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शनिवार, 26 जनवरी 2019

न मिला !

सूखा पत्ता हूँ जिसको चमन न मिला,
वो मुहाजिर हूँ जिसको वतन न मिला !

सालहासाल मुझसे वो मिलता रहा,
मेरे मन से कभी उसका मन न मिला !

तू तो कहता था बिछड़े तो मर जायेंगे,
तुझसा कोई भी वादा-शिकन न मिला !

लूट कर के तू मेरा यक़ीं ले गया,
तेरे जैसा कोई राहज़न न मिला !

मय-कदे, मस्जिदें हमने सब छान लीं,
टूटा दिल जोड़ने का जतन न मिला !

रोने, बिलखने, बिखर जाने को,
तेरा दामन तेरा पैरहन न मिला !

कुछ तो हमसे कभी भी न मन से मिले,
और कुछ से हमारा ही मन न मिला !

इश्क़ है सिलसिला रूह से रूह का,
क्या हुआ कि अगर तन से तन न मिला !

जान जाने का 'अल्फ़ाज़' क्या फ़ायदा,
गर तिरंगे के जैसा कफ़न न मिला !

||| अल्फ़ाज़ |||

चमन= Flower Garden
मुहाजिर= Emigrant, Refugee, Evacuee, Migrant
वतन= Abode, Native Country, Home, Residence
सालहासाल= Years After Year
वादाशिकन= Promise Breaker
यक़ीं= Trust, Faith, Belief, Confidence
राहज़न= Robber, Highwayman
मय-कदा= Bar, Tavern
मस्जिदें= The Mosque
जतन= Effort
पैरहन= Dress, Apparel
सिलसिला= Chain, Series, Succession
रूह= Soul, Spirit
तन= Body
फ़ायदा= Profit, Gain
गर= If
कफ़न= Shroud, Winding Sheet For A Dead Body, Cloth To Cover The Corpse

गुरुवार, 2 मार्च 2017

वो आँखों से ठग लेता है

वो पंछी मेरी मन बगिया
ख़्वाबों को चुनने आता है !
वो आँखों से ठग लेता है
वो बातों से छू जाता है !

बेरंग सी मेरी हस्ती को
वो रंग नए से देता है !
किरदार से काँटों को चुनकर
मन फूलों सा कर देता है !

वो बेफ़िक्री की बातों से
मेरी फ़िक्रें झुठलाता है !
जब आता है वो इस दिल में
सबकुछ रौशन कर देता है !

वो राह है जैसे जन्नत की
ताउम्र मुसाफ़िर हो जाऊं !
उस राह का जोगी बन जाऊं
ताउम्र मुहाजिर हो जाऊं !

एक बेपरवाह मुस्कान सा वो
अक्सर होठों पर आता है !
वो क़तरा आंसू का बनकर
इन आँखों से बह जाता है !

| फ़राज़ |

मंगलवार, 22 नवंबर 2016

इल्तिजा!!!

ऐ ख़ुदाहुनर तू मुझे इतना दे दे,
मेरे अहसास को लफ़्ज़ों में तर्जुमा दे दे !

ताउम्र भटकता रहा हूँ मुहाजिर जैसा,
ज़िन्दगी की सख़्तियों को सायबान दे दे !

नस्ल-ए-आदम का हर राज़ जानने वाले,
मुझको भी अपनी हस्ती के निशां दे दे !

वसाविस की गिरफ़्त में है हस्ती मेरी,
मेरे दिल को कोई नेक मशवरा दे दे !

ले इम्तिहान तू बेशक़पर इल्तिजा भी सुन,
सब्र करने का तू मुझे हौसला दे दे !

ये कैसी आज़माइश, कि रूह भी क़ैद है,
मेरी परवाज़ को तू मेरा आसमान दे दे !

रूह झुलसी है सफ़र-ए-आतिशां करते,
मेरी आवारगी को तू आशियाँ दे दे !

बहुत रुसवा हैं तेरा सजदा करने वाले,
ख़ुदारा इस क़ौम को भी तू कर्बला दे दे !

गुनाह भी करता है और तेरा सजदा भी,
मौला 'फ़राज़' को इबादत का सलीक़ा दे दे !

|||फ़राज़|||

तर्जुमा= Translation.
ताउम्र= Lifelong. All life.
मुहाजिर= Refugee, Emigrant.
सख़्तियां= Hardships, Rigidities.
नस्ल-ए-आदम= Ancestry of Adam.
निशां= Mark, Sign.
वसाविस= Evil thoughts, Bad thoughts.
गिरफ़्त= Lock, Objection
मशवरा= Consultation, Suggestion.
इल्तिजा= Request, Plead.
आज़माइश= Examination, Trail, Test.
परवाज़= Flight.
सफ़र-ए-आतिशां= Journey of fire.
आवारगी= Wandering, Waywardness.
आशियाँ= Nest, Shelter
ख़ुदारा= O God.
क़ौम= Tribe, Race, People.
कर्बला= A place in Iraq where Imam Hussain was assassinated and buried in a holy war.
रुसवा= Dishonored, Despondent.
सजदा= Bowing in Prayer so as to touch the ground with the forehead.
मौला= God.
सलीक़ा= Good manner, Discreet of good disposition.