चुनकर
मन फूलों सा कर देता है !

वो बेफ़िक्री की बातों से
मेरी फ़िक्रें झुठलाता है !
जब आता है वो इस दिल में
सबकुछ रौशन कर देता है !

वो राह है जैसे जन्नत की
ताउम्र मुसाफ़िर हो जाऊं !
उस राह का जोगी बन जाऊं
ताउम्र मुहाजिर हो जाऊं !

एक बेपरवाह मुस्कान सा वो
अक्सर होठों पर आता है !
वो क़तरा आंसू का बनकर
इन आँखों से बह जाता है !

| फ़राज़ |

सोमवार, 23 जनवरी 2017

वो राह बदल देता है !

दर्द मेरा वो ख़बरों की तरह पढ़ता है,
र्क़ बातों के वो अक्सर पलट देता है !

आज भी मिलता है मगर फ़नकार की तरह,
मेरी शिक़ायतें सुनकर वो बात बदल देता है !

अब मेरी खैर भी वो दुआ में नहीं करता,
वो लिबासों की तरह दुआ भी बदल देता है !

मुझपर इख़्तियार रखता है और ख़ुद पर भी,
ख़ुदा सबको कहाँ इतना हुनर देता है !

हर शाम इरादा है उसे भूल जाने का,
वो ख़्वाब में आकर मेरी सोच बदल देता है !

ज़माने को भी मुझसे कोई शिक़ायत न रही,
जबसे मुझे देख कर वो राह बदल देता है !

फ़राज़...